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बरेली: साक्षी मिश्रा के पिता ने लिया लावारिस बच्ची को गोद, श्मशान में दबी मिली थी

Tue, 15 Oct 2019 01:00 AM IST
बरेली ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली Published by: बरेली ब्यूरो Updated Tue, 15 Oct 2019 01:00 AM IST
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Bareilly: Sakshi Mishra father rajesh mishra adopts an abandoned girl child found buried
साक्षी मिश्रा- लावारिस बच्ची का इलाज कराते पिता पप्पू भरतौल - फोटो : Social Media

उत्तर प्रदेश के बरेली में साक्षी मिश्रा और अजितेश की विवादित और बहुचर्चित शादी के बाद विधायक पिता पप्पू भरतौल उर्फ राजेश मिश्रा के सूने घर में एक बार फिर बेटी की किलकारियां गूंजने लगी हैं। बेटी साक्षी के अपनी मर्जी से शादी कर घर छोड़ देने के बाद विधायक पिता ने एक लावारिस बच्ची को गोद लिया है। 

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विधायक पप्पू भरतौल के इस फैसले से एक तरफ जहां उनके जीवन में बेटी की कमी पूरी हो गई, वहीं दूसरी ओर मासूम बच्ची को एक परिवार भी मिल गया। लावारिस बच्ची जिस हालत में लोगों को मिली थी, वह पूरे जिले में चर्चा कि विषय है। लोगों ने मासूम बच्ची का नाम 'सीता' रखा है। 
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कौन है वह बच्ची जिसने पूरी की साक्षी की कमी?

'सीता' की उम्र यूं तो सिर्फ आठ दिन है, लेकिन उसकी जिजीविषा का डॉक्टर भी लोहा मान रहे हैं। पैदा होते ही घड़े में बंद कर मिट्टी में गाड़ दी गई यह बच्ची न सिर्फ चार दिन तक मजबूती से अपनी जिंदगी की डोर पकड़े रही बल्कि अस्पताल पहुंचने के बाद सेहतमंद भी हो रही है। 

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श्मशान घाट में दबी मिली थी बच्ची

डॉक्टरों के मुताबिक जमीन के अंदर चार दिन दबे रहने के बावजूद बच्ची के शरीर में मौजूद ब्राउन फैट ने उसे जिंदा रखा। हालांकि यह भी किसी चमत्कार से कम नहीं है। चार दिन घड़े में पड़े रहने की वजह से उसके शरीर पर इंफेक्शन जरूर फैल गया है। ब्राउन फैट नष्ट होने से पेट और गालों पर झुर्रियां भी पड़ गई हैं। 

चार दिन पहले सिटी श्मशान घाट में अपनी मृत बच्ची को दफनाने गए सीबीगंज में रहने वाले एक व्यवसायी को सीता जमीन में गड़ी मिली थी। दरअसल अपनी मृत बच्ची को दफनाने के लिए गड्ढा खोदने के लिए उन्होंने जब फावड़ा चलवाया तो इत्तफाक से एक घड़े से टकराया। इसके साथ बच्ची के रोने की आवाज आई तो उसे सावधानी से बाहर निकाला गया। 

सीता की जिंदगी के चार दिनों की इस कहानी के बाद दूसरा पहलू अस्पताल का है जहां उसका इलाज चल रहा है। बिथरी विधायक पप्पू भरतौल ने इस मासूम के सिर पर हाथ रखा तो उसकी जिंदगी बचने की उम्मीद और बढ़ गई। बच्ची का इलाज कर रहे डॉ. रवि खन्ना के मुताबिक शरीर में मौजूद ब्राउन फैट ने चार दिन तक उसकी जिंदगी बचाए रखी। उसकी हालत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। 

सिर्फ नवजात बच्चों में होता है ब्राउन फैट

नवजात बच्चों के शरीर के किसी भी अंग की तुलना में ब्राउन फैट 300 गुना ज्यादा गर्मी पैदा करने की क्षमता रखती है। ये चर्बी पेट, गाल और जांघ पर होती है। भीषण सर्दी में भी यह बच्चों को मौत से बचाती है। 

आहार न मिलने की स्थिति में यही फैट जीवन बचाता है, कैलोरी को जलाकर काफी गर्मी पैदा करता है। जब बच्चा पैदा होता है तो उसके शरीर में काफी ब्राउन फैट होता है जो उसके मुख्य अंगों को चारों तरफ से घेरे रहता है और उसे गर्मी देता है।

उम्र बढ़ने के साथ शरीर में ब्राउन फैट कम होने लगता है। डॉ. रवि खन्ना के मुताबिक ब्राउन फैट ने ही बच्ची को जिंदा रखा। उसके शरीर पर झुर्रियां भी इलाज से सही हो सकती हैं। 

दो सौ ग्राम बढ़ा वजन

सीता को जब घड़े से निकाला गया था तब उसका वजन एक किलो ही था। अब उसका वजन दो सौ ग्राम बढ़ गया है। शरीर में सेप्टिसीमिया इंफेक्शन है। बच्ची के रक्त की जांच में टोटल ल्यूकोसाइट्स काउंट (टीएलसी) 19500 निकला है जो सामान्यत: 11000 होना चाहिए। टीएलसी का कम या ज्यादा होना घातक होता है। 

एसएसपी के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज

बच्ची को श्मशान में कौन और कब दबा गया, पुलिस ने अब तक इसकी सुध लेने की कोशिश नहीं की थी। एसएसपी के आदेश पर अब सुभाषनगर पुलिस ने सोमवार को अज्ञात आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट लिख ली है। पुलिस अब बच्ची को जमीन में गाड़ने वालों की तलाश करेगी। माना जा रहा है कि यह पाप उसके मां-बाप ने ही किया होगा। 
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