{"_id":"5da213708ebc3e93ab3b9078","slug":"others-in-pilibhit-bareilly-news-bly379945345","type":"story","status":"publish","title_hn":"खेतों में बोया पुरानी किस्म का धान, बरबाद हो गए किसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खेतों में बोया पुरानी किस्म का धान, बरबाद हो गए किसान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
किसानों को इस बार अधिक मुनाफे का लालच ले डूबा। किसानों ने हर साल की तरह इस बार भी ऐसे धान का उत्पादन किया जो कृषि विभाग से प्रमाणित नहीं है। यानी आउटडेटेड वैरायटी पीआर-113 का धान बोना किसानों को भारी पड़ गया। इस धान में वैक्टीरियल पेनिकल ब्लाइट रोग लग गया। इससे धान के उत्पादन में औसतन 30 फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई। पीआर 113 धान पूरे जनपद के कुल रकबे का 80 फीसदी बोया गया है। अब किसान परेशान हैं क्योंकि उत्पादन सामान्य से 30 फीसदी कम है। विभागीय अफसर भी धान खरीद लक्ष्य पूरा होना के प्रति आशंकित हैं। अफसरों का मानना है कि ऐसी स्थिति में खरीद लक्ष्य निर्धारित से आधा हो जाए तो भी बहुत।
1.30 लाख हेक्टेयर पर की गई धान की खेती
खाद्यान्न की दृष्टि से पीलीभीत धान उत्पादन में अग्रणी माना जाता है। यहां धान, गेहूं और गन्ने की सर्वाधिक पैदावार होती है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जनपद में 2,19,592 किसान हैं। इसमें सीमांत किसानों (एक हेक्टेयर वाले) की संख्या 1,89,680, लघु किसानों (एक से दो हेक्टेयर तक) की संख्या 21,902 और बड़े किसानों की संख्या 8010 है। कृषि विभाग के मुताबिक जनपद में इस बार 1.30 लाख हेक्टेयर जमीन पर धान की खेती गई है। इस रकवे को देखते हुए इस बार यहां 6.38 लाख मीट्रिक टन धान का उत्पादन होने का अनुमान था। आउटडेटेड वैरायटी पीआर-113 धान में घातक रोग लगने के बाद अब धान की फसल अनुमान की 70 फीसदी ही होगी।
पुरानी धान की किस्म ने बिगाड़ी किसानों की किस्मत
अधिकतर किसान पारंपरिक खेती ही करते हैं। इस बार कुल 1.30 लाख हेक्टेयर धान के 75 से 80 प्रतिशत रकवे में पीआर 113 लगाया गया। शेष 20-25 प्रतिशत रकवे में पीआर 114, पीआर 126, नरेंद्र 3112 के अलावा मंसूरी आदि की खेती की गई थी। कृषि विभाग के मुताबिक पीआर 113 आउट डेटेड प्रजाति है। इसके बावजूद किसानों ने सर्वाधिक इसी प्रजाति को लगाया। नतीजा यह हुआ कि इस बार इस प्रजाति में बड़े पैमाने पर वैक्टीरियल पेनिकल ब्लाइट रोग लग गया। किसानों ने रोग से बचाव के कई उपाय भी किए, लेकिन नाकाम रहे। किसानों की बात मानें तो यह रोग लगने से धान के उत्पादन में 20 से 30 फीसदी कमी देखी जा रही है।
विज्ञापन
15 से 20 क्विंटल प्रति एकड़ रह गई पैदावार
किसानों के मुताबिक पीआर 113 धान की प्रजाति पिछले 10-15 सालों से लगाते आ रहे हैं क्योंकि इस धान से मोटा मुनाफा होता है। अब तक पीआर 113 धान 25 से 34 क्विंटल प्रति एकड़ निकलता था, लेकिन रोग लगने से इस धान का उत्पादन 15 से 20 क्विंटल प्रति एकड़ रह गया है। कहीं-कहीं तो यह प्रति एकड़ 10 क्विंटल ही निकल रहा है।
पीआर 113 धान की फसल की बिक्री सरकारी क्रय केंद्रों पर तो दूर की बात है, मंडियों में आढ़ती भी इस धान को खरीदने से कतरा रहे हैं। मंडी में शनिवार को इस प्रजाति का धान 1330 से 1400 रुपये क्विंटल ही बिक पा रहा है।
धान में बीमारी लगने से उत्पादन गिरेगा। पीआर 113 धान को प्राइवेट आढ़तिये भी अच्छे रेट में खरीदने को तैैयार नहीं है। क्रय केंद्रों पर भी नहीं बिक रहा है।
गुरदीप सिंह मल्लू, बिरहनी
धान की पीआर 113 वैरायटी बोने से इस बार काफी नुकसान हो गया है। एक बार किसी तरह धान बिक जाए। अगली सीजन में यह धान नहीं लगाएंगे।
हरपाल सिंह, भक्तनिया फॉर्म
धान की पीआर 113 वैरायटी आउट डेटेड है। किसानों को इसके उत्पादन को मना किया गया। इसमें इस बार वैक्टीरियल पेनिकल ब्लाइट रोग लग गया। फिर भी 75 से 80 फीसदी रकबे में किसानों ने यही धान लगाया।
डॉ. एसएस ढाका, कृषि वैज्ञानिक
विज्ञापन
1.30 लाख हेक्टेयर पर की गई धान की खेती
खाद्यान्न की दृष्टि से पीलीभीत धान उत्पादन में अग्रणी माना जाता है। यहां धान, गेहूं और गन्ने की सर्वाधिक पैदावार होती है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जनपद में 2,19,592 किसान हैं। इसमें सीमांत किसानों (एक हेक्टेयर वाले) की संख्या 1,89,680, लघु किसानों (एक से दो हेक्टेयर तक) की संख्या 21,902 और बड़े किसानों की संख्या 8010 है। कृषि विभाग के मुताबिक जनपद में इस बार 1.30 लाख हेक्टेयर जमीन पर धान की खेती गई है। इस रकवे को देखते हुए इस बार यहां 6.38 लाख मीट्रिक टन धान का उत्पादन होने का अनुमान था। आउटडेटेड वैरायटी पीआर-113 धान में घातक रोग लगने के बाद अब धान की फसल अनुमान की 70 फीसदी ही होगी।
विज्ञापन
पुरानी धान की किस्म ने बिगाड़ी किसानों की किस्मत
अधिकतर किसान पारंपरिक खेती ही करते हैं। इस बार कुल 1.30 लाख हेक्टेयर धान के 75 से 80 प्रतिशत रकवे में पीआर 113 लगाया गया। शेष 20-25 प्रतिशत रकवे में पीआर 114, पीआर 126, नरेंद्र 3112 के अलावा मंसूरी आदि की खेती की गई थी। कृषि विभाग के मुताबिक पीआर 113 आउट डेटेड प्रजाति है। इसके बावजूद किसानों ने सर्वाधिक इसी प्रजाति को लगाया। नतीजा यह हुआ कि इस बार इस प्रजाति में बड़े पैमाने पर वैक्टीरियल पेनिकल ब्लाइट रोग लग गया। किसानों ने रोग से बचाव के कई उपाय भी किए, लेकिन नाकाम रहे। किसानों की बात मानें तो यह रोग लगने से धान के उत्पादन में 20 से 30 फीसदी कमी देखी जा रही है।
विज्ञापन
15 से 20 क्विंटल प्रति एकड़ रह गई पैदावार
किसानों के मुताबिक पीआर 113 धान की प्रजाति पिछले 10-15 सालों से लगाते आ रहे हैं क्योंकि इस धान से मोटा मुनाफा होता है। अब तक पीआर 113 धान 25 से 34 क्विंटल प्रति एकड़ निकलता था, लेकिन रोग लगने से इस धान का उत्पादन 15 से 20 क्विंटल प्रति एकड़ रह गया है। कहीं-कहीं तो यह प्रति एकड़ 10 क्विंटल ही निकल रहा है।
पीआर 113 धान की फसल की बिक्री सरकारी क्रय केंद्रों पर तो दूर की बात है, मंडियों में आढ़ती भी इस धान को खरीदने से कतरा रहे हैं। मंडी में शनिवार को इस प्रजाति का धान 1330 से 1400 रुपये क्विंटल ही बिक पा रहा है।
धान में बीमारी लगने से उत्पादन गिरेगा। पीआर 113 धान को प्राइवेट आढ़तिये भी अच्छे रेट में खरीदने को तैैयार नहीं है। क्रय केंद्रों पर भी नहीं बिक रहा है।
गुरदीप सिंह मल्लू, बिरहनी
धान की पीआर 113 वैरायटी बोने से इस बार काफी नुकसान हो गया है। एक बार किसी तरह धान बिक जाए। अगली सीजन में यह धान नहीं लगाएंगे।
हरपाल सिंह, भक्तनिया फॉर्म
धान की पीआर 113 वैरायटी आउट डेटेड है। किसानों को इसके उत्पादन को मना किया गया। इसमें इस बार वैक्टीरियल पेनिकल ब्लाइट रोग लग गया। फिर भी 75 से 80 फीसदी रकबे में किसानों ने यही धान लगाया।
डॉ. एसएस ढाका, कृषि वैज्ञानिक