फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   No coordination with the situation, number of psychopaths doubled in five years

Bareilly News: हालातों से नहीं तालमेल, पांच साल में दोगुना हुए मनोरोगी

Tue, 10 Oct 2023 01:59 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 10 Oct 2023 01:59 AM IST
विज्ञापन
No coordination with the situation, number of psychopaths doubled in five years
बरेली। बेहतर परवरिश का अभाव या फिर चाहत पूरी करने की हसरत, दोनों ही मामलों में परिस्थितियों से तालमेल न बैठा पाने से मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ रही है। जिला अस्पताल के मनकक्ष के आंकड़ों के मुताबिक पांच साल में दोगुना मनोरोगी बढ़े हैं और सिलसिला अब भी जारी है।
विज्ञापन

मनोचिकित्सक डॉ. आशीष कुमार के मुताबिक वर्ष 2018 से पहले ओपीडी में हर साल औसतन 20 हजार लोग मानसिक समस्याओं के इलाज के लिए आते थे, मगर अब तादाद 36 हजार के पार पहुंच रही है। इसमें 30 फीसदी युवा ऐसे हैं, जो परिस्थितियों से तालमेल नहीं बैठा पा रहे। इसके चलते वह डिप्रेशन की चपेट में हैं। इसमें पारिवारिक विवाद, प्रेम-प्रसंग, महंगी वस्तु की खरीदारी आदि शामिल हैं। इसके अलावा बच्चों में इंटरनेट एडिक्शन के भी मामले बढ़े हैं। अभिभावक बच्चों को लेकर मनकक्ष पहुंच रहे हैं, जिनकी काउंसलिंग हो रही है।
विज्ञापन


अभिभावक बच्चों को सिखाएं तालमेल
डॉ. आशीष के मुताबिक परिस्थितियों से तालमेल बैठाने की सीख बच्चों को देनी चाहिए, ताकि बढ़ती उम्र के साथ वह जिम्मेदारियों को समझ सकें। स्थितियों को भांपकर निर्णय और मांग कर सकें। हालांकि, अब लोग बच्चों की ख्वाहिश पूरी करने में कोई कसर बाकी नहीं रखते। इसके चलते मांग बड़ी होती जाती है और जब अभिभावक इन्कार करते हैं तो यह मानसिक तनाव की वजह बनने लगती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


शुरुआत में बेहतर इलाज की उम्मीद
काउंसलर खुश अदा के मुताबिक बच्चों में मनोरोग का पता नहीं चलता। 12 वर्ष आयुवर्ग तक ऑटिज्म, स्पेसिफिक लर्निंग डिसेबिलिटी की शिकायत होती है। फिर एंग्जायटी, डिप्रेशन, सीमैटोफार्म, इंटरनेट एडिक्शन आदि मनोरोग के लक्षण पनपने लगते हैं। कहा कि अगर 20 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले लक्षण भांपकर काउंसलिंग हो जाए तो कम समय में बेहतर परिणाम मिलते हैं। युवा होने पर समय अधिक लगता है।

मानसिक रोग के लक्षण
मन उदास रहना, किसी काम में मन न लगना, थकान रहना, नींद न आना, आत्महत्या के विचार, बिना बात लड़ना-झगड़ना, ज्यादा गुस्सा, तोड़-फोड़ करना, साफ-सफाई करना, एक काम को बार-बार करना, नकारात्मक विचार बढ़ना, घबराहट, बेचैनी, तनाव से बेहोशी, असामान्य व्यवहार, कानों में आवाज गूंजना, एकांत रहना, जल्दी-जल्दी भूलना, मिर्गी के दौरे, नशा न छोड़ पाना आदि मनोरोग के लक्षण हैं।



झाड़-फूंक नहीं, इलाज कराएं
मानसिक रोगों का इलाज है। दवा और काउंसलिंग से ठीक हो जाता है। इसलिए झाड़-फूंक के चक्क्र में पड़ने के बजाय इलाज कराएं। डॉक्टरों के मुताबिक मनोरोग किसी भी उम्र में हो सकता है। अगर लक्षण उभर रहे हैं तो इसे छिपाएं नहीं। अगर अस्पताल नहीं आ सकते तो टेली मानस हेल्पलाइन नंबर 14416, 18008914416, मानसिक स्वास्थ्य हेल्प नंबर 07248215922, 07248215822 पर कॉल कर सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed