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कंट्रोल रूम में सैंपल रखकर भूले अफसर, स्टाफ में दहशत

Fri, 03 Jul 2020 01:59 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jul 2020 01:59 AM IST
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Officers forgot by placing samples in control room, panic in staff
खुले में रखे सैंपल। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

दो दिन पहले निजी अस्पताल से नौ लोगों के लिए गए थे सैंपल

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बरेली। सैंपल की समय से जांच न होने पर दूसरे विभागों को जिम्मेदार बता रहे स्वास्थ्य विभाग की बुधवार को बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। करीब दो दिन पहले जांच के लिए एक निजी अस्पताल से सैंपल लिए गए थे। सैंपल का बॉक्स जांच कराने के लिए लैब भेजने के बजाय कंट्रोल रूम में रखवाकर अफसर भूल गए। इसकी वजह से ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों में दहशत है।
पिछले दिनों कोरोना संक्रमित एक व्यक्ति ने शहर के दो निजी अस्पतालों में इलाज कराया था। एक अस्पताल ने ही इलाज के दौरान उसका सैंपल लेकर जांच के लिए आईवीआरआई भेजा था। रिपोर्ट पॉजिटिव मिलने के दो दिन बाद उसकी मौत हो गई थी। तब निजी अस्पताल के स्टाफ के सैंपल लेकर जांच कराने के निर्देश दिए गए। सर्विलांस टीम ने 30 जून को अस्पताल के नौ लोगों के सैंपल लिए, मगर सैंपल जांच कराने के लिए भेजने के बजाय कंट्रोल रूम के केबिन में रख दिए। कंट्रोल रूम में तीन कर्मचारियों की ड्यूटी रहती है। उन्होंने सैंपल वहां रखने पर आपत्ति भी की थी, लेकिन उन्हें चुप करा दिया गया। ये सैंपल अब तक जांच को नहीं भेजे गए हैं। इससे स्टाफ में दहशत है और वह ड्यूटी करने से कतरा रहा है।
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अनदेखी: 24 घंटे बीते.. गंभीर मरीजों की ट्रू-नॉट से नहीं हुई जांच

बरेली। जिला अस्पताल के गंभीर मरीजों की जांच के लिए मुहैया कराई गई ट्ू-नॉट मशीन का उपयोग नहीं हो पा रहा है। अस्पताल में 24 घंटे से ज्यादा समय तक भर्ती रहने के बाद भी मरीजों की जांच नहीं हो पा रही है। दूसरी ओर, इलाज न होने से उनकी जान भी सांसत में है। परिजन ने मशीन से रसूखदारों की जांच पहले और मरीजों को वेटिंग लिस्ट में रखने का आरोप लगाया है।
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फरीदपुर के बिलवा निवासी 50 वर्षीय लाल बहादुर एक जुलाई को इलाज कराने अस्पताल पहुंचे थे। उनकी तबीयत बेहद खराब है, एहतियातन ट्रू-नॉट से जांच के निर्देश दिए गए। वहीं, जहानाबाद (पीलीभीत) से रेफर होकर आए 69 वर्षीय बुजुर्ग भी जिला अस्पताल में भर्ती हैं। उनकी भी हालत गंभीर है। कोरोना के लक्षण भी हैं। इनकी भी एक जुलाई को ट्रू-नॉट से जांच कराने को कहा गय, लेकिन स्टाफ ने उन्हें वार्ड में भर्ती कर जांच कराना ही भूल गया। दोनों के परिजन का आरोप है कि अगर उनका समय से इलाज नहीं किया गया तो उनकी जान को खतरा हो सकता है। इस मामले में जानकारी के लिए सीएमएस को कॉल की गई लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। ब्यूरो
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