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तो बरेली में सात साल से कोई अवैध धार्मिक स्थल नहीं बना!
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Sat, 23 Apr 2016 12:55 AM IST
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क्या बरेली में पिछले सात से कोई भी अवैध धार्मिक स्थल नहीं बना? प्रशासन और पुलिस की मानें तो यही सच है। सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी के बाद शासन ने अवैध धार्मिक स्थलों की सूची मांगी तो बरेली के अधिकारियों ने ये लिखकर भेज दिया कि बरेली में 29 सितंबर 2009 के बाद से कोई भी धार्मिक स्थल अवैध तरीके से नहीं बना। ये हालात तब हैं जबकि हर महीने महीने सड़क के किनारे, कालोनियों की गली और मुहल्लों में नाले नालियों पर मंदिर, मस्जिद और मजार बनकर खड़े हो रहे हैं। कुछ को लेकर विवाद भी हुए। पुलिस ने हस्तक्षेप भी किए और रिपोर्ट भी दर्ज हुईं हैं। फिर भी अपनी जवाबदेही से बचने के लिए अफसरों ने सफेद झूठ बोलकर शासन और सुप्रीम कोर्ट को भी गुमराह किया है।
अमर उजाला ने सड़क किनारे अनाधिकृत तरीके से बनने वाले धार्मिक स्थल के मामलों से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से प्रकाशित किया है। अनाधिकृत तरीके से नाले नालियों और सरकारी जमीन पर बन रहे धार्मिक स्थलों के निर्माण को रोकने के लिए पुलिस - प्रशासन की ओर से कोई प्रयास नहीं किए गए। राज्य सरकार की ओर से तीन बार नए अवैध निर्माण न होने देने के आदेश जारी हुए। प्रशासन ये कहकर खुद को बचाता रहा कि पुराने अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के बारे में स्पष्ट आदेश नहीं हैं। हर छह महीने के बाद मांगी जाने वाली जानकारी में रुटीन की रिपोर्ट भेजी जाती रहीं है। पुलिस एवं प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार 29 सितंबर 2009 तक बरेली में 929 धार्मिक स्थल अवैध चिह्नित हुए हैं। इनमें से 67 धार्मिक स्थलों को यथास्थिति बनाए रखने का औचित्य पाया गया है।
ये थी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने यूनियन आफ इंडिया बनाम गुजरात राज्य एवं अन्य मामलों में 29 सितंबर 2009, 16 फरवरी 2010 और 13 सितंबर 2011 को आदेश पारित किए थे। इन तीनों आदेशों में सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकारों को निर्देश दिए थे कि अवैध निर्माण ध्वस्त कराए जाएं।
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इन्हें तो कुछ नहीं दिख रहा
शहामतगंज से सेटेलाइट के बीच ईसाइयों की पुलिया पर मंदिर, सेटेलाइट और नकटिया के बीच में पीडब्ल्यूडी की जमीन पर मजार, नकटिया नदी पुल से पहले एक किनारे पर मंदिर और दूसरे किनारे पर मस्जिद, नकटिया से ट्रांसपोर्ट नगर तक सड़क के किनारे तीन अनाधिकृत मजार, पीलीभीत बाईपास पर कृष्णानगर मोड़ पर हाइवे की जमीन पर मंदिर और मजार, रुहेलखंड विश्वविद्यालय से डोहरा रोड मोड़ के बीच में मस्जिद और आश्रम, मूर्ति नर्सिंग होम से प्रेमनगर चौराहे तक दो मंदिर सड़क पर बने हैं। प्रेमनगर चौराहा, मॉडल टाउन स्टेडियम के बाहर, डेलापीर, आलमगिरीगंज गंज से साहू रामस्वरूप डिग्री कालेज मोड़ तक पांच मंदिर और एक मजार नियम विरुद्ध बनी है। किला से मिनीबाईपास परसाखेड़ा तक आधा दर्जन से ज्यादा धार्मिक स्थल बने हैं। इनके अलावा मोहल्लों और कालोनियों में भी रोज नए धार्मिक स्थल बन रहे हैं।
‘सप्रीम कोर्ट और शासन के निर्देश पर नए धार्मिक स्थलों के निर्माण पर रोक है। इसका सख्ती से पालन किया जा रहा है। पुलिस, बीडीए और नगर निगम को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस बारे में समय-समय पर शासन को रिपोर्ट भेजी जाती रही है।’
- गौरव दयाल डीएम
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अमर उजाला ने सड़क किनारे अनाधिकृत तरीके से बनने वाले धार्मिक स्थल के मामलों से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से प्रकाशित किया है। अनाधिकृत तरीके से नाले नालियों और सरकारी जमीन पर बन रहे धार्मिक स्थलों के निर्माण को रोकने के लिए पुलिस - प्रशासन की ओर से कोई प्रयास नहीं किए गए। राज्य सरकार की ओर से तीन बार नए अवैध निर्माण न होने देने के आदेश जारी हुए। प्रशासन ये कहकर खुद को बचाता रहा कि पुराने अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के बारे में स्पष्ट आदेश नहीं हैं। हर छह महीने के बाद मांगी जाने वाली जानकारी में रुटीन की रिपोर्ट भेजी जाती रहीं है। पुलिस एवं प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार 29 सितंबर 2009 तक बरेली में 929 धार्मिक स्थल अवैध चिह्नित हुए हैं। इनमें से 67 धार्मिक स्थलों को यथास्थिति बनाए रखने का औचित्य पाया गया है।
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ये थी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने यूनियन आफ इंडिया बनाम गुजरात राज्य एवं अन्य मामलों में 29 सितंबर 2009, 16 फरवरी 2010 और 13 सितंबर 2011 को आदेश पारित किए थे। इन तीनों आदेशों में सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकारों को निर्देश दिए थे कि अवैध निर्माण ध्वस्त कराए जाएं।
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इन्हें तो कुछ नहीं दिख रहा
शहामतगंज से सेटेलाइट के बीच ईसाइयों की पुलिया पर मंदिर, सेटेलाइट और नकटिया के बीच में पीडब्ल्यूडी की जमीन पर मजार, नकटिया नदी पुल से पहले एक किनारे पर मंदिर और दूसरे किनारे पर मस्जिद, नकटिया से ट्रांसपोर्ट नगर तक सड़क के किनारे तीन अनाधिकृत मजार, पीलीभीत बाईपास पर कृष्णानगर मोड़ पर हाइवे की जमीन पर मंदिर और मजार, रुहेलखंड विश्वविद्यालय से डोहरा रोड मोड़ के बीच में मस्जिद और आश्रम, मूर्ति नर्सिंग होम से प्रेमनगर चौराहे तक दो मंदिर सड़क पर बने हैं। प्रेमनगर चौराहा, मॉडल टाउन स्टेडियम के बाहर, डेलापीर, आलमगिरीगंज गंज से साहू रामस्वरूप डिग्री कालेज मोड़ तक पांच मंदिर और एक मजार नियम विरुद्ध बनी है। किला से मिनीबाईपास परसाखेड़ा तक आधा दर्जन से ज्यादा धार्मिक स्थल बने हैं। इनके अलावा मोहल्लों और कालोनियों में भी रोज नए धार्मिक स्थल बन रहे हैं।
‘सप्रीम कोर्ट और शासन के निर्देश पर नए धार्मिक स्थलों के निर्माण पर रोक है। इसका सख्ती से पालन किया जा रहा है। पुलिस, बीडीए और नगर निगम को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस बारे में समय-समय पर शासन को रिपोर्ट भेजी जाती रही है।’
- गौरव दयाल डीएम