मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बोले: हिंदू-मुसलमानों को बांटना चाहते हैं चंद लोग, इनके मंसूबे नहीं होंगे कामयाब
बरेली में ऑल इंडिया मुस्लिम जमात की ओर से दरगाह आला हजरत स्थित ग्रांड मुफ्ती हाउस में शुक्रवार को गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें हिंदू मुसलमानों को बांटने वाली विभाजनकारी नीतियों का सख्त विरोध किया गया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि भारत में चंद लोग विभाजनकारी नीति अपना रहे हैं। ऐसे लोग हिंदू और मुसलमानों के भाईचारे को बांटना चाहते हैं। कुछ मुस्लिम संगठन भी विभाजनकारी विमर्श में लगे हुए हैं। मौलाना ने ऐसे लोगों को चुनौती देते हुए कहा कि उनकी विभाजनकारी गतिविधियां और विचार कभी भी सफल नहीं होंगे। भारतीय समाज सभी संप्रदाय के साथ विचार-विमर्श के साथ सदियों से रहता आया है।
केरल की मस्जिद में हिंदू जोड़े ने की शादी
मौलाना ने कहा कि हमारे महान राष्ट्र का ताना-बाना विभिन्न धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों के धागों में बुना गया है। हाल ही में एक दिल को छू लेने वाली घटना सामने आई, जहां एक हिंदू जोड़े ने केरल की मस्जिद में शादी की। उन्होंने कहा कि 'द केरला स्टोरी' और उसके बाद अकोला महाराष्ट्र में हुई हिंसा से जुड़े विवादों की पृष्ठभूमि के बीच यह मामला एकता की मिसाल है।
गोष्ठी में हाजी नाजिम बेग ने कहा कि प्रसिद्ध संगीतकार ए. आर. रहमान ने हाल ही में मस्जिद के अंदर हिंदू जोड़े के विवाह समारोह को कैप्चर करते हुए वीडियो साझा किया है। इस खूबसूरत समारोह ने समावेशित और अपसी सम्मान की भावना का उदाहरण दिया जो भारतीय लोकाचार में गहराई से निहित है। इस तरह के उदाहरण देश की प्रकृति के प्रमाण है, जहां विभिन्न धर्मों के लोग सौहार्दपूर्ण सह- अस्तित्व में रहते हैं।
विभाजनकारी नीतियों का करें विरोध
मदरसा शाने आला हजरत के प्रधानाचार्य मुफ्ती शेख सिराजुद्दीन कादरी ने कहा कि भारत प्राचीनकाल से ही सहिष्णुता, स्वीकृति और सह-अस्तित्व का प्रतीक रहा है। मस्जिद में शादी समारोह भारत की बहुलवाद की परंपरा और विपरीत परिस्थितियों में एकता को बनाए रखने की प्रतिबद्धता की याद दिलाता है। समावेशी आख्यान समझ, सहानुभूति और सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा दे सकते हैं और एकता की कहानियों को साझा करके हम विभाजनकारी नीतियों का विरोध कर सकते हैं।
इस्लामी रिसर्च सेंटर के उप निदेशक आरिफ अंसारी ने कहा कि विभाजन के मुख्य कारण, जो अक्सर गलतफहमियों पूर्वग्रहों और शिक्षा की कमी से उत्पन्न होते हैं। प्यार, सम्मान और सहानुभूति के गुणों पर जोर देने से मतभेदों को पाटने और समावेशी समाज को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।