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रात को चोरी छिपे अस्पताल फेंकते हैं मेडिकल वेस्ट

Sun, 29 Oct 2017 01:41 AM IST
बरेली।
बरेली। Updated Sun, 29 Oct 2017 01:41 AM IST
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Medical waste throws at night to hide the hospital
अस्‍पपताला का कचरा

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मुनाफाखोरी में कोई कसर न छोड़ने वाले निजी अस्पताल अपने कर्तव्यों के पालन में कितने बेपरवाह हैं, नैनीताल हाईवे पर शनिवार रात अमर उजाला ने इसकी एक बानगी देखी। इस हाईवे को निजी अस्पतालों ने अपना बायो मेडिकल वेस्ट ठिकाने लगाने का अ़ड्डा बना रखा है। बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण और प्रबंधन को लेकर सरकार के काफी सख्ती दिखाने के बावजूद रात के अंधेरे में गुपचुप ढंग से इस हाईवे के किनारे मेडिकल कचरा फेंक दिया जाता है। 
शहर में कई अस्पतालों का मेडिकल वेस्ट एक एजेंसी उठाती है, लेकिन कई अस्पताल ऐसे हैं जिन्होंने इस एजेंसी में अपना रजिस्ट्रेशन नहीं करा रखा है। नैनीताल हाईवे किनारे अपना कचरा फेंकने वाले ज्यादातर यही अस्पताल हैं। निजी अस्पतालों की यह करतूत स्वास्थ्य विभाग की सजगता की भी पोल खोल रही है। लोगों का कहना है कि नैनीताल रोड पर इधर-उधर मेडिकल कचरा फेंके जाने की कई बार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से शिकायतें की गई हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई होना तो दूर, कोई अधिकारी मौके का निरीक्षण तक करने नहीं आया। 
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स्थानीय लोगाें ने बताया कि रोजाना रात में रिक्शे में अस्पतालों के कर्मचारी अपने कूड़ेदान लादकर लाते हैं और कूड़ा फेंककर निकल जाते हैं। दिन में काफी सिरिंज, ग्लूकोज की बोतलें, आईवी सेट और ग्लब्स यहां पड़े मिलते हैं। इसी तरह मिनी बाईपास पर भी रोड के किनारे जंगल में मेडिकल वेस्ट फेंका जा रहा है। 
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60 अस्पतालाें को जारी हो चुका है नोटिस 
सीएमओ कार्यालय से पंजीकृत करीब 292 अस्पतालों में 60 अस्पतालाें को अभी तक मेडिकल वेस्ट निस्तारण के लिए प्रबंध न करने पर नोटिस जारी किया जा चुका है। इनको एक सप्ताह की मोहलत दी गई थी कि वे अपना पंजीकरण मेडिकल वेस्ट निस्तारण एजेंसी से कराएं। 31 अक्तूबर तक का समय सभी अस्पतालाें को दिया गया है इसके बाद कार्रवाई होगी। 


अस्पताल बंद करने का प्रावधान 
नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि अगर किसी अस्पताल का पंजीकरण मेडिकल वेस्ट निस्तारण एजेंसी में नहीं होता है तो उनका अस्पताल बंद करने का प्रावधान है। हालांकि एक नोटिस देकर चेतावनी दी जा रही है। 

कोट 
मेडिकल वेस्ट को सड़क पर खुलेआम फेंकना गलत है। अगर कोई भी अस्पताल यह कर रहा है तो उसके खिलाफ निश्चित कार्रवाई की जाएगी। 
डॉ. अशोक कुमार, एसीएमओ 
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