लोकसभा चुनाव: 200 से ज्यादा वाहन स्वामियों ने रिसीव नहीं किए अधिग्रहण नोटिस, FIR दर्ज कराने की तैयारी
बरेली मंडल के 200 वाहन स्वामियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हो सकती है। इन लोगों ने वाहन अधिग्रहण संबंधी नोटिस ही रिसीव नहीं किए हैं। एक मई के बाद इन पर कार्रवाई हो सकती है।
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लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में बरेली, आंवला और बदायूं सीट पर भी मतदान होना है। मतदान प्रक्रिया में उपयोग होने वाले वाहनों को उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी परिवहन विभाग को दी गई है मगर, अधिकारी वाहन अधिगृहित ही नहीं कर पा रहे हैं। अब तक 200 वाहन स्वामियों ने अधिग्रहण नोटिस ही रिसीव नहीं किए हैं। परिवहन विभाग बुधवार के बाद इन वाहन स्वामियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है।
उड़नदस्तों और प्रेक्षकों के लिए पहले ही वाहन मुहैया करा दिए गए हैं। सोमवार से बुधवार तक विधानसभा और सेक्टरवार वाहनों की ड्यूटी लगाई जानी है। वाहन अधिग्रहण में लापरवाही को लेकर बीते दिनों एआरटीओ राजेश कर्दम को निलंबित किया जा चुका है।
एआरटीओ पर कार्रवाई के बाद अधिकारी वाहन अधिग्रहण में ज्यादा गंभीरता दिखा रहे हैं। 29 अप्रैल से एक मई तक ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर में सुबह 10 से शाम पांच बजे तक शिविर लगाकर वाहनों की ड्यूटी के साथ चालकों को ईंधन पर्चियों और लॉगबुक का वितरण किया जाना है।
ऐसे वाहन स्वामियों की सूची तैयार
इससे पहले ऐसे वाहनों की सूची तैयार की गई है जिनके स्वामियों ने अब तक अधिग्रहण नोटिस ही रिसीव नहीं किया है। इनमें निजी चार पहिया वाहनों की संख्या ज्यादा है। कुछ स्कूलों के वाहन भी हैं। स्कूलों के वाहनों का इस्तेमाल पोलिंग पार्टियों को मतदान केंद्रों तक भेजने के लिए किया जाना है। एआरटीओ प्रशासन मनोज कुमार ने बताया कि जिन वाहन स्वामियों ने अधिग्रहण नोटिस रिसीव नहीं किए हैं। उनके खिलाफ एक मई के बाद कार्रवाई की जाएगी।
चालक के पास ये चीजें होना जरूरी
चुनाव ड्यूटी में जिन वाहनों को भेजा जाएगा उनके पंजीकरण प्रमाणपत्र के साथ फिटनेस, चालक के ड्राइविंग लाइसेंस की भी पड़ताल की जाएगी। चालक के पास आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र होना भी जरूरी है। सात मई को होने वाले मतदान से पहले परिवहन विभाग यह सभी औपचारिकताएं पूरी कर वाहनों को विधानसभा और सेक्टरवार आवंटन करने पर जोर दे रहा है। यह भी तय किया जा रहा है कि वाहनों के चालक मतदान से वंचित न रहें। अधिकारियों के मुताबिक वाहन चालक की ड्यूटी उसके आसपास के क्षेत्र में ही लगाई जाएगी ताकि वह अपने बूथ पर जाकर मतदान भी कर सके।