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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Not found a doctor , not an ambulance , Jana child in Tempo

न डॉक्टर मिले, न एंबुलेंस, टेंपो में जना बच्चा

Wed, 10 Aug 2016 01:18 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली Updated Wed, 10 Aug 2016 01:18 AM IST
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सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की संवेदनहीनता फिर सामने आई है। क्यारा सीएचसी में आई एक गर्भवती डॉक्टर और एंबुलेंस न मिलने के कारण छह घंटे तक तड़पती रही। जिला अस्पताल रेफर करने के बाद उसे ले जाने वाला कोई नहीं मिला। जिला अस्पताल रेफर करने पर 108 एंबुलेंस ने उसे ले जाने से मना कर दिया। 102 एंबुलेंस खराब थी। नई एंबुलेंस आने में छह घंटे लग गए। तब तक महिला अस्पताल में तड़पती रही। रात दो बजे महिला के पति ने प्रधान से उधार रुपये लेकर टेंपो किराए पर किया और जिला अस्पताल आने लगे तो रास्ते में  डिलीवरी हो गई। ब्लाक क्यारा निवासी रजनी अपने पति यशपाल के साथ सोमवार शाम छह बजे क्यारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची। अस्पताल में डॉक्टर समेत अन्य स्टाफ नदारद था। आशा ने किसी तरह उसे अस्पताल के बाहर बेड पर लिटा दिया। मरीज के तीमारदारों ने 108 नंबर एंबुलेंस पर कॉल की। उस एंबुलेंस ने डिलीवरी केस होने की वजह से जिला अस्पताल ले जाने से मना कर दिया। नियमानुसार 108 एंबुलेंस सामान्य और 102 एंबुलेंस डिलीवरी मरीजोें को ले जाती है। 102 नंबर पर फोन करने पर बताया गया कि सीएचसी केंद्र के बाहर एंबुलेंस खराब है। नई एंबुलेंस भेजी जा रही है। उस एंबुलेंस पहुंचने में पांच घंटे लग गए। तब तक महिला दर्द से तड़पती रही। अस्पताल में इलाज की सुविधा भी नहीं दी गई। नर्सों ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। रात के दो बजे महिला के पति यशपाल ने प्रधान सर्वेश्वर पाल सिंह को फोन किया। उनसे एक हजार रुपये उधार लेकर किराए का टेंपो किया और जिला अस्पताल ले जाने लगे। रास्ते में महिला की टेंपो में ही डिलीवरी हो गई। उसे बेटी पैदा हुई। प्रधान का कहना है कि ईश्वर का शुक्र रहा कि डिलीवरी नार्मल हो गई अन्यथा जज्जा बच्चा को अगर कोई खतरा हो जाता तो कौन जिम्मेदार होता। तमाम सुविधाएं होने के बाद भी डॉक्टर और नर्सें अस्पताल के स्टाफ रूम में नहीं रहते। मरीजों को बिना वजह जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। 
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सीएचसी पर किसी महिला डॉक्टर की तैनाती नहीं है इसलिए डिलीवरी के मामले रेफर करते हैं। अगर डिलीवरी के दौरान ब्लीडिंग हो गई तो मरीज की जान को खतरा रहता है। 102 एंबुलेंस लखनऊ के आदेश पर चलती है। वह खराब थी इसलिए इतना टाइम लगा। मुझे भी अफसोस है कि मरीज को तकलीफ सहनी पड़ी। मैं महिला डॉक्टर की तैनाती और अस्पताल की अव्यवस्थाओं के लिए शासन को लिखूंगा।
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-डॉ. सचिन यादव, प्रभारी सीएचसी केंद्र क्यारा 
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