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एमएलए का टिकट चाहिए तो मीटिंग में आइए
बरेली
Updated Thu, 02 Jul 2015 02:28 AM IST
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समाजवादी पार्टी के मंत्री, विधायकों समेत तमाम पदाधिकारीअब तक पार्टी की मासिक बैठकों को हल्के में लेते रहे हैं। मुख्यमंत्री और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव के नए फरमान के बाद अब मासिक बैठकों को हल्के में लेना भारी पड़ेगा। खासतौर से दो साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में एमएलए के टिकट के दावेदार और वर्तमान विधायक अगर पार्टी के कार्यक्रमों में शामिल नहीं हुए तो उनका टिकट खतरे में पड़ सकता है।
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सपा हाईकमान की ओर से जिला और महानगर कार्यकारिणी को जारी निर्देशों में पार्टी की मासिक प्रत्येक माह के प्रथम शनिवार को आयोजित करने को कहा गया है। इसमें राज्य सरकार के मंत्री, सपा से चुनाव लड़े एमएलए, एमएलसी समेत पूर्व सांसद, पूर्व विधायक और समस्त पदाधिकारियों को अनिवार्य रूप से मीटिंग में शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं। उनकी उपस्थिति पार्टी के हाजिरी रजिस्टर में किए गए हस्ताक्षर से प्रमाणित होगी। जिला कार्यकारिणी प्रति माह की रिपोर्ट विधायकों और पदाधिकारियों के हस्ताक्षर सहित हाईकमान को भेजेगी। साथ ही सपा के मंत्रियों और विधायकों को पार्टी कोष में कम से कम एक हजार रुपये प्रति माह और अन्य पदाधिकारियों को एक हजार रुपये वार्षिक चंदा जमा करना होगा। इसकी उनको बाकायदा छपी हुई रसीद मिलेगी। चंदे की राशि बैंक खाते में जमा होगी। एमएलए का टिकट देते समय दावेदार को पार्टी के नियमित कार्यक्रमों में हिस्सेदारी और आर्थिक सहयोग का भी आकलन किया जाएगा।
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गुटबाजी रोकने में भी मिलेगी मदद
समाजवादी पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी किसी से छिपी नहीं है। इस वजह से पार्टी के ज्यादातर विधायक और जिला कार्यकारिणी समिति के पदाधिकारी मासिक बैठकों से अक्सर नदारद रहते हैं। बताया जाता है कि हाईकमान ने अंदरूनी गुटबाजी को रोकने के लिए मासिक बैठकों में प्रत्येक पदाधिकारी का मौजूद रहना अनिवार्य किया है।
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वर्जन
‘मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि पार्टी की मासिक बैठकों में जिला और महानगर कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के अलावा मंत्री और वर्तमान एमएलए भी शामिल हों। इनके रजिस्टर पर बाकायदा हस्ताक्षर होंगे। उसकी छाया प्रति लगाकर रिपोर्ट हाईकमान को भेजी जाएगी। एमएलए के टिकट तय करने में ये चीजें भी काउंट की जाएंगी।’ वीरपाल सिंह यादव, जिलाध्यक्ष सपा