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न भेड़िया, न सियार, अज्ञात जानवर था
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Tue, 30 Aug 2016 01:55 AM IST
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कर्मचारी नगर में भेड़िया या सियार के हमले की बात जांच में पूरी तरह सच साबित नहीं हुई। वन विभाग की जांच में पाया गया कि हमला करने वाला जानवर न भेड़िया था और न ही सियार। वन विभाग की मानें तो जनपद में भेेड़िया है ही नहीं और सियार डरपोक होता है। वह आसानी से किसी पर हमला नहीं करता। रात में अचानक हमला करने वाला अज्ञात जानवर था। वन विभाग की टीम उस जानवर की तलाश में अभी भी जुटी हुई हैं। टीम को मात्र दो घायल मौके पर मिले। उनके ही बयान दर्ज किए गए हैं।
वन विभाग के रेंज आफीसर ओपी सिंह के पास रात 10.30 बजे फोन आया कि कर्मचारी नगर की अवध धाम कालोनी में तेंदुआ घुस गया है। इस पर रेंज आफीसर के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम फारेस्ट गार्ड और पुलिस लेकर जांच के लिए अवधधाम कालोनी पहुंची। वहां टीम को सीपी शुक्ला और नीशू ही मिले। किसी जानवर ने इनके पैर नोचे थे। चिकित्सीय परीक्षण के आधार पर वन विभाग की टीम ये पता करने में लगी है कि हमला करने वाला जानवर कौन था। पार्षद पति दीपक सक्सेना और मुख्त्यार खां का कहना है कि उनके इलाके में कुत्तों की संख्या ज्यादा है लेकिन भेड़िया या सियार नाम की कोई चीज नहीं है। डीएफओ धर्म सिंह का कहना है कि भेड़िया तो पूरे जनपद में कहीं नहीं हैं। सियार डरपोक होता है। उसके इस तरह हमला करने की संभावना कम है।
भेड़िये की पहचान
कुत्ता वंश का ये सबसे बड़ा जंतु है। ये बड़े घास के मैदानों में मांद खोदकर या झाड़ियों में रहता है। ये जानवर स्वभाव से कायर लेकिन चालाक होता है। केवल रात में ही निकलता है। निर्बल जंतु के सामने भयानक बन जाता है लेकिन ताकतवर जानवर के सामने दुम दबाकर भागता है। मनुष्यभक्षी होने पर रात में सोते हुए बच्चों को उठाकर ले जाता है।
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गीदड़ या सियार
शीत ऋतु में अंधेरा होते ही इस जानवर की गुर्राहट सुनाई देती है। प्रारंभ में एक गीदड़ हुआं-हुआं की आवाज निकालता है। बाद में उसके साथी गीदड़ भी वही दोहराते हैं। अंत में उनका चिल्लाना चीखने में बदल जाता है। गीदड़ की लंबाई दो से ढाई फुट, ऊंचाई सवा फुट होती है। इनकी पूंछ झबरी, लंबी थूथन, रंग भूरा होता है। ये जानवर सड़े गले मांस के अलावा छोटे मोटे जीवों का शिकार करता है। गन्ना, ईख, कंदमूल, भुट्टा भी खाता है। गीदड़ या सियार झुंडों में रहते हैं। दिन में झाड़ियों में छिपे रहते हैं और शाम होते ही भोजन की खोज में निकल पड़ते हैं। मौका पाते ही सियार कुत्ते, बकरी, भेड़ के बच्चे, मुर्गियों और आदमी के बच्चों को उठा ले जाता है। गीदड़ कायर, मक्कार और चालाक जानवर है। मादा गीदड़ एक बार में तीन से पांच बच्चे को जन्म देती है।
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वन विभाग के रेंज आफीसर ओपी सिंह के पास रात 10.30 बजे फोन आया कि कर्मचारी नगर की अवध धाम कालोनी में तेंदुआ घुस गया है। इस पर रेंज आफीसर के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम फारेस्ट गार्ड और पुलिस लेकर जांच के लिए अवधधाम कालोनी पहुंची। वहां टीम को सीपी शुक्ला और नीशू ही मिले। किसी जानवर ने इनके पैर नोचे थे। चिकित्सीय परीक्षण के आधार पर वन विभाग की टीम ये पता करने में लगी है कि हमला करने वाला जानवर कौन था। पार्षद पति दीपक सक्सेना और मुख्त्यार खां का कहना है कि उनके इलाके में कुत्तों की संख्या ज्यादा है लेकिन भेड़िया या सियार नाम की कोई चीज नहीं है। डीएफओ धर्म सिंह का कहना है कि भेड़िया तो पूरे जनपद में कहीं नहीं हैं। सियार डरपोक होता है। उसके इस तरह हमला करने की संभावना कम है।
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भेड़िये की पहचान
कुत्ता वंश का ये सबसे बड़ा जंतु है। ये बड़े घास के मैदानों में मांद खोदकर या झाड़ियों में रहता है। ये जानवर स्वभाव से कायर लेकिन चालाक होता है। केवल रात में ही निकलता है। निर्बल जंतु के सामने भयानक बन जाता है लेकिन ताकतवर जानवर के सामने दुम दबाकर भागता है। मनुष्यभक्षी होने पर रात में सोते हुए बच्चों को उठाकर ले जाता है।
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गीदड़ या सियार
शीत ऋतु में अंधेरा होते ही इस जानवर की गुर्राहट सुनाई देती है। प्रारंभ में एक गीदड़ हुआं-हुआं की आवाज निकालता है। बाद में उसके साथी गीदड़ भी वही दोहराते हैं। अंत में उनका चिल्लाना चीखने में बदल जाता है। गीदड़ की लंबाई दो से ढाई फुट, ऊंचाई सवा फुट होती है। इनकी पूंछ झबरी, लंबी थूथन, रंग भूरा होता है। ये जानवर सड़े गले मांस के अलावा छोटे मोटे जीवों का शिकार करता है। गन्ना, ईख, कंदमूल, भुट्टा भी खाता है। गीदड़ या सियार झुंडों में रहते हैं। दिन में झाड़ियों में छिपे रहते हैं और शाम होते ही भोजन की खोज में निकल पड़ते हैं। मौका पाते ही सियार कुत्ते, बकरी, भेड़ के बच्चे, मुर्गियों और आदमी के बच्चों को उठा ले जाता है। गीदड़ कायर, मक्कार और चालाक जानवर है। मादा गीदड़ एक बार में तीन से पांच बच्चे को जन्म देती है।