फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Medha received the honour, experts gave the mantra of success

Bareilly News: मेधा को मिला सम्मान, विशेषज्ञों ने दिए सफलता के मंत्र

Sat, 23 May 2026 03:15 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 23 May 2026 03:15 AM IST
विज्ञापन
Medha received the honour, experts gave the mantra of success
बरेली। विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने और सही कॅरिअर मार्गदर्शन के उद्देश्य से शुक्रवार को जीआईसी ऑडिटोरियम में अमर उजाला भविष्य ज्योति सम्मान समारोह का आयोजन हुआ। पदक पाकर सुनहरे हुए चेहरे मेधावियों के संघर्ष को बयां कर रहे थे। अफसरों ने अपने अनुभव से सफलता का मंत्र दिया।
विज्ञापन

पहले सत्र में एसपी सिटी मानुष पारीक, संयुक्त निदेशक माध्यमिक राकेश कुमार, डीआईओएस डॉ. अजीत कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट राजेश वर्मा, दूसरे सत्र में डीआईजी अजय कुमार साहनी, सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह, तीसरे सत्र में सीडीओ देवयानी, डीडीओ दिनेश कुमार, पीडी डीआरडीए चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव, विद्युत निगम के मुख्य अभियंता, मंडलीय क्रीड़ा सचिव नईम अहमद ने क्रमवार यूपी बोर्ड के 10वीं, 12वीं के मेधावियों को पदक और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। शाम पांच बजे तक सभागार तालियों से गूंजता रहा।
विज्ञापन


फोन से ऑटिज्म का खतरा, पोस्ट
पर लाइक, कमेंट से बचें विद्यार्थी
एसपी सिटी मानुष पारीक ने विद्यार्थियों को जरूरत पर ही फोन के इस्तेमाल का सुझाव दिया। कहा कि एक व्यक्ति ने 15 साल के बेटे को मोबाइल फोन की लत से छुटकारा दिलाने का अनुरोध किया। उसका स्क्रीन टाइम 11 घंटे मिला। पांच साल तक के बच्चों को फोन नहीं देना चाहिए। इससे ऑटिज्म की आशंका बढ़ती है। एकाग्रता प्रभावित होती है। स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। बच्चों को सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए। मेधावी लाइक और कमेंट के फेर में न पड़ें।
विज्ञापन
विज्ञापन


समपर्ण, अनुशासन, मार्गदर्शन से संवरेगा भविष्य
सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने कहा कि प्रतिस्पर्धी दौर में केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि लक्ष्य के प्रति समर्पण, अनुशासन और सही मार्गदर्शन भी सफलता के लिए जरूरी है। छात्रों के लिए समय प्रबंधन और आत्मविश्वास के साथ ही तकनीक का बेहतर उपयोग भी जरूरी है। उन्होंने डॉक्टर बनने के लिए 10वीं पास होने के बाद 12वीं में जीव विज्ञान वर्ग से नीट की तैयारी का सुझाव दिया। कहा, ग्रेजुएशन के बाद विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षा पास कर अफसर बन सकते हैं, लेकिन डॉक्टर बनने के लिए न्यूनतम पांच वर्ष अथक परिश्रम करना होता है।
लक्ष्य तय करें विद्यार्थी और निरंतरता बनाए रखें
संयुक्त निदेशक (माध्यमिक शिक्षा) राकेश कुमार ने कहा कि सबसे पहले विद्यार्थियों को लक्ष्य तय करना चाहिए। बिना लक्ष्य के मेहनत अक्सर भटकाव में बदल जाती है। जिस क्षेत्र में रुचि हो, उसी के अनुसार तैयारी शुरू करें। रोजाना पढ़ाई और कौशल विकास के लिए निश्चित समय दें। सोशल मीडिया और अनावश्यक गतिविधियों से बचें। छोटे लक्ष्य बनाएं और पूरा करें। निरंतर अभ्यास और अनुशासन से ही सफलता मिलती है।
सिर्फ डिग्री मलिना काफी नहीं, कौशल विकास चाहिए
डीआईओएस डॉ. अजित कुमार ने कहा कि वर्तमान में सिर्फ डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं, विद्यार्थियों को संचार कौशल, कंप्यूटर ज्ञान, भाषा दक्षता और नेतृत्व क्षमता में कुशल होना चाहिए। कंपनियां भी ऐसे युवाओं को प्राथमिकता देती हैं जो टीम में काम करे और समस्या का समाधान निकाल सके। इंटर्नशिप, वर्कशॉप, ऑनलाइन कोर्स से नई तकनीकों और विषयों को सीखते रहना चाहिए। अपडेट रहना भी सफलता का मंत्र है।


समय प्रबंधन के बिना भटकाव की रहती है गुंजाइश
सिटी मजिस्ट्रेट राजेश वर्मा ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए समय प्रबंधन चाहिए। विद्यार्थियों को पढ़ाई, आराम समेत अन्य गतिविधियों में संतुलन बनाना चाहिए। टाइम टेबल के अनुसार तैयारी करें। कठिन विषयों को ज्यादा समय दें और रिवीजन करते रहें। इंटरनेट का उपयोग जरूरत के अनुसार करें। पर्याप्त नींद और स्वस्थ दिनचर्या भी क्षमता बढ़ाती है। ऐसी स्थिति में कम संसाधनों में बेहतर परिणाम मिलेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed