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Bareilly News: भेड़-बकरियों को प्लेग, चेचक से बचाएगा नया टीका, तकनीक हस्तांतरित

Mon, 04 Mar 2024 01:27 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 04 Mar 2024 01:27 AM IST
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New vaccine will protect sheep and goats from plague and smallpox, technology transferred
बरेली। भेड़-बकरियों को प्लेग (पीपीआर) और चेचक से निजात के लिए अब अलग-अलग वैक्सीन लगाने की जरूरत नहीं। वैज्ञानिकों ने दोनों वैक्सीन की कंबाइंड (संयुक्त) तकनीकी तैयार की है। साथ ही ये तकनीकी अहमदाबाद की कंपनी को हस्तांतरित कर दी गई है। नई वैक्सीन जल्द बाजार में उपलब्ध होगी।
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भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान इज्जतनगर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मुथु चेलवन के मुताबिक पेस्टे-डेस-पेटिट्स रुमिनेंट्स (पीपीआर) जिसे बकरी प्लेग के नाम से भी जानते हैं और गोटपॉक्स (बकरी चेचक) बेहद संक्रामक वायरल रोग हैं। इनकी चपेट में आने पर रोग प्रतिरोधक क्षमता तेजी से गिरती है और बकरी की मौत हो जाती है। इससे पशुपालक और किसानों को खासा नुकसान होता है।
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उनके अनुसार इस समय देश में 148.88 मिलियन बकरियां हैं। इन्हें निम्न और मध्यम स्तर के किसान, भूमिहीन मजदूर, मांस कारोबारी पालते हैं। इन्हें रोगों से बचाने का एकमात्र विकल्प टीकाकरण है। इसीलिए उनकी टीम में शामिल रहे वैज्ञानिक डॉ. ज्ञानवेल, डॉ. रामकृष्ण, डॉ. अमित कुमार, डॉ. चंद्र शेखर, डॉ. त्रिवेणी दत्त ने ये शोध किया।
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सूंगड़ी और उत्तरकाशी स्ट्रेन का किया प्रयोग
डॉ.मुथु के मुताबिक बकरियों को इन गंभीर रोगों से बचाव के लिए एक संयुक्त जीवित क्षीण (लाइव एटेन्यूएटेड) टीका विकसित किया गया है। ये टीका पूर्व में तैयार पीपीआर और गोटपॉक्स वैक्सीन का संयुक्त स्वरूप है। इस संयुक्त वैक्सीन के विकास में पीपीआर (सूंगडी/1996) और जीटीपीवी (उत्तरकाशी/1976) स्ट्रेनों का प्रयोग किया गया। इससे विकसित टीके से अब भेड़-बकरियों को दोनों रोगों से सुरक्षा मिल सकेगी।



जल्द बाजार में होगी उपलब्ध
आईवीआरआई निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त के मुताबिक तकनीक अहमदाबाद की हेस्टर बायोसाइंसेज कंपनी को एग्री इनोवेट प्रक्रिया से हस्तांतरित की गई है। ये कंपनी नियामक स्वीकृति के बाद टीके का उत्पादन शुरू करेगी। आगामी वित्तीय वर्ष यानी अप्रैल, मई तक वैक्सीन बाजार में उपलब्ध होने की उम्मीद है। बताया कि संयुक्त वैक्सीन की तकनीकी 65 लाख रुपये लाइसेंस शुल्क, 5 फीसदी रॉयल्टी की लाइसेंस शर्त समेत 10 साल की अवधि के लिए दी गई है।



बढ़ेगी उत्पादकता, किसानों की सुधरेगी आजीविका
वैज्ञानिकों के मुताबिक संयुक्त वैक्सीन के प्रयोग से किसानों की आजीविका में सुधार होगा। लागत, समय, श्रम की बचत होगी। बकरियों की उत्पादकता बढ़ने से आय बढ़ेगी। बताया कि पूर्व में पीपीआर, गोट पॉक्स का अलग-अलग टीका संस्थान में विकसित हुआ जिसका राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत भेड़-बकरियों व गोवंश आदि में भी प्रयोग हो रहा है।




विदेशी पशु भी होंगे इससे प्रतिरक्षित
संस्थान तकनीकी प्रबंधन इकाई के प्रभारी डाॅ.अनुज चौहान ने बताया कि पीपीआर और गोटपॉक्स वैक्सीन का प्रयोग भारत के अलावा उत्तरी, मध्य अफ्रीका, दक्षिण-पश्चिम, मध्य पूर्व और मध्य एशिया देशों में भी काफी हो रहा है। इसलिए अब आने जा रही संयुक्त वैक्सीन को एक बड़ा निर्यात बाजार मिलने की प्रबल संभावना है। स्वदेशी वैक्सीन से विदेशों में भी बकरियां व भेड़ प्रतिरक्षित होंगी।
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