UP: मौलाना शहाबुद्दीन बोले, होली के दिन तीन-चार घंटे सड़कों पर न निकलें मुसलमान; हिंदुओं से भी की ये अपील
Maulana Shahabuddin Razvi News: इस बार होली के दिन ही जुमा पड़ रहा है। इसको देखते हुए ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने प्रदेश के इमामों से अपील की है। उन्होंने कहा कि होली के दिन जुमे की नमाज़ का वक्त 2:30 बजे रखें।
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ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने पूरे प्रदेश की मस्जिदों के इमामों और मुतवल्लियों से अपील करते हुए कहा कि होली के दिन ही जुमा है। जुमे की नमाजे विभिन्न मस्जिदों में अलग-अलग समय पर होती है। वो इलाके जहां पर मिली-जुली आबादी है, उन इलाकों की मस्जिदों में जुमे की नमाज का समय 2:30 बजे रख लें। वो इलाके जो मुस्लिम बहुल है, वहां मस्जिदों का समय बदलने की जरूरत नहीं। हर शहर के उलमा और इमाम इन बातों पर खासतौर पर ध्यान दें।
मौलाना ने दोनों समुदाय से की ये अपील
शहाबुद्दीन रजवी ने अपील करते हुए कहा कि होली वाले दिन मुसलमान सिर्फ तीन-चार घंटे सड़कों व गलियों पर न निकलें। अगर कहीं जरूरी काम से जाना भी है तो उसमें बहुत एहतियात बरतें। अगर कोई बच्चा या न समझ व्यक्ति रंग डाल देता है तो उससे उलझनें की जरूरत नहीं है। घर जाएं पानी से धो डालें। इस तरह के रंगों के पानी से कपड़ा नापाक नहीं होता है। हिंदू भाइयों से भी मौलाना ने अपील करते हुए कहा कि कोई भी रोजादार मुसलमान या हिजाब पहनी हुई महिला पर रंग न डालें। अपने बच्चों को भी इसी तरह समझाएं। रमजान शरीफ का सम्मान करें।
एक-दूसरे के त्योहारों का सम्मान करें- मौलाना
मौलाना ने आगे कहा कि आला हजरत ने अपनी किताब में लिखा है कि कानून को किसी भी सूरत में अपने हाथ में न लें। अगर कोई बात हो जाती है तो फौरन उसकी शिकायत अधिकारियों से करें या अपने बड़ों को जानकारी दें। खुद कानून को हाथ में लेकर निर्णय लेने की कोशिश न करें। मौलाना ने सभी देशवासियों से गुजारिश करते हुए कहा कि दोनों संप्रदाय के लोग एक दूसरे के त्योहारों का सम्मान करें। अमन व शांति बनाए रखें। जो शरारतीतत्व हिंदू-मुस्लिम भाईचारे को बिगाड़ना चाहते हैं, उनसे होशियार रहें।
सब्र के साथ गुजारें रमजान का महीना
शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि रमजान का महीना सब्र करने की हिदायत देता है। कुरान कहता है कि खुदा सब्र करने वालों के साथ है। पैंगबर-ए-इस्लाम ने हदीस में फरमाया अच्छा मुसलमान वो है, जिसके हाथ से, पैर से, जुबान से किसी इंसान को कोई तकलीफ न पहुंचे। इसलिए रमज़ान के मुक़द्दस महीने को सब्र के साथ गुजारें।