{"_id":"5d4c7c808ebc3e6d03543a54","slug":"nagar-nigam-bareilly-news-bly371687258","type":"story","status":"publish","title_hn":"चहेतों को मनमाने ढंग से दे दिए गए 20 करोड़ के टेंडर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चहेतों को मनमाने ढंग से दे दिए गए 20 करोड़ के टेंडर
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बरेली। नगर निगम कार्यालय की नई इमारत के बजट के साथ करीब 20 करोड़ के टेंडर में घोटाले की शिकायत सीएम योगी आदित्यनाथ तक पहुंची है। शिकायत में इन टेंडरों को मनमाने ढंग से कुछ खास ठेकेदारों को देने के लिए नियमों की अनदेखी कर दिए जाने का आरोप लगाया गया है। नगर निगम कार्यालय का भवन बनाने के लिए अधिकृत संस्था की अनुमति तक न लिए जाने की बात कहते हुए तत्कालीन नगर आयुक्त आरके श्रीवास्तव की भूमिका पर सवाल खड़े किए गए हैं। शासन के आदेश के बाद डीएम ने इसकी जांच के लिए एडीएम सिटी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी है।
पिछले साल 12 करोड़ की लागत से नगर निगम कार्यालय का भवन के साथ कई करोड़ के कुछ दूसरे काम भी कराए जाने थे। जुलाई 2018 में इन कामों के टेंडर होने के बाद शिकायत की गई कि चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए इन टेंडरों को सिर्फ दो से पांच फीसदी तक कम पर देकर सरकारी खजाने को अच्छा-खासा चूना लगाया गया है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि तत्कालीन नगर निगम के अधिकारियों ने जिस कंपनी को करोड़ों के काम दिए गए हैं, उसके पास अपना भवन तक नहीं था। गलत तरह ठेका दिए जाने का नतीजा यह है कि भवन के निर्माण में भी कई नियमों की अनदेखी की गई है। दिसंबर 2018 में शासन ने इस प्रकरण का संज्ञान लिया जिसके बाद संयुक्त सचिव मनिराम सिंह ने जांच के आदेश दिए। डीएम ने इस मामले की जांच शुरू कराते हुए एडीएम सिटी ओपी वर्मा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय टीम बना दी है। इसमें पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड के एक्सईएन हरवंश सिंह और अपर मुख्य अधिकारी भी शामिल हैं।
14वें वित्त के कामों के रिकार्ड न मिलने से अटकी जांच
नगर निगम में 14वें वित्त आयोग से कराए गए विभिन्न निर्माण कार्यों की जांच भी होनी है, इसके रिकार्ड न मिल पाने से जांच प्रभावित हो रही है। एडीएम सिटी महेंद्र कुमार ने इसे लेकर पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन हरवंश सिंह को नोटिस भेजा है। एडीएम का कहना है कि एक्सईएन को नगर निगम से पत्रावलियां मंगवाई गई थी, जो अब तक नहीं मिली है। इससे जांच आगे नहीं बढ़ पा रही।
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नगर निगम में टेंडरों में गड़बड़ी की शिकायत शासन में हुई थी। डीएम के आदेश के बाद इसकी जांच कराई जा रही है। नगर निगम से इस मामले की पत्रावलियां मांगी जाएंगी।- महेंद्र कुमार, एडीएम सिटी
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पिछले साल 12 करोड़ की लागत से नगर निगम कार्यालय का भवन के साथ कई करोड़ के कुछ दूसरे काम भी कराए जाने थे। जुलाई 2018 में इन कामों के टेंडर होने के बाद शिकायत की गई कि चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए इन टेंडरों को सिर्फ दो से पांच फीसदी तक कम पर देकर सरकारी खजाने को अच्छा-खासा चूना लगाया गया है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि तत्कालीन नगर निगम के अधिकारियों ने जिस कंपनी को करोड़ों के काम दिए गए हैं, उसके पास अपना भवन तक नहीं था। गलत तरह ठेका दिए जाने का नतीजा यह है कि भवन के निर्माण में भी कई नियमों की अनदेखी की गई है। दिसंबर 2018 में शासन ने इस प्रकरण का संज्ञान लिया जिसके बाद संयुक्त सचिव मनिराम सिंह ने जांच के आदेश दिए। डीएम ने इस मामले की जांच शुरू कराते हुए एडीएम सिटी ओपी वर्मा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय टीम बना दी है। इसमें पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड के एक्सईएन हरवंश सिंह और अपर मुख्य अधिकारी भी शामिल हैं।
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14वें वित्त के कामों के रिकार्ड न मिलने से अटकी जांच
नगर निगम में 14वें वित्त आयोग से कराए गए विभिन्न निर्माण कार्यों की जांच भी होनी है, इसके रिकार्ड न मिल पाने से जांच प्रभावित हो रही है। एडीएम सिटी महेंद्र कुमार ने इसे लेकर पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन हरवंश सिंह को नोटिस भेजा है। एडीएम का कहना है कि एक्सईएन को नगर निगम से पत्रावलियां मंगवाई गई थी, जो अब तक नहीं मिली है। इससे जांच आगे नहीं बढ़ पा रही।
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नगर निगम में टेंडरों में गड़बड़ी की शिकायत शासन में हुई थी। डीएम के आदेश के बाद इसकी जांच कराई जा रही है। नगर निगम से इस मामले की पत्रावलियां मांगी जाएंगी।- महेंद्र कुमार, एडीएम सिटी