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Bareilly News: प्रयोगशाला में जीवों की जान बचाएगी ऑप्टिकल इमेजिंग मशीन
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बरेली। प्रयोगशालाओं में दवाओं व वैक्सीन का असर, रोगों के फैलाव, वायरस-बैक्टीरिया के प्रभाव का आकलन करने के लिए अब जीवों (चूहों) को मारने की जरूरत नहीं। आईवीआरआई (भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान) अब ऑप्टिकल इमेजिंग मशीन के जरिये इसका अध्ययन करेगा।
बुधवार को आईवीआरआई में स्पेक्ट्रल इंस्ट्रूमेंटस इमेजिंग अमेरिका के निदेशक डाॅ. एडी रीगन ने यह जानकारी दी दी। वह ''''द नेक्स्ट जेनरेशन इन विवो ऑप्टिकल इमेजिंग सिस्टम एंड इट्स अप्लीकेशन'''' विषय पर व्याख्यान दे रहे थे। बताया कि ऑप्टिकल इमेजिंग से कैंसर में दवा के प्रभाव का अध्ययन करने, जीन एक्सप्रेशन टारगेटिंग, बीमारी के फैलाव, वायरल-बैक्टीरियल संक्रमण और इनके इलाज में दवा के प्रभावों का अध्ययन भी इमेजिंग तकनीक से किया जा सकता है। मशीन मल्टिपल इमेज लेने में सक्षम है। इसमें एक साथ पांच प्रयोगात्मक जीवों को रख सकते हैं।
सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन फैसिलिटी (सीआईएफ) प्रभारी डाॅ. प्रवीण सिंह ने बताया कि पशु चिकित्सा में पहली बार यह मशीन प्रयोग की जाएगी। बीते दिनों आईवीआरआई में कास्ट (एनएएचईपी) परियोजना के तहत यह मशीन स्थापित हुई थी। शोध छात्रों को इसका लाभ मिलेगा।
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डॉ. प्रवीण के मुताबिक इमेजिंग सिस्टम प्री-क्लीनिकल अनुसंधान में अहम भूमिका निभाएगा। यह प्रयोगशाला के जीवों की छवियां बनाकर संबंधित शोधकार्य के लिए आंकड़े उपलब्ध कराएगा। जैसे- अगर किसी जीव को वायरस संक्रमण हुआ तो प्रतिदिन उसका कितना फैलाव हुआ और दवा कितना असर दिखा रही है, समय आधारित यह जानकारी मिलेगी। मशीन में छोटे जीव ही रखे जा सकते हैं।
आईवीआरआई के संयुक्त निदेशक शोध डाॅ. एसके सिंह, पैथोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. राजवीर सिंह पव्वैया, जैव प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. मदन मोहन, डाॅ. सोहनी डे, डाॅ. विकास चंद्र, डाॅ. मीमांशा शर्मा समेत संस्थान के विद्यार्थी मौजूद रहे।
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बुधवार को आईवीआरआई में स्पेक्ट्रल इंस्ट्रूमेंटस इमेजिंग अमेरिका के निदेशक डाॅ. एडी रीगन ने यह जानकारी दी दी। वह ''''द नेक्स्ट जेनरेशन इन विवो ऑप्टिकल इमेजिंग सिस्टम एंड इट्स अप्लीकेशन'''' विषय पर व्याख्यान दे रहे थे। बताया कि ऑप्टिकल इमेजिंग से कैंसर में दवा के प्रभाव का अध्ययन करने, जीन एक्सप्रेशन टारगेटिंग, बीमारी के फैलाव, वायरल-बैक्टीरियल संक्रमण और इनके इलाज में दवा के प्रभावों का अध्ययन भी इमेजिंग तकनीक से किया जा सकता है। मशीन मल्टिपल इमेज लेने में सक्षम है। इसमें एक साथ पांच प्रयोगात्मक जीवों को रख सकते हैं।
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सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन फैसिलिटी (सीआईएफ) प्रभारी डाॅ. प्रवीण सिंह ने बताया कि पशु चिकित्सा में पहली बार यह मशीन प्रयोग की जाएगी। बीते दिनों आईवीआरआई में कास्ट (एनएएचईपी) परियोजना के तहत यह मशीन स्थापित हुई थी। शोध छात्रों को इसका लाभ मिलेगा।
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डॉ. प्रवीण के मुताबिक इमेजिंग सिस्टम प्री-क्लीनिकल अनुसंधान में अहम भूमिका निभाएगा। यह प्रयोगशाला के जीवों की छवियां बनाकर संबंधित शोधकार्य के लिए आंकड़े उपलब्ध कराएगा। जैसे- अगर किसी जीव को वायरस संक्रमण हुआ तो प्रतिदिन उसका कितना फैलाव हुआ और दवा कितना असर दिखा रही है, समय आधारित यह जानकारी मिलेगी। मशीन में छोटे जीव ही रखे जा सकते हैं।
आईवीआरआई के संयुक्त निदेशक शोध डाॅ. एसके सिंह, पैथोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. राजवीर सिंह पव्वैया, जैव प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. मदन मोहन, डाॅ. सोहनी डे, डाॅ. विकास चंद्र, डाॅ. मीमांशा शर्मा समेत संस्थान के विद्यार्थी मौजूद रहे।