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Bareilly News: अब स्वचालित मशीनों से जांची जाएगी वाहनों की फिटनेस
Fri, 06 Dec 2024 02:00 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Fri, 06 Dec 2024 02:00 AM IST
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बरेली। जिले में मार्च 2025 से ऑटोमेटेड व्हीकल टेस्टिंग स्टेशन (एवीटीएस) काम शुरू कर देगा। इसके बाद स्वचालित मशीनों से आठ तरह की जांच के बाद ही वाहनों को फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे। रोज 200 वाहनों की जांच हो सकेगी। इससे कामकाज में पारदर्शिता आएगी और अनफिट वाहन चलन से बाहर होंगे। 15-20 साल पुराने वाहनों के पंजीकरण का नवीनीकरण मुश्किल हो जाएगा। इससे हादसों की संख्या में भी कमी आएगी। विभागीय अधिकारियों पर काम का दबाव भी कम होगा।
अभी वाहनों की फिटनेस की जांच आरटीओ के स्तर से मैनुअल की जाती है। तमाम कमियां जांच के दौरान पकड़ में नहीं आतीं। इसमें खेल भी होता है। खटारा वाहनों को भी फिटनेस प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाता है। कंप्यूटराइज्ड सिस्टम से वाहनों की फिटनेस जांच से किसी तरह का खेल नहीं हो सकेगा। इस जांच में एक बार फेल होने पर फिटनेस प्रमाणपत्र के लिए दोबारा आवेदन करने पर वाहन स्वामी को दोगुनी फीस देनी होगी। टेस्ट में फेल होने पर प्रमाणपत्र नहीं मिल सकेगा। शासन की ओर से निजी कंपनी को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। लखनऊ और कानपुर में ये सेंटर पहले ही शुरू हो चुके हैं।
जिले में 1.90 लाख से ज्यादा पुराने वाहन
शासन की नई नीति के मुताबिक, 20 साल से ज्यादा पुराने निजी और 15 साल से ज्यादा पुराने व्यावसायिक वाहनों को स्क्रैप श्रेणी में शामिल किया गया है। ऐसे वाहनों के पंजीकरण का नवीनीकरण उनकी फिटनेस के आधार पर बढ़ाए जाने का प्रावधान है। जिले में 1.90 लाख ऐसे वाहन हैं जो 15 और 20 साल की उम्र पूरी कर चुके हैं। इनको न तो स्क्रैप कराया गया है, न ही इनके पंजीकरण का नवीनीकरण कराया गया है।
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वर्जन
वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने का काम निजी कंपनी को दिया गया है। एवीटीएस मार्च 2025 से काम शुरू कर देगा। इसमें अत्याधुनिक मशीनों से वाहनों की फिटनेस जांची जाएगी। - मनोज कुमार सिंह, एआरटीओ प्रशासन
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अभी वाहनों की फिटनेस की जांच आरटीओ के स्तर से मैनुअल की जाती है। तमाम कमियां जांच के दौरान पकड़ में नहीं आतीं। इसमें खेल भी होता है। खटारा वाहनों को भी फिटनेस प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाता है। कंप्यूटराइज्ड सिस्टम से वाहनों की फिटनेस जांच से किसी तरह का खेल नहीं हो सकेगा। इस जांच में एक बार फेल होने पर फिटनेस प्रमाणपत्र के लिए दोबारा आवेदन करने पर वाहन स्वामी को दोगुनी फीस देनी होगी। टेस्ट में फेल होने पर प्रमाणपत्र नहीं मिल सकेगा। शासन की ओर से निजी कंपनी को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। लखनऊ और कानपुर में ये सेंटर पहले ही शुरू हो चुके हैं।
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जिले में 1.90 लाख से ज्यादा पुराने वाहन
शासन की नई नीति के मुताबिक, 20 साल से ज्यादा पुराने निजी और 15 साल से ज्यादा पुराने व्यावसायिक वाहनों को स्क्रैप श्रेणी में शामिल किया गया है। ऐसे वाहनों के पंजीकरण का नवीनीकरण उनकी फिटनेस के आधार पर बढ़ाए जाने का प्रावधान है। जिले में 1.90 लाख ऐसे वाहन हैं जो 15 और 20 साल की उम्र पूरी कर चुके हैं। इनको न तो स्क्रैप कराया गया है, न ही इनके पंजीकरण का नवीनीकरण कराया गया है।
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वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने का काम निजी कंपनी को दिया गया है। एवीटीएस मार्च 2025 से काम शुरू कर देगा। इसमें अत्याधुनिक मशीनों से वाहनों की फिटनेस जांची जाएगी। - मनोज कुमार सिंह, एआरटीओ प्रशासन