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UP: घर बेचकर बेटे को लंदन में पढ़ाया... उसने बुढ़ापे में अकेला छोड़ा, वृद्धाश्रम में जीवन काट रहे पिता

Thu, 19 Jun 2025 06:02 PM IST
मुकेश कुमार अर्पिता राजपूत, संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
अर्पिता राजपूत, संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Thu, 19 Jun 2025 06:02 PM IST
सार

Bareilly News: बरेली में एक बुजुर्ग पिता की दिल झकझोर देने वाला कहानी सामने आई है। उन्होंने बेटे पर जीवनभर की कमाई लगा दी। उसे लंदन में पढ़ाया, लेकिन वह वहीं का होकर रह गया। उसने बुढ़ापे में पिता को अकेला छोड़ दिया। इससे लाचार पिता अब वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर हैं। 

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NRI son left his father alone he living in old age home in bareilly
वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर हुए बुजुर्ग - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

बुढ़ापे की लाठी बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसके छिनने से मनुष्य को गहरा आघात पहुंचता है। इससे भी गहरा आघात तब होता है, जब यह लाठी खुद ही मुंह मोड़ ले। बरेली के राजेंद्रनगर निवासी 75 साल के एक बुजुर्ग बीते दस साल से इस दर्द को सह रहे हैं। उनका बुढ़ापा लाल फाटक स्थित एक वृद्धाश्रम में कट रहा है। इसका कारण कि बेटे को ऑक्सफोर्ड में पढ़ाने के लिए उन्होंने अपनी जीवनभर की कमाई दांव पर लगा दी। घर भी बेच दिया। बेटा एक बार लंदन गया तो फिर पलटकर नहीं देखा। वहीं अपनी दुनिया बसा ली। बूढ़े पिता अब 10 साल से वृद्धाश्रम में बेटे का इंतजार कर रहे हैं।

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वृद्धाश्रम में जीवन बिता रहे बुजुर्ग ने बताया कि शुरुआती दौर में वह सॉफ्टवेयर इंजीनियर रहे। दिल्ली की एक बड़ी आईटी कंपनी में सेवाएं दीं। कॅरिअर के शिखर पर रहते हुए इकलौते बेटे को भी अच्छी शिक्षा दिलाई। बेटे ने लंदन स्थित आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से मास्टर्स करने की इच्छा जाहिर की तो उन्होंने अपना घर बेच दिया। बेटे ने वहां पढ़ाई पूरी कर नौकरी शुरू कर दी। वहीं शादी भी कर ली। उसके बच्चे भी हैं। शुरुआत में कभी-कभार उसकी फोन कॉल आती रही। अब यह सिलसिला भी बंद हो गया है। 

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उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 में पत्नी भी उनका साथ छोड़ गईं। अब वह बिल्कुल अकेले हैं। वृद्धाश्रम की सीढ़ियों पर बैठकर वह बेटे का इंतजार करते हैं। रुंधे गले से बुजुर्ग ने बताया कि अंतिम बार जब बेटे से बात हुई थी तो उसने कहा था कि आप वहां नहीं रह पाएंगे। यह कहकर उनको वृद्धाश्रम भिजवा दिया। उस समय वृद्धाश्रम का नंबर भी ले गया था, लेकिन कभी उसकी कॉल नहीं आई। मन में हमेशा एक टीस रहती है कि कभी कोई तो हालचाल पूछने आ जाए। 
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निहारते रहते हैं बेटे की तस्वीर
वृद्धाश्रम के संचालक गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने बताया कि बुजुर्ग दिन-रात बेटे की तस्वीर और पुराने खतों को निहारते रहते हैं। उनकी आंखों में हमेशा बेटे का इंतजार रहता है। वह न तो ज्यादा बात करते हैं, न ही कुछ बताना चाहते हैं। वृद्धाश्रम की चहारदीवारी में ऐसी कई कहानियां मौजूद हैं, जो समाज को यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि आधुनिकता की दौड़ में संवेदनाएं और रिश्तों की गर्माहट कहीं खो गई है।
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