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दिवाली पर तंत्र पूजा के लिए नेपाल से मंगाई उल्लुओं की खेप, उल्लू के बदले खपा रहे खकूसट भी

Thu, 19 Oct 2017 01:10 AM IST
बरेली।
बरेली। Updated Thu, 19 Oct 2017 01:10 AM IST
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On the occasion of Diwali, the swelling of the owls floated by Nepal for the yatra
दीपावली

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दिवाली की रात में तंत्र पूजा करने के लिए नेपाल से उल्लुओं (स्ट्रींगिफॉर्मस) की खेप मंगाई गई है। नेपाली तस्करों के एजेंट एडवांस पैसा लेकर घरों से ही उल्लू बेच रहे हैं। शहर में चिड़िया बेचने वाले भी एडवांस रकम लेकर तांत्रिकों को उल्लू मंगा देते हैं। नंबर दो के इस धंधे की हकीकत जानने के लिए हमने पहचान छुपाकर कुछ लोगों से बात की। पड़ताल में चौंकाने वाली बात सामने आई कि उल्लू के बहाने तस्कर छोटा उल्लू यानी खकूसट (एथीन ब्रामा) देकर ग्राहकों को उल्लू बना रहे हैं। गिहार बस्ती की झुग्गियों की एक महिला सौदे की बात करने पर उल्लूू का मांस देने को राजी हो गई, लेकिन उसका कहना था कि जो लेना है, उसका एडवांस पैसा जमा करना पड़ेगा। माल अगले दिन मिलेगा। 
नेपाल से पक्षी, तोता, मैना और खूबसूरत चिड़ियां आदि लाकर बेचने वालों ने शहर में अपने एजेंट बना रखे हैं। एजेंट उनकी चिड़ियां तो बिकवा ही देते हैं, उल्लू की तस्करी में भी उनकी मदद करते हैं। मोहल्ला आजमनगर में चिड़ियां बेचने वालों में से ही कुछ लोग उल्लू तस्करों के एजेंट हैं। चिड़ियों के बारे में जानकारी करने के दौैरान हमने एक विक्रेता से पूछा, क्या उल्लू मिल जाएगा? पहले तो उसने इस तरह की बात करने से मना किया लेकिन फिर फूछने लगा कि क्यों चाहिए? दिवाली पर पूजा के लिए जररूत बताने पर वह तैयार हो गया। बोला, 22 हजार रुपये एडवांस दो तो अगले दिन दे दूंगा। 
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इसके बाद हमने चिड़िया बेचने वाले दूसरे आदमी से बात की तो वह 15 हजार रुपये में उल्लू देने को राजी हो गया। शर्त उसकी भी यही थी कि रकम एडवांस देनी होगी। हमने जिला पंचायत कार्यालय के सामने चिड़िया बेचने वाली महिला से भी उल्लू खरीदने के बारे में बात की। विश्वास में लेने के बाद महिला ने कहा कि उसके पास उल्लू, उसका मांस, पंजा और पंख सब कुछ मिल जाएगा। दो पंखों के 250 रुपये देने होंगे। मांस का टुकड़ा पांच हजार और पंजा दो हजार रुपये में मिलेगा। बोली, यह काम घर से होता है। एडवांस पैसा देने पर अगले दिन माल मिल पाएगा। तीनों चिड़ियां बेचने वालों ने बताया कि दिवाली पर पूजा के लिए नेपाल से उल्लुओं की खेप मंगाई गई है।
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दिवाली की मध्यरात्रि में स्वार्थ सिद्धि को होता है तंत्र-मंत्र
दिवाली की मध्य रात्रि के बाद तांत्रिक तंत्र-मंत्र करने के लिए पूजा करते हैं। आचार्य मुकेश मिश्र और तुलसी मठ के महंत कमल नयन दास के मुताबिक, तांत्रिक स्वार्थ सिद्धि के लिए उल्लू जैसे दुर्लभ पक्षी की चोंच, पंख, पंजे सहित हर अंग पर सिद्धि करते हैं। कुछ इसे मारकर तो कुछ इसे जागृत करके पूजा करते हैं। हालांकि यह सिर्फ पाखंड है। वाममार्गी लोग ही ज्यादा तंत्र-मंत्र करतेे हैं। सात्विक तंत्र का विधान भी है। इसमें भगवान की पूजा और जप किया जाता है। यही करना भी चाहिए।


ये आसुरी प्रवृत्तियां हैं
उल्लू आदि की बलि देना, आसुरी प्रवृत्तियां हैं। ऐसे लोग समाज को गुमराह करते हैं। समाज को पतन की ओर ले जाते हैं। यह काम बिल्कुल भी प्रशंसनीय नहीं हैं। ऐसी बातों से बचना चाहिए।
- डॉ. कमला पांडे, प्रोफेसर, बीएचयू 
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