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दबंग शहला के दांव बेअसर.. एक और जांच का आदेश
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बरेली। अब तक पूरी दबंगई के साथ नवाबगंज नगर पालिका अध्यक्ष की कुर्सी संभालती आईं शहला ताहिर के दांव अब लगातार बेअसर होते दिख रहे हैं। हाल ही में उनके खिलाफ गड़बड़ और घोटालों के आरोपों पर जांच का सिलसिला शुरू हुआ तो थमने में नहीं आ रहा है। अब उनके खिलाफ नगर पालिका में 13 कर्मचारियों की नियुक्ति दिखाकर उनके वेतन और भत्तों के नाम लाखों रुपये की हेराफेरी करने के मामले में कमिश्नर की ओर से डीएम को जांच का आदेश दिया गया है।
भाजपा जिलाध्यक्ष के भाई नीरेेंद्र सिंह राठौर ने कमिश्नर रणवीर प्रसाद को पत्र लिखकर शिकायत की थी कि सन् 2007 के बाद नगर पालिकाओं में कर्मचारियों की भर्तियों के संबंध में कोई शासनादेश जारी नहीं हुआ है। इसके बावजूद शहला ताहिर ने नगर पालिका में 2016 में 13 कर्मचारियों की भर्ती होना दिखाते हुए उनके वेतन-भत्तों के बिल नगर पालिका के खाते से भुगतान के लिए भारतीय स्टेट बैंक शाखा को भेज दिए। इन बिलों पर बैंक से 13.43 लाख का भुगतान लिया गया है। शिकायत में कहा गया है कि नगर पालिका का रिकार्ड बताता है कि कोई नया कर्मचारी नियुक्त नहीं हुआ। इन कर्मचारियों का नगर पालिका के वेतन रजिस्टर, टीए व डीए, बोनस, हाजिरी रजिस्टर समेत किसी रिकार्ड में भी नाम नहीं दर्ज है। इससे जाहिर है कि 13 कर्मचारियों के फर्जी नामों पर बैंक से 13.43 लाख रुपये की रकम निकालकर उसका गबन कर लिया गया है। नीरेंद्र का दावा है कि आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना के जवाब में भी पालिका प्रशासन ने इन कर्मचारियों के नाम नहीं बता सका है। शिकायत पर कमिश्नर की ओर से अपर आयुक्त प्रशासन अरुण कुमार ने डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह को इस शिकायत की जांच कर रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। बता दें कि इससे पहले करीब एक करोड़ रुपये के दो घोटालों में शासन के आदेश पर शहला के खिलाफ जांच कराई जा रही है। कुछ दिन पहले 14 सभासदों ने भी शहला पर उनके फर्जी दस्तखतों के जरिये प्रस्ताव पारित कर लाखों का गोलमाल करने की शिकायत की थी। इसकी भी जांच शुरू हो चुकी है।
चेयरमैन शहला ताहिर पर अवैध नियुक्तियां करने का मामला संज्ञान में आया है। यह गंभीर प्रकरण है जिसकी की जांच कराकर कमिश्नर को वास्तविकता से अवगत कराया जाएगा। -वीरेंद्र कुमार सिंह, जिलाधिकारी
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मैडम अब दो महीने से दफ्तर ही नहीं आ रहीं
अध्यक्ष शहला ताहिर पिछले दो महीने से अपने दफ्तर से नदारद हैं। नगर पालिका के ईओ ने इसकी रिपोर्ट डीएम को भेजी है। इसमें कहा गया है कि चेयरमैन के करीब दो महीने से अपने दफ्तर में न बैठने से सफाई, पेयजल समेत कई जनसुविधाओं के ठप होने की नौबत आ गई है। शासनादेशों के अनुपालन करने में भी दिक्कत आ रही है। फिलहाल सबसे बड़ी समस्या मलेरिया और डेंगू के प्रकोप से पब्लिक को बचाने के लिए दवा का छिड़काव न करा पाने से पैदा हो रही है। चेयरमैन के न आने से दवा की खरीद ही नहीं हो पाई है। नगर पालिका और जनहित से जुड़े दूसरे कई जरूरी काम भी ठप पड़े हैं।
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भाजपा जिलाध्यक्ष के भाई नीरेेंद्र सिंह राठौर ने कमिश्नर रणवीर प्रसाद को पत्र लिखकर शिकायत की थी कि सन् 2007 के बाद नगर पालिकाओं में कर्मचारियों की भर्तियों के संबंध में कोई शासनादेश जारी नहीं हुआ है। इसके बावजूद शहला ताहिर ने नगर पालिका में 2016 में 13 कर्मचारियों की भर्ती होना दिखाते हुए उनके वेतन-भत्तों के बिल नगर पालिका के खाते से भुगतान के लिए भारतीय स्टेट बैंक शाखा को भेज दिए। इन बिलों पर बैंक से 13.43 लाख का भुगतान लिया गया है। शिकायत में कहा गया है कि नगर पालिका का रिकार्ड बताता है कि कोई नया कर्मचारी नियुक्त नहीं हुआ। इन कर्मचारियों का नगर पालिका के वेतन रजिस्टर, टीए व डीए, बोनस, हाजिरी रजिस्टर समेत किसी रिकार्ड में भी नाम नहीं दर्ज है। इससे जाहिर है कि 13 कर्मचारियों के फर्जी नामों पर बैंक से 13.43 लाख रुपये की रकम निकालकर उसका गबन कर लिया गया है। नीरेंद्र का दावा है कि आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना के जवाब में भी पालिका प्रशासन ने इन कर्मचारियों के नाम नहीं बता सका है। शिकायत पर कमिश्नर की ओर से अपर आयुक्त प्रशासन अरुण कुमार ने डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह को इस शिकायत की जांच कर रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। बता दें कि इससे पहले करीब एक करोड़ रुपये के दो घोटालों में शासन के आदेश पर शहला के खिलाफ जांच कराई जा रही है। कुछ दिन पहले 14 सभासदों ने भी शहला पर उनके फर्जी दस्तखतों के जरिये प्रस्ताव पारित कर लाखों का गोलमाल करने की शिकायत की थी। इसकी भी जांच शुरू हो चुकी है।
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चेयरमैन शहला ताहिर पर अवैध नियुक्तियां करने का मामला संज्ञान में आया है। यह गंभीर प्रकरण है जिसकी की जांच कराकर कमिश्नर को वास्तविकता से अवगत कराया जाएगा। -वीरेंद्र कुमार सिंह, जिलाधिकारी
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मैडम अब दो महीने से दफ्तर ही नहीं आ रहीं
अध्यक्ष शहला ताहिर पिछले दो महीने से अपने दफ्तर से नदारद हैं। नगर पालिका के ईओ ने इसकी रिपोर्ट डीएम को भेजी है। इसमें कहा गया है कि चेयरमैन के करीब दो महीने से अपने दफ्तर में न बैठने से सफाई, पेयजल समेत कई जनसुविधाओं के ठप होने की नौबत आ गई है। शासनादेशों के अनुपालन करने में भी दिक्कत आ रही है। फिलहाल सबसे बड़ी समस्या मलेरिया और डेंगू के प्रकोप से पब्लिक को बचाने के लिए दवा का छिड़काव न करा पाने से पैदा हो रही है। चेयरमैन के न आने से दवा की खरीद ही नहीं हो पाई है। नगर पालिका और जनहित से जुड़े दूसरे कई जरूरी काम भी ठप पड़े हैं।