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इमाम हुसैन की याद में घर-घर हुई नियाज नजर और इबादत
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घर में इबादत करते बच्चे।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
बच्चों बच्चों ने मांगी दुआएं, लंगर और सबील बांटी
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बरेली। मोहर्रम की यौम ए आशुरा पर कर्बला और जुलूस पर पाबंदी के चलते लोग अपने घरों में ही रहे। घर पर ही नियाज नजर और इबादत की। रोजा रखा और जिक्रे शहादतैन किया।
शहीदाने कर्बला की याद में रविवार को सुबह से ही नियाज नजर का सिलसिला शुरू हो गया था। तमाम लोगों ने यौम ए आशुरा पर रोजा भी रखा। नमाज पढ़ी और कुरान की तिलावत की। इसमें बच्चों ने भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। इस बीच इमाम हुसैन के नाम पर लोगों ने लंगर और सबील भी बांटी। एक दूसरे के घरों पर तबर्रुक पहुंचाया। यह सिलसिला रात कर जारी रहा। पुराना शहर के कुछ घरों में शहीदाने कर्बला का जिक्र भी किया गया।
इसके अलावा तमाम घरों में कायम इमामबाड़ों पर परिवार के ही लोगों ने सामाजिक दूरी से नियाज फातेहा किया। इसमें मलूकपुर के हुसैनी तख्त पर रिजवान साबरी और तमाम अकीदतमंदों ने शहीदाने कर्बला को याद किया। पुरवा बब्बन खां इमामबाड़ा पर भी फरजाना रऊफ के साथ तमाम महिलाओं ने नियाज नजर कर दुआएं मांगी। इसी तरह बिहारीपुर में सूफी वसीम मियां साबरी के तख्त पड़े पर्दे के बाहर से ही नियाज की गई। इसमें सलीम अहमद साबरी और दिलशाद साबरी आदि शामिल रहे।
शहीदाने कर्बला की याद में रविवार को सुबह से ही नियाज नजर का सिलसिला शुरू हो गया था। तमाम लोगों ने यौम ए आशुरा पर रोजा भी रखा। नमाज पढ़ी और कुरान की तिलावत की। इसमें बच्चों ने भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। इस बीच इमाम हुसैन के नाम पर लोगों ने लंगर और सबील भी बांटी। एक दूसरे के घरों पर तबर्रुक पहुंचाया। यह सिलसिला रात कर जारी रहा। पुराना शहर के कुछ घरों में शहीदाने कर्बला का जिक्र भी किया गया।
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इसके अलावा तमाम घरों में कायम इमामबाड़ों पर परिवार के ही लोगों ने सामाजिक दूरी से नियाज फातेहा किया। इसमें मलूकपुर के हुसैनी तख्त पर रिजवान साबरी और तमाम अकीदतमंदों ने शहीदाने कर्बला को याद किया। पुरवा बब्बन खां इमामबाड़ा पर भी फरजाना रऊफ के साथ तमाम महिलाओं ने नियाज नजर कर दुआएं मांगी। इसी तरह बिहारीपुर में सूफी वसीम मियां साबरी के तख्त पड़े पर्दे के बाहर से ही नियाज की गई। इसमें सलीम अहमद साबरी और दिलशाद साबरी आदि शामिल रहे।
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