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मौरंग-बजरी के भाव आसमान पर, काम रुके
बरेली।
Updated Thu, 13 Apr 2017 12:51 AM IST
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Moorang-gravel prices stay on sky, work stops
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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उत्तराखंड हाईकोर्ट की ओर से अवैध खनन और यूपी सरकार से ओवरलोडिंग पर रोक लगाने से मौरंग, बजरी और पत्थर के रेट आसमान छू रहे हैं। दो से तीन गुना तक कीमतें बढ़ने से बिल्डर, ठेकेदार और ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। बरेली में मौरंग-बजरी और पत्थरों की सप्लाई 80 फीसदी तक घट चुकी है। प्राइवेट कालोनाइजर्स को भी अपने निर्माण के काम रोकने पड़ रहे हैं।
डेढ़ महीने पहले तक बरेली में मौरंग-बजरी, रेता और पत्थर 70 से 80 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रही थी। यूपी में योगी सरकार ने ट्रकों की ओवरलोडिंग पर रोक लगा दी। इसी बीच उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हल्द्वानी की गोला नदी और बाजपुर में कोसी नदी में किसी भी तरह के खनन रोकने के आदेश दे दिए।
इसके बाद हल्द्वानी, बाजपुर और लालकुआं में भी थोक डीलरों ने रेट बढ़ा दिए। हालात ये हैं कि उत्तराखंड में मौरंग, रेता बजरी 145 से 170 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रही है। फुटकर में ये और महंगी पड़ ही है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। इसके बाद उत्तराखंड की दोनों नदियों से केवल वैध खनन की अनुमति दी गई है। खनन कम होने से उत्तराखंड से सटे यूपी के जनपद पीलीभीत, बरेली, शाहजहांपुर में हल्द्वानी, बाजपुर और लालकुआं से होने वाली मौरंग, बजरी रेता की आवक 80 फीसदी तक घट गई है। उधर, यूपी में योगी आदित्यनाथ सरकार बनने के बाद शासन ने ट्रकों में किसी भी तरह की ओवरलोडिंग पर सख्ती से रोक लगा रखी है। इसके चलते ट्रांसपोर्ट यूनियन ने मौरंग, रेता बजरी की सप्लाई देने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
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मंडी से रेता-बजरी गायब
एयरफोर्स के पास कर्मपुर में बड़े पैमाने पर अनाधिकृत तरीके से रेता-बजरी का कारोबार होता था। अब यहां सन्नाटा है। पीलीभीत बाईपास, सौ फुटा रोड, नैनीताल रोड, दिल्ली-रामपुर हाइवे और बदायूं रोड पर दुकानों के आगे सड़क पर रेता बजरी और मौरंग का होने वाला फुटकर कारोबार भी काफी हद तक कम हो चुका है।
मौरंग, बजरी और रेता की एक हजार से ज्यादा ट्रकों की सप्लाई आती है। अंडरलोडिंग का मानक 150 क्विंटल है, जबकि 450 क्विंटल तक माल लाया जाता है। ये मानक पुराना है। सरकार ने इसे नहीं बदला। इसके चलते ओवरलोडिंग होती है।
-दानिश जमाल, कोषाध्यक्ष रेता बजरी ट्रांसपोर्ट यूनियन
ओवरलोडिंग में सरकार या तो ट्रकों में वजन का मानक बढ़ाए। अन्यथा महंगाई इतनी बढ़ जाएगी कि गरीब और मध्यमवर्ग को अपने मकान बनाना मुश्किल हो जाएगा।
- रामकृष्ण शुक्ला, अध्यक्ष रेता बजरी ट्रांसपोर्ट यूनियन
उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद मौरंग-बजरी के रेट तीन से चार गुना तक बढ़ चुके हैं। बिल्डिंग मैटेरियल की बिक्री 80 फीसदी तक घट चुकी है। नोटबंदी के बाद कालोनियों के निर्माण के काम रोक दिए हैं। जनता पर अनावश्यक भार पड़ रहा है।
- रमनदीप सिंह, अध्यक्ष क्रेडाई
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डेढ़ महीने पहले तक बरेली में मौरंग-बजरी, रेता और पत्थर 70 से 80 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रही थी। यूपी में योगी सरकार ने ट्रकों की ओवरलोडिंग पर रोक लगा दी। इसी बीच उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हल्द्वानी की गोला नदी और बाजपुर में कोसी नदी में किसी भी तरह के खनन रोकने के आदेश दे दिए।
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इसके बाद हल्द्वानी, बाजपुर और लालकुआं में भी थोक डीलरों ने रेट बढ़ा दिए। हालात ये हैं कि उत्तराखंड में मौरंग, रेता बजरी 145 से 170 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रही है। फुटकर में ये और महंगी पड़ ही है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। इसके बाद उत्तराखंड की दोनों नदियों से केवल वैध खनन की अनुमति दी गई है। खनन कम होने से उत्तराखंड से सटे यूपी के जनपद पीलीभीत, बरेली, शाहजहांपुर में हल्द्वानी, बाजपुर और लालकुआं से होने वाली मौरंग, बजरी रेता की आवक 80 फीसदी तक घट गई है। उधर, यूपी में योगी आदित्यनाथ सरकार बनने के बाद शासन ने ट्रकों में किसी भी तरह की ओवरलोडिंग पर सख्ती से रोक लगा रखी है। इसके चलते ट्रांसपोर्ट यूनियन ने मौरंग, रेता बजरी की सप्लाई देने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
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मंडी से रेता-बजरी गायब
एयरफोर्स के पास कर्मपुर में बड़े पैमाने पर अनाधिकृत तरीके से रेता-बजरी का कारोबार होता था। अब यहां सन्नाटा है। पीलीभीत बाईपास, सौ फुटा रोड, नैनीताल रोड, दिल्ली-रामपुर हाइवे और बदायूं रोड पर दुकानों के आगे सड़क पर रेता बजरी और मौरंग का होने वाला फुटकर कारोबार भी काफी हद तक कम हो चुका है।
मौरंग, बजरी और रेता की एक हजार से ज्यादा ट्रकों की सप्लाई आती है। अंडरलोडिंग का मानक 150 क्विंटल है, जबकि 450 क्विंटल तक माल लाया जाता है। ये मानक पुराना है। सरकार ने इसे नहीं बदला। इसके चलते ओवरलोडिंग होती है।
-दानिश जमाल, कोषाध्यक्ष रेता बजरी ट्रांसपोर्ट यूनियन
ओवरलोडिंग में सरकार या तो ट्रकों में वजन का मानक बढ़ाए। अन्यथा महंगाई इतनी बढ़ जाएगी कि गरीब और मध्यमवर्ग को अपने मकान बनाना मुश्किल हो जाएगा।
- रामकृष्ण शुक्ला, अध्यक्ष रेता बजरी ट्रांसपोर्ट यूनियन
उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद मौरंग-बजरी के रेट तीन से चार गुना तक बढ़ चुके हैं। बिल्डिंग मैटेरियल की बिक्री 80 फीसदी तक घट चुकी है। नोटबंदी के बाद कालोनियों के निर्माण के काम रोक दिए हैं। जनता पर अनावश्यक भार पड़ रहा है।
- रमनदीप सिंह, अध्यक्ष क्रेडाई