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Bareilly News: हार्मोन असंतुलन से बढ़ रहे पुरुषों के स्तन, करा रहे प्लास्टिक सर्जरी

Sun, 21 Jun 2026 01:32 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 21 Jun 2026 01:32 AM IST
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Men's breasts enlarging due to hormonal imbalance; opting for plastic surgery.
बरेली। बदलती जीवनशैली और खानपान का असर अब किशोरों और युवाओं के शरीर पर भी दिखने लगा है। हार्मोन असंतुलन से उनके स्तनों में असामान्य वृद्धि हो रही है। चिकित्सकीय भाषा में इसे गायनेकोमैस्टिया कहते हैं। विशेषज्ञ के मुताबिक, किशोर और युवा इसकी चपेट में आ रहे हैं। एक दशक पूर्व तक वर्ष में एक-दो केस ही थे, लेकिन अब प्रतिमाह करीब पांच मामले सामने आ रहे हैं। उनकी प्लास्टिक सर्जरी की जा रही है।
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वरिष्ठ त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. त्रिभुवन प्रसाद के मुताबिक, गायनेकोमैस्टिया कोई कैंसर नहीं, बल्कि स्तन ग्रंथियों के बढ़ जाने की स्थिति है। यह समस्या एक या दोनों स्तनों में हो सकती है। हार्मोनल असंतुलन, मोटापा, स्टेरॉयड और सप्लीमेंट के सेवन, दवाओं के दुष्प्रभाव, अनियमित जीवनशैली आदि इसकी प्रमुख वजहें हैं। किशोरावस्था में हार्मोनल बदलाव से समस्या हो सकती है।
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डॉ. त्रिभुवन ने बताया कि स्तन का आकार ज्यादा बढ़ने पर सर्जरी करनी पड़ती है। फास्ट फूड में कैलोरी, चीनी, वसा ज्यादा होती है। इनके सेवन से मोटापा हो सकता है। फैट टिश्यू में मौजूद एरोमाटेज एंजाइम पुरुष हार्मोन टेस्टोस्टेरोन को एस्ट्रोजन में बदलने लगता है। इससे स्तन ग्रंथियां बढ़ सकती हैं। टेस्टोस्टेरोन की कमी, एस्ट्रोजन की अधिकता होने पर भी गायनेकोमैस्टिया होता है। संतुलित खानपान बचाव का सुरक्षित विकल्प है।
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मानसिक तनाव बढ़ने की आशंका
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. आशीष कुमार के मुताबिक, गायनेकोमैस्टिया का असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। कई किशोर और युवा अपने शरीर को लेकर हीनभावना का शिकार होने लगते हैं। सार्वजनिक स्थानों पर कपड़े बदलने, तैराकी, खेल गतिविधियों में प्रतिभाग करने से बचते हैं। सामाजिक उपहास, शर्मिंदगी की आशंका से आत्मविश्वास प्रभावित होता है। ऐसे मरीज सीधे ओपीडी में भी नहीं पहुंचते। वे टेलीमानस हेल्पलाइन नंबर 14416 पर संपर्क करते हैं।

पहले दवा, फिर सर्जरी
प्लास्टिक सर्जन डॉ. कौशल किशोर के मुताबिक, आठ-दस साल पहले हर महीने एक-दो मामले ही आते थे। अब प्रतिमाह पांच से अधिक सर्जरी हो रही हैं। हालांकि, हार्मोनल जांच के आधार पर पहले दवाएं दी जाती हैं। अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने पर प्लास्टिक सर्जरी से अवांछित चर्बी हटाई जाती है। इससे सर्जरी के निशान भी नजर नहीं आते। इसमें कम से कम 50 हजार रुपये खर्च आता है। कुछ महिलाओं में भी स्तनों का आकार सामान्य से अधिक होने पर सर्जरी की जाती है।
केस-1
आलमगिरी गंज निवासी 19 वर्षीय युवक को छाती में उभार का अहसास होने लगा था। मोटापा समझकर परिजनों ने नजरंदाज किया। स्कूल में दोस्त टिप्पणी करने लगे तो वह परेशान रहने लगा। व्यायाम से सुधार नहीं हुआ। तब टेलीमानस पर समस्या बताई। काउंसलिंग में फास्ट फूड छोड़ने, खानपान सुधारने के लिए कहा गया। इसमें लंबा वक्त लगता, इसलिए प्लास्टिक सर्जन से संपर्क कर सर्जरी कराई।


केस-2
मिनी बाइपास निवासी 28 वर्षीय युवक को छाती में उभार से शर्मिंदगी होती थी, इसलिए ढीले कपड़े पहनता था। जिम में पसीना बहाने के बावजूद आकार कम नहीं हुआ तो प्लास्टिक सर्जन से परामर्श लिया। गायनेकोमैस्टिया की पुष्टि हुई, पर वजह स्तनग्रंथि का बढ़ना मिला। सर्जरी में बढ़ी स्तनग्रंथि और फैट को भी हटाया गया। कुछ सप्ताह बाद छाती सामान्य दिखने लगी। हीनभावना से भी राहत मिली।
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