{"_id":"5d8fc7048ebc3e012c6530d7","slug":"other-bareilly-news-bly378089578","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब कमिश्नर ने जारी किया कारण बताओ नोटिस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब कमिश्नर ने जारी किया कारण बताओ नोटिस
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बरेली। मिलावटखोरी और शहर भर में फैले अवैध हुक्का बार पर आंखें मूंदे रखने वाला एफएसडीए कार्यालय मुनाफे के लिए शहरवासियों को असुरक्षित खाद्य पदार्थ खिलाने वाले व्यापारियों का साथ देने में फंस गया है। एफएसडीए अफसरों के तमाम नमूनों की रिपोर्ट असुरिक्षत, अखाद्य, अधोमानक और मिसब्रांड होने के बावजूद उन्हें सांठगांठ के तहत दबाकर बैठे रहने का मामला पकड़ में आने के बाद आयुक्त ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। लखनऊ से यह नोटिस यहां आने से पहले ही जिला अभिहित अधिकारी छुट्टी चले गए हैं।
दरअसल एफएसडीए में यह खेल काफी समय से चल रहा है। मार्केट से लिए जाने वाले नमूनों के फेल होने की लैब से आई रिपोर्ट को गोपनीय रखकर व्यापारियों से सौदेबाजी की जाती है। बातचीत तय होने के बाद उन्हें अपील का मौका देकर नमूनों को फिर जांच के लिए कोलकाता लैब में भेज दिया जाता है। इस बीच लैब से फेल होने वाले नमूनों की सूची एफएसडीए आयुक्त कार्यालय भेज कर अभियोजन दायर करने की अनुमति मांगी जाती है। अक्सर अनुमति मिलने के बाद भी एफएसडीए के अफसर मुकदमा दर्ज नहीं कराते। बल्कि इसके बाद फिर सौदेबाजी होती है। इस खेल में इतना समय बर्बाद हो जाता है कि मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई होना ही मुश्किल हो जाता है। पिछले दिनों हुई विभागीय समीक्षा में एफएसडीए आयुुक्त मिनिस्ती एस. ने यह खेल पकड़ लिया।
इसके बाद एफएसडीए आयुुक्त मिनिस्ती एस. ने जिला अभिहित अधिकारी धर्मराज मिश्रा को कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिनों में जवाब मांगा है। इस नोटिस में उन्होंने ऐसे छह मामलों का जिक्र किया है जिनकी रिपोर्ट दबाकर समय से मुख्यालय को जानकारी नहीं दी गई। मुख्यालय से मुकदमा दायर करने की अनुमति भी कई दिनों तक दबाए रखने के मामले भी पकड़े गए हैं। बता दें कि जिले में एफएसडीए कार्यालय सीधे डीएम के अधीन काम करता है लेकिन एफएसडीए कार्यालय डीएम को भी सही जानकारी नहीं देता।
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ऊपर तक जुड़े हैं तार
एफएसडीए आयुक्त मिनिस्ती एस की ओर से जारी नोटिस बरेली पहुंचने से पहले ही जिला अभिहित अधिकारी धर्मराज मिश्रा छुट्टी लेकर अचानक निकल लिए। यह नोटिस आयुक्त कार्यालय से 20 सितंबर को जारी हुआ जो शनिवार को यहां पहुंचा, लेकिन जिला अभिहित अधिकारी दो दिन पहले ही छुट्टी जा चुके थे। इससे यह भी साबित हो गया कि एफएसडीए कार्यालय के तार मुख्यालय तक जुड़े हुए हैं और वहां से गोपनीय कार्रवाइयों की जानकारी भी लीक होकर नीचे तक पहुंच जाती है।
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दरअसल एफएसडीए में यह खेल काफी समय से चल रहा है। मार्केट से लिए जाने वाले नमूनों के फेल होने की लैब से आई रिपोर्ट को गोपनीय रखकर व्यापारियों से सौदेबाजी की जाती है। बातचीत तय होने के बाद उन्हें अपील का मौका देकर नमूनों को फिर जांच के लिए कोलकाता लैब में भेज दिया जाता है। इस बीच लैब से फेल होने वाले नमूनों की सूची एफएसडीए आयुक्त कार्यालय भेज कर अभियोजन दायर करने की अनुमति मांगी जाती है। अक्सर अनुमति मिलने के बाद भी एफएसडीए के अफसर मुकदमा दर्ज नहीं कराते। बल्कि इसके बाद फिर सौदेबाजी होती है। इस खेल में इतना समय बर्बाद हो जाता है कि मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई होना ही मुश्किल हो जाता है। पिछले दिनों हुई विभागीय समीक्षा में एफएसडीए आयुुक्त मिनिस्ती एस. ने यह खेल पकड़ लिया।
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इसके बाद एफएसडीए आयुुक्त मिनिस्ती एस. ने जिला अभिहित अधिकारी धर्मराज मिश्रा को कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिनों में जवाब मांगा है। इस नोटिस में उन्होंने ऐसे छह मामलों का जिक्र किया है जिनकी रिपोर्ट दबाकर समय से मुख्यालय को जानकारी नहीं दी गई। मुख्यालय से मुकदमा दायर करने की अनुमति भी कई दिनों तक दबाए रखने के मामले भी पकड़े गए हैं। बता दें कि जिले में एफएसडीए कार्यालय सीधे डीएम के अधीन काम करता है लेकिन एफएसडीए कार्यालय डीएम को भी सही जानकारी नहीं देता।
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ऊपर तक जुड़े हैं तार
एफएसडीए आयुक्त मिनिस्ती एस की ओर से जारी नोटिस बरेली पहुंचने से पहले ही जिला अभिहित अधिकारी धर्मराज मिश्रा छुट्टी लेकर अचानक निकल लिए। यह नोटिस आयुक्त कार्यालय से 20 सितंबर को जारी हुआ जो शनिवार को यहां पहुंचा, लेकिन जिला अभिहित अधिकारी दो दिन पहले ही छुट्टी जा चुके थे। इससे यह भी साबित हो गया कि एफएसडीए कार्यालय के तार मुख्यालय तक जुड़े हुए हैं और वहां से गोपनीय कार्रवाइयों की जानकारी भी लीक होकर नीचे तक पहुंच जाती है।