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अब इस तकनीक से कोहरे से लड़ेगा रेलवे, सिग्नल देखने में नहीं होगी समस्या
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
Updated Mon, 12 Nov 2018 07:56 PM IST
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कोहरे के सीजन में ट्रेनों के लोको पायलट को सिग्नल देखने में समस्या नहीं होगी। इसके लिए रेल इंजनों को ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम से लैस करने का काम चालू हो गया है। मुरादाबाद रेल मंडल से रोजा जंक्शन को 74 जीपीएस उपकरण मिल गए हैं। इनको रेल इंजनों में फिट करने का काम भी चालू हो गया है। हालांकि, कोहरे में लोको पायलट को सिग्नल देने के लिए पुरानी पटाखा तकनीक का भी सहारा लिया जाता रहेगा।
रोजा जंक्शन से चार पैसेंजर और एक दर्जन से ज्यादा एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन होता है। इसके अतिरिक्त करीब दो दर्जन मालगाड़ियां भी हैं। कोहरे के सीजन में दृश्यता कम होने की वजह से ट्रेनों की रफ्तार प्रभावित होती है। अब तक ट्रैक पर पटाखा लगाकर लोको पायलट को सिग्नल दिया जाता है। रेलवे स्टेशनों पर इसके लिए फॉग स्पॉट बनाए जाते हैं। कई बार पटाखा मिस होने से सिग्नल नहीं मिल पाता। ऐसे में यात्रियों को भी परेशानी होती है।
इसके चलते कोहरे के सीजन में रेल इंजनों को जीपीएस से लैस किया जा रहा है। आधुनिक जीपीएस लोको पायलट को सिग्नल की जानकारी देने के साथ रेल क्रॉसिंग, मानव रहित क्रॉसिंग, कॉशन के बारे में भी अलर्ट करेगा। रोजा जंक्शन से चलने वाली रेलगाड़ियों के इंजनों में जीपीएस लगाने का काम शुरू हो गया है।
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रोजा जंक्शन से चार पैसेंजर और एक दर्जन से ज्यादा एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन होता है। इसके अतिरिक्त करीब दो दर्जन मालगाड़ियां भी हैं। कोहरे के सीजन में दृश्यता कम होने की वजह से ट्रेनों की रफ्तार प्रभावित होती है। अब तक ट्रैक पर पटाखा लगाकर लोको पायलट को सिग्नल दिया जाता है। रेलवे स्टेशनों पर इसके लिए फॉग स्पॉट बनाए जाते हैं। कई बार पटाखा मिस होने से सिग्नल नहीं मिल पाता। ऐसे में यात्रियों को भी परेशानी होती है।
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इसके चलते कोहरे के सीजन में रेल इंजनों को जीपीएस से लैस किया जा रहा है। आधुनिक जीपीएस लोको पायलट को सिग्नल की जानकारी देने के साथ रेल क्रॉसिंग, मानव रहित क्रॉसिंग, कॉशन के बारे में भी अलर्ट करेगा। रोजा जंक्शन से चलने वाली रेलगाड़ियों के इंजनों में जीपीएस लगाने का काम शुरू हो गया है।
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वर्जन फोर इंजन से जल्द दौड़ेंगी सवारी गाड़ियां
सवारी गाड़ियां भी अब आधुनिक अमेरिकी तकनीक से निर्मित वर्जन फोर रेल इंजनों से दौड़ेंगी। करीब एक महीने तक मालगाड़ियों में इन रेल इंजन का ट्रायल पूरी तरह से कामयाब रहा है। नए इंजन लगने के बाद सवारी गाड़ियां में इंजन फेल होने समेत कई समस्याएं खत्म हो जाएंगी।
रोजा स्थित लोकोमोटिव शेड को पहले ही वर्जन फोर के 40 रेल इंजन मिल चुके हैं। पिछले महीने लोकोमोटिव शेड से धीरे-धीरे कर एक दर्जन से ज्याद वर्जन फोर रेल इंजन डिपार्चर किए जा चुके हैं। यह रेल इंजन मालगाड़ियों को दौड़ा रहे हैं। अब वर्जन फोर रेल इंजनों से सवारी गाड़ियां दौड़ाई जाएंगे। रोजा से चलने वाली ज्यादातर ट्रेनों में यह इंजन लगाए जाएंगे। पहले चरण में पैसेंजर और कम दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों में वर्जन फोर के इंजन लगाए जाएंगे।
रोजा स्थित लोकोमोटिव शेड को पहले ही वर्जन फोर के 40 रेल इंजन मिल चुके हैं। पिछले महीने लोकोमोटिव शेड से धीरे-धीरे कर एक दर्जन से ज्याद वर्जन फोर रेल इंजन डिपार्चर किए जा चुके हैं। यह रेल इंजन मालगाड़ियों को दौड़ा रहे हैं। अब वर्जन फोर रेल इंजनों से सवारी गाड़ियां दौड़ाई जाएंगे। रोजा से चलने वाली ज्यादातर ट्रेनों में यह इंजन लगाए जाएंगे। पहले चरण में पैसेंजर और कम दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों में वर्जन फोर के इंजन लगाए जाएंगे।