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नगर निगम ने अपनी बला हरी भरी के ऊपर डाल दी

Thu, 29 Dec 2016 01:29 AM IST
बरेली
बरेली Updated Thu, 29 Dec 2016 01:29 AM IST
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सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का मुद्दा एक बार फिर लटकाने की कवायद हो रही है। ढाई साल से बंद पड़े प्लांट को नगर निगम खुद तो चलवा नहीं पाया। वह कानूनी लड़ाई लड़ना भी नहीं चाहता। कानूनी अड़चनों और अनापत्ति प्रमाण पत्र लाने जैसी अपनी बला हरी भरी एजेंसी के ऊपर डालने की तैयारी है। प्लांट चलाने के लिए एनओसी पाने की जो छह शर्तें हैं, क्या एजेंसी उनको पूरा कर पाएगी? ये सवाल अभी भी वहीं है, जहां ढाई साल पहले था।  मेयर ने भी हंगामे के बीच बिना वोटिंग कराए प्रस्ताव मंजूर कर दिया। पार्षद पहले से ही प्लांट चलाने को लेकर दो फाड़ हैं। जिनकी डील हो चुकी है, वह प्लांट रजऊ परसपुर से दूसरी जगह शिफ्ट कराने की मुहिम में लगे हैं और जो डील से वंचित रह गए, वह शिफ्ट किए जाने का सदन में विरोध कर रहे थे।
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सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट मार्च 2013 में शुरू हुआ था। इसके बाद वह बमुश्किल एक साल तक ही किसी तरह चल पाया। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने प्लांट बंद करने के आदेश दिए तो नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। वहां से स्टे मिला तो प्लांट एक बार फिर चालू हो गया। इसके बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में दूसरी रिट दायर हो गई। उस पर एनजीटी ने नगर निगम को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेकर प्लांट चलाने की अनुमति दे दी। पीसीबी ने एनओसी देने के लिए प्लांट में छह शर्तें लगा दीं। नगर निगम उन शर्तों को आज तक पूरा नहीं कर पाया और न ही प्लांट चलाने की कोशिश की गई। यहां तक कि पीसीबी से एनओसी लेने के प्रयास तक नहीं किए गए। इसके चलते प्लांट चलाने वाली फर्म एकेसी डेवलपर्स प्लांट छोड़कर चली गई। प्लांट चलाने के लिए नगर निगम ने खुद तो कोई प्रयास तक नहीं किए लेकिन अब हरी भरी एजेंसी पर 12 शर्तें लगाकर एक अनुभवहीन फर्म को कानूनी लड़ाई लड़ने से लेकर एनओसी लाकर प्लांट चलाने की जिम्मेदारी दे दी।
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 एकेसी डेवलपर्स से कैसे निपटेंगे
प्लांट चलाने वाली पुरानी फर्म से नगर निगम का समझौता था। वह बिना नगर निगम को सूचना दिए प्लांट छोड़कर जा चुकी है। नगर निगम नई फर्म हरी भरी से दोबारा समझौता कर लिया है। अगर पुरानी फर्म ने नए समझौते पर आपत्ति कर दी तो प्लांट चलाने में एक और कानूनी लड़ाई का पेंच फंस जाएगा। इससे निपटने की कोई रणनीति नहीं बनाई गई। हरी भरी फर्म इन विवादों से कैसे निपटेगी। इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
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एनओसी मिलने में पेंच
प्लांट चलाने के लिए  पीसीबी ने छह आपत्तियां लगाई हैं। इनमें से नगर निगम लीचेड प्लांट नहीं लगवाया पाया है। लीचेड प्लांट 60 से 80 लाख रुपये में लगेगा। क्या हरी भरी फर्म इतना बजट खर्च कर लीचेड प्लांट लगवा पाएगी। अगर ऐसा नहीं हो पाया तो पीसीबी से प्लांट चलाने की एनओसी नहीं मिलेगी और प्लांट चालू होना मुश्किल हो जाएगा।


कोट--
प्लांट चलाना असली मकसद नहीं है। असली मकसद है शहर का डोर टू डोर का ठेका देना। निजी हित के लिए हरी भरी फर्म से प्लांट चलाने का अनुबंध किया गया है। हमें उम्मीद नहीं है कि प्लांट इस तरह से चालू हो पाएगा। राजेश अग्रवाल, नेता पार्षद दल सपा


कोट--
हरी भरी फर्म को प्लांट चलाने के लिए कानूनी अड़चनों से लेकर अनापत्ति प्रमाण पत्र खुद हासिल करना होगा। इसके बाद ही उसको डोर टू डोर कूड़ा योजना दी जाएगी। कंपनी ये शर्तें पूरी करेगी। उसकी पैरवी की जिम्मेदारी भी उसकी होगी।  डा. आईएस तोमर, मेयर
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