'आजम खां का प्रभाव खत्म': मौलाना रजवी बोले- सपा के बंधुआ मजदूर नहीं हैं मुसलमान; अखिलेश यादव पर साधा निशाना
बरेली के मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि मुसलमानों पर अब आजम खां का प्रभाव खत्म हो गया है। उन्होंने अखिलेश यादव के रामपुर दौरे पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुसलमान सपा के बंधुआ मजदूर नहीं हैं। मुसलमान अब बराबरी की हिस्सेदारी चाहते हैं।
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ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव की रामपुर यात्रा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले मुसलमानों को रिझाने के लिए आजम खां से मिलने रामपुर जेल जा रहे हैं। मौलाना बरेलवी ने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव ने मुसलमानों के बीच सपा के प्रति बढ़ती हुई नाराजगी को दूर करने के लिए ये कदम उठाया है, मगर रामपुर की आवाम कह रही है कि बहुत देर कर दी मेहरबां आते आते।
मौलाना बरेलवी कई महीनों से अखिलेश यादव पर मुस्लिम मुद्दों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। इनमें मुख्यमंत्री के लिए मुस्लिम चेहरे की मांग और 150 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देने की मांग शामिल थी। उन्होंने आजम खां से जेल में न मिलने पर भी जोरदार आपत्ति जताई थी। मौलाना ने कहा कि अखिलेश यादव उनके दबाव में आज़म खां से मिलने को मजबूर हुए हैं।
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मौलाना बोले- आजम खां का प्रभाव खत्म
मौलाना रजवी ने बताया कि अखिलेश ने रामपुर जेल में 370 दिन बीत चुके होने के बावजूद उनसे मिलने की कोशिश नहीं की। इसी तरह सीतापुर जेल में चार साल से अधिक समय बिताने पर भी वे मिलने नहीं गए। मौलाना बरेलवी के अनुसार, अखिलेश यादव को गलतफहमी है कि आजम खां से मिलने पर सारा मुसलमान सपा को एकतरफा वोट देगा लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। मौलाना ने कहा कि आज़म खां लंबे समय से जेल में हैं, जिससे मुस्लिम समाज में उनका प्रभाव खत्म हो गया है। मौलाना बरेलवी ने इसके कई उदाहरण दिए।
सपा को दी चेतावनी
मौलाना रजवी ने आगे कहा कि 10-15 साल भाजपा में रहने के बाद उन नेताओं को समाजवादी पार्टी में शामिल करके अखिलेश यादव की वाशिंग मशीन मे धुलने का काम किया जा रहा है, फिर उसी भाजपाई व्यक्ति को सपा टिकट दे देगी और मुसलमानों से वोट देने के लिए कहा जाएगा। इसका उदाहरण आंवला और बिथरी चैनपुर है। उन्होंने चेतावनी दी कि मुसलमान अब समाजवादी पार्टी के बंधुआ मजदूर या गुलाम नहीं हैं। उत्तर प्रदेश का मुसलमान अब बराबर की हिस्सेदारी चाहता है, अन्यथा 2027 के चुनाव में सपा को बड़ा नुकसान होगा।