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आपके खतरों में अब बारूद भी

Fri, 06 Oct 2017 02:27 AM IST
बरेली।
बरेली। Updated Fri, 06 Oct 2017 02:27 AM IST
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Now your ammunition in your dangers
पटाख्‍ाा

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अब तक शहरवासी आईवीआरआई फ्लाईओवर के लिए गहरे खोदे गए गड्ढों, शहामतगंज फ्लाईओवर की ऊबड़-खाबड़ साइड रोड, यूनिवर्सिटी: स्टेडियम-राजेंद्रनगर रोड पर बीचोंबीच आ रहे बिजली के खंभों, लटकते बिजली के तारों, सड़क पर हर कुछ कदम पर गहरे गड्ढों जैसे तमाम खतरों से जूझ ही रहे थे। अब एक और बड़ा खतरा शहर में आबादी के बीच जमा हुए 15 टन बारूद यानी पटाखों से पैदा हो गया है। सरकारी तंत्र हमेशा की तरह ढर्रे पर तैयारी कर रहा है। मगर गुड़गांव और फरीदाबाद जैसे चर्चित पटाखा कांड होने में क्षण भर ही लगते हैं। इसलिए गुजारिश है कि पटाखा समेत तमाम खतरों से हर बार की तरह खुद के बचाव की तैयारी कर लें। 
गुड़गांव के चर्चित हादसेे की तर्ज पर इस बार अपना शहर भी इस समय बारूद के ढेर पर बैठा है। दिवाली का जश्न मनाने के लिए 100 फुटा और मिनी बाईपास रोड पर 15 हजार किलो यानी 15 टन से ज्यादा बारूद उतर चुका है। इस इलाके की आबादी तकरीबन साढ़े चार लाख है। पटाखों की दुकानों के ठीक पीछे वीर सावरकर नगर कॉलोनी बसी है। इसके बराबर में और भी नई कॉलोनियां हैं। आतिशबाजी की दुकानों के सामने वन्नूवाल नगर में लाखों लोग रहते हैं। यही हाल मिनी बाईपास रोड का है। वहां भी पटाखों की दुकानों के पीछे और आगे दोनों तरफ आबादी और अस्पताल हैं। एक तरफ मेगासिटी है तो दूसरी तरफ कर्मचारी नगर, सैदपुर हॉकिंस आदि इलाके हैं। ऐसे में एक चिंगारी ही इन इलाकों में भीषण तबाही मचा सकती है।        
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ये भी हैं खतरे
त्योहारों के दिनों में सड़क के बीचोंबीच लगे खंभे भी अंधेरे में किसी की जान ले सकते हैं। सड़क चौड़ीकरण के दौरान बिजली और टोलीफोन की लाइनेें तो शिफ्ट कर दी गईं लेकिन खंभे नहीं हटाए गए। जंक लगने से काले हो चुके इन खंभों पर रिफ्लेक्टर तक नहीं लगाए गए हैं। शाहदाना से कुर्मांचल नगर तक टेलीफोन और बिजली के करीब 85 खंभे सड़क घेरे हैं। खुशलोक अस्पताल के सामने गुरुद्वारा के पास खंभा तो सड़क पर ही लगा है। यहां अवैध तरीके से सड़क पर निर्माण भी करा लिया गया है। इससे भी हादसे की आशंका बनी रहती है। दिवाली पर बिजली की खपत बेतहाशा बढ़ जाती है। ऐसे में जर्जर लाइनें भी हादसे का सबब बन सकती हैं। शहामतगंज और आईवीआरआई ओवरब्रिज बनने की वजह से शहर की गलियों में ऑटो और ई-रिक्शा की आमद भी जानलेवा बनी हुई है। जरा की चूक में इनके अनाड़ी ड्राइवर राहगीरों के हाथ-पैर तोड़कर निकल जाते हैं।
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इन खतरों पर भी देना होगा ध्यान

खतरा-एक: सड़क पर जेनरेटर
शहर की सड़कों पर अवैध तरीके से लोगोें ने जनरेटर लगा रखे हैं। शाहदाना रोड का ही मुआयना कर लीजिए, हकीकत आपकेे सामने आ जाएगी। जबकि यह पूरी तरह के गैरकानूनी है। किसी जनरेटर वाले के खिलाफ प्रशासन और नगर निगम ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है।

खतरा-दो: ट्रांसफार्मर भी सड़कों पर
शाहदाना से डेलापीर और डेलापीर से कुतुबखाना समेत शहर के ज्यादातर रोडों पर बिजली विभाग ने ट्रांसफार्मर लगा रखे हैं। कुछ ट्रांसफार्मरों के आसपास तो सेफ्टी गार्ड भी नहीं लगे हैं। इससे किसी की भी करंट लगने से जान जा सकती है, लेकिन किसी को इसकी परवाह नहीं है।
 
खतरा-तीन: लटकते तार भी जानलेवा
शहर के अयूब खां चौराहे के पास मोहर्रम पर ताजियों के ढीले होकर नीचे लटक रहे बिजली के तारों से टकराने पर उनमें करंट उतर आया था। इससे कई लोगों की जान जाते-जाते बची। यही हाल शहर के और भी कई इलाकों का है, लेकिन जर्जर और लटके हुए तारों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

दिवाली पर 25 करोड़ के आतिशबाजी कारोबार की उम्मीद
शहर में सौ फुटा रोड और मिनी बाईपास पटाखों की मंडी है। यहां पटाखों के 20 थोक कारोबारी हैं। उत्तराखंड के कुछ शहरों के लिए भी बरेली से ही आतिशबाजी की सप्लाई होती है। दिवाली पर 25 करोड़ के कारोबार की उम्मीद है। प्रशासन थोक दुकानदारों को एक साल के लिए 600 किलो बारूद का लाइसेंस देता है।
 
यह हैं थोक विक्रेता
सौफुटा और मिनी बाईपास पर अंबा पटाखा, भसीन ट्रेडर्स, मिलन ट्रेडर्स, सूद ट्रेडर्स, सरदार ट्रडर्स, शाह ट्रडर्स, विजय ट्रेडर्स, बंटी भाई पटाखे वाले, शम्मी भाई पटाखे वाले, शर्मा जी पटाखे वाले आदि थोक कारोबारी हैं। 

250 लोगों के आवेदन आए
दिवाली पर तीन दिन पटाखा बेचने के लिए करीब 250 लोगों ने लाइसेंस के लिए जिला प्रशासन को आवेदन दिया है। सिटी मजिस्ट्रेट के यहां भी 70 आवेदन आ चुके हैं। बाकी एसीएम के यहां लाइसेंस के लिए आवेदन किए गए हैं। सिटी मजिस्ट्रेट यूपी सिंह का कहना है कि आवेदनों की जांच के बाद ही लाइसेंस जारी होंगे।

फोटो-
पटाखा बनाने में ज्यादा रिस्क होता है। बेचने में ज्यादा रिस्क नहीं है। इसके बाद भी हमने अग्निशमन अधिकारियों के निर्देश के मुताबिक अग्निशमन यंत्रों का इंतजाम कर रखा है। अचानक आग लगने पर बुझाने के लिए पानी और रेत की भी व्यवस्था है।

- अमरीश कुमार अग्रवाल, अंबा पटाखा


पटाखों की बिक्री दिवाली के करीब आने पर बढ़ने की उम्मीद है। हमने पटाखों को रखनेे और सावधानी से बेचने के सारे इंतजाम कर रखे हैं। लिहाजा खतरे की गुंजाइश नहीं है। इसके अलावा हमने आग बुझाने के भी पर्याप्त इंतजाम कर रखे हैं।
- सुरजीत सिंह, शाह जी ट्रेडर्स 
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