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साहब! ठेकेदारों से जान का खतरा.. शस्त्र लाइसेंस दिला दो
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बरेली। शस्त्र लाइसेंस हासिल करने के लिए लोग क्या-क्या जतन नहीं करते? विधायक, सांसद और मंत्रियों की सिफारिश से लेकर जान को खतरा तक बताते हैं। शस्त्र लाइसेंस की चाहत में पीडब्ल्यूडी के एक इंजीनियर ने भी अपनी जान को खतरा बताया है। डीएम को भेजी चिट्ठी में उन्होंने कहा है कि दबंग ठेकेदारों से उन्हें जान का खतरा है, लिहाजा शस्त्र लाइसेंस जारी किया जाए।
पीडब्ल्यूडी के अवर अभियंता राकेश कुमार का कहना है कि उन्हें कठिन परिस्थितियों में दबंग ठेकेदारों से सरकारी काम कराने पड़ते हैं। ऐसे में उनके पास आत्मरक्षा के लिए कोई हथियार नहीं है। उन्हें और उनके परिवार को हर वक्त जान का खतरा रहता है। अवर अभियंता का कहना है कि उन्होंने वर्ष 2018 में आवेदन किया था, लेकिन शस्त्र लाइसेंस अब तक नहीं बन सका है, जबकि शासनादेश के तहत भी जूनियर इंजीनियरों को प्राथमिकता के आधार पर शस्त्र लाइसेंस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। अवर अभियंता ने आत्मरक्षा के लिए शस्त्र लाइसेंस जारी करने का आग्रह किया है। इस संबंध में डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि नए शस्त्र लाइसेंस पर रोक है, फिर भी प्रार्थना पत्र की जांच को कहा जाएगा।
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पीडब्ल्यूडी के अवर अभियंता राकेश कुमार का कहना है कि उन्हें कठिन परिस्थितियों में दबंग ठेकेदारों से सरकारी काम कराने पड़ते हैं। ऐसे में उनके पास आत्मरक्षा के लिए कोई हथियार नहीं है। उन्हें और उनके परिवार को हर वक्त जान का खतरा रहता है। अवर अभियंता का कहना है कि उन्होंने वर्ष 2018 में आवेदन किया था, लेकिन शस्त्र लाइसेंस अब तक नहीं बन सका है, जबकि शासनादेश के तहत भी जूनियर इंजीनियरों को प्राथमिकता के आधार पर शस्त्र लाइसेंस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। अवर अभियंता ने आत्मरक्षा के लिए शस्त्र लाइसेंस जारी करने का आग्रह किया है। इस संबंध में डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि नए शस्त्र लाइसेंस पर रोक है, फिर भी प्रार्थना पत्र की जांच को कहा जाएगा।
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