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Bareilly News: एससी-एसटी आयोग की बैठक से लापता रहे अफसर... जो थे, वह नहीं दे पाए जवाब

Sun, 27 Jul 2025 02:36 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 27 Jul 2025 02:36 AM IST
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Officers were missing from the meeting of SC-ST Commission... those who were there could not answer
बरेली। उप्र राज्य अनुसूचित जाति एवं जनजाति (एससी-एसटी) आयोग की पांच सदस्यीय समिति की मंडलीय बैठक शनिवार को सर्किट हाउस में हुई। इसमें कई अधिकारी गैरहाजिर रहे। जो मौजूद थे, वह सदस्यों के सवालों का जवाब नहीं दे पाए।
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आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत ने एससी-एसटी वर्ग के लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ देने के लिए पीओ डूडा को पुकारा तो पता चला वह बैठक में नहीं हैं। पट्टा आवंटन के बारे में पूछा तो जिला प्रशासन का कोई अधिकारी मौजूद नहीं था। उन्होंने थानों में निरीक्षक, दरोगा की तैनाती में आरक्षण के संबंध में पूछा तो एक पुलिस अधिकारी ने ऐसी कोई जानकारी न होने की बात कही।
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मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत बरेली में अनुसूचित जाति के 91 अभ्यर्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत मंडल में अनुसूचित जाति के 2,740 जोड़ों को लाभान्वित किया गया है। विवाह अनुदान योजना के तहत अनुसूचित जाति के 91 लोगों को अनुदान दिया गया है।
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मंडल में एससी-एसटी वर्ग के 1468 व्यक्ति उत्पीड़न से प्रभावित हैं। इनमें 1,008 लोगों को 10.48 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद दी गई है, जबकि 483 लोगों को मदद का इंतजार है। इनमें सबसे अधिक 307 लोग बरेली के, 155 लोग शाहजहांपुर के और 21 लोग पीलीभीत के हैं।
आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि कांवड़ यात्रा के कारण कई अधिकारी बैठक में नहीं आ पाए। उनको विभागीय आंकड़े आयोग को भेजने के निर्देश दिए हैं। एक सवाल के जवाब पर उन्होंने कहा- विद्यालयों को आरक्षण से मत जोड़िए। इसमें हर जाति के बच्चे पढ़ते हैं। परिषदीय विद्यालयों में सभी सुविधाएं हैं, शिक्षक भी योग्य हैं। कुछ जगह छात्र कम और शिक्षक अधिक हैं। इसे दुरुस्त किया जा रहा है।
अध्यक्ष बोले- कांवड़ यात्रा का नहीं रहा ध्यान
अफसरों की गैरहाजिरी के सवाल पर एससी-एसटी आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत ने यह कहकर पल्ला झाड़ा कि कांवड़ यात्रा का ध्यान ही नहीं रहा, बैठक लगा दी। अधिकारियों के लिए समीक्षा बैठक में आने से महत्वपूर्ण कांवड़ यात्रा की व्यवस्था देखना है। यह भी कहा कि बरेली मंडल में बैठक की सूचना अधिकारियों को शुक्रवार दोपहर भेजी थी, जबकि कम से कम दो-तीन दिन पहले सूचना दी जाती है। यही कारण रहा कि समीक्षा बैठक में कई अधिकारी नहीं आए। अब आगे ध्यान रखेंगे। कांवड़ यात्रा तक उन मंडलों में बैठक करेंगे, जहां इसका प्रभाव कम है या नहीं है। बैठक में लखनऊ से रमेश तूफानी, नीरज गौतम भी आई थीं। सदस्य के रूप में उमेश कठेरिया व संजय सिंह भी मंच पर थे, पर अफसरों की अनुपस्थिति की वजह से टीम कई महत्वपूर्ण सूचनाओं से वंचित रही। आधी-अधूरी बैठक कर टीम लौट गई।

फफक पड़ीं पूर्व जिपं सदस्य
पूर्व जिला पंचायत सदस्य नीरू सागर ने आयोग के अध्यक्ष के सामने नवाबगंज थाना क्षेत्र के गंगापुर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा तोड़े जाने में पुलिस की मिलीभगत का आरोप लगाया। इस दौरान वह फफकने लगीं। अध्यक्ष ने मामले को उच्च स्तर पर उठाने का भरोसा दिया है। नीरू ने बताया कि 26 जून की रात 2:30 बजे विपक्षियों ने आंबेडकर की प्रतिमा तोड़ दी। इसमें 19 लोग नामजद हुए थे, पर छह ही जेल गए। बाकी अब तक गिरफ्तार नहीं हुए हैं। जेल से जमानत पर आए लोग धमकी दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर धमकी भरे पोस्ट कर रहे हैं। मुकदमे में फंसाने की धमकी दे रहे हैं, लेकिन पुलिस कुछ नहीं कर रही है। गंगापुर के ताराचंद्र, हरि सागर, हरिशंकर, जमुना प्रसाद ने बताया कि विपक्षी समझौते का दबाव बना रहे हैं। उनके गांव में कभी भी कोई अप्रिय घटना हो सकती है। संवाद
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