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Bareilly News: पाम ऑयल पर फिसला बाजार का मुनाफा, महंगाई बनकर रसोई में गिरा
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बरेली। इंडोनेशिया, मलयेशिया पाम ऑयल के बड़े निर्यातक हैं। वहां निर्यात शुल्क में 30 फीसदी वृद्धि की वजह से यह महंगा हो गया है। शनिवार को शहर में यह प्रति टिन 60 रुपये महंगा बिका। इससे बाजार का मुनाफा प्रभावित होने लगा है। साथ ही, महंगाई की आंच से रसोई भी सुलग उठी है। साबुन की कीमतों में भी 30 फीसदी तक उछाल आया है। अगले हफ्ते इनके दामों में और तेजी आ सकती है।
परसाखेड़ा स्थित फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) के निर्माता केके चंदानी के मुताबिक इंडोनेशिया और मलयेशिया पाम ऑयल के बड़े निर्यातक हैं। वहां निर्यात शुल्क 30 फीसदी तक बढ़ाए जाने का सीधा असर यहां के बाजार पर पड़ा है। मुनाफा घटता देख कारोबारियों ने उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी शुरू कर दी है। लिहाजा, अब जो उत्पाद तैयार हो रहे हैं, वह महंगे बिक रहे हैं।
आम आदमी की रसोई तक भी महंगाई की आंच पहुंचने लगी है, क्योंकि क्रूड पाम ऑयल का इस्तेमाल रिफाइंड ऑयल के तौर पर भी होता है। फैक्टरी में पैकेज्ड फूड बनाने में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। बरेली में रोज 5,62,500 लीटर पाम ऑयल की खपत का अनुमान है। खाद्य तेलों में सबसे सस्ता होने की वजह से लोग पाम ऑयल के इस्तेमाल को तरजीह देते हैं, लेकिन अब उनको महंगाई से दो-चार होना पड़ रहा है।
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कच्चे माल के दाम से तय होती है उत्पाद की कीमत
परसाखेड़ा स्थित साबुन फैक्टरी के संचालक तेजेंद्र के मुताबिक किसी भी ब्रांड का साबुन हो, उसमें 70 फीसदी टोटल फैटी मैटर (टीएफएम) यानी पाम ऑयल का प्रयोग होता है। जिस साबुन में जितना ज्यादा टीएफएम होगा, वह त्वचा के लिए उतना ही बेहतर रहेगा। गुणवत्ता के लिहाज से पाम ऑयल की मात्रा कम नहीं कर सकते, इसलिए कारोबारियों ने रिटेल में साबुन की कीमत बढ़ा दी है। कुछ कारोबारी वैल्यू पैक के वजन को कम कर महंगाई से संतुलन साध रहे हैं।
नेपाली तेल की बढ़ी मांग
कारोबारियों के मुताबिक पाम ऑयल की महंगाई की वजह से अब ज्यादातर खाद्य पदार्थ निर्माता नेपाली तेल का इस्तेमाल करने लगे हैं। इसमें सोयाबीन और सनफ्लॉवर ऑयल शामिल हैं। सरकार की ओर से टैक्स फ्री होने की वजह से इनके दाम भी पाम ऑयल के बराबर ही हैं। इस वजह से इनकी खपत बढ़ गई है। हालांकि, अब सोयाबीन, सनफ्लाॅवर तेल भी महंगा होने का अंदेशा है।
आपूर्ति थमी, मांग भी घटी
श्यामगंज व्यापार मंडल के अध्यक्ष व तेल के थोक कारोबारी गिरीश अग्रवाल के मुताबिक कीमतें बढ़ने की वजह से सप्ताहभर से बाजार में पाम ऑयल की आपूर्ति नहीं हुई है। जानकारी मिली है कि बंदरगाह पर माल पड़ा है। अगले हफ्ते तक अगर आपूर्ति न हुई तो दाम में उछाल की संभावना है। हालांकि, सरसों तेल की कीमत स्थिर है। प्रति टिन 23 सौ रुपये की दर से बिक रहा है। अजीत प्रताप सिंह
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परसाखेड़ा स्थित फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) के निर्माता केके चंदानी के मुताबिक इंडोनेशिया और मलयेशिया पाम ऑयल के बड़े निर्यातक हैं। वहां निर्यात शुल्क 30 फीसदी तक बढ़ाए जाने का सीधा असर यहां के बाजार पर पड़ा है। मुनाफा घटता देख कारोबारियों ने उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी शुरू कर दी है। लिहाजा, अब जो उत्पाद तैयार हो रहे हैं, वह महंगे बिक रहे हैं।
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आम आदमी की रसोई तक भी महंगाई की आंच पहुंचने लगी है, क्योंकि क्रूड पाम ऑयल का इस्तेमाल रिफाइंड ऑयल के तौर पर भी होता है। फैक्टरी में पैकेज्ड फूड बनाने में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। बरेली में रोज 5,62,500 लीटर पाम ऑयल की खपत का अनुमान है। खाद्य तेलों में सबसे सस्ता होने की वजह से लोग पाम ऑयल के इस्तेमाल को तरजीह देते हैं, लेकिन अब उनको महंगाई से दो-चार होना पड़ रहा है।
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कच्चे माल के दाम से तय होती है उत्पाद की कीमत
परसाखेड़ा स्थित साबुन फैक्टरी के संचालक तेजेंद्र के मुताबिक किसी भी ब्रांड का साबुन हो, उसमें 70 फीसदी टोटल फैटी मैटर (टीएफएम) यानी पाम ऑयल का प्रयोग होता है। जिस साबुन में जितना ज्यादा टीएफएम होगा, वह त्वचा के लिए उतना ही बेहतर रहेगा। गुणवत्ता के लिहाज से पाम ऑयल की मात्रा कम नहीं कर सकते, इसलिए कारोबारियों ने रिटेल में साबुन की कीमत बढ़ा दी है। कुछ कारोबारी वैल्यू पैक के वजन को कम कर महंगाई से संतुलन साध रहे हैं।
नेपाली तेल की बढ़ी मांग
कारोबारियों के मुताबिक पाम ऑयल की महंगाई की वजह से अब ज्यादातर खाद्य पदार्थ निर्माता नेपाली तेल का इस्तेमाल करने लगे हैं। इसमें सोयाबीन और सनफ्लॉवर ऑयल शामिल हैं। सरकार की ओर से टैक्स फ्री होने की वजह से इनके दाम भी पाम ऑयल के बराबर ही हैं। इस वजह से इनकी खपत बढ़ गई है। हालांकि, अब सोयाबीन, सनफ्लाॅवर तेल भी महंगा होने का अंदेशा है।
आपूर्ति थमी, मांग भी घटी
श्यामगंज व्यापार मंडल के अध्यक्ष व तेल के थोक कारोबारी गिरीश अग्रवाल के मुताबिक कीमतें बढ़ने की वजह से सप्ताहभर से बाजार में पाम ऑयल की आपूर्ति नहीं हुई है। जानकारी मिली है कि बंदरगाह पर माल पड़ा है। अगले हफ्ते तक अगर आपूर्ति न हुई तो दाम में उछाल की संभावना है। हालांकि, सरसों तेल की कीमत स्थिर है। प्रति टिन 23 सौ रुपये की दर से बिक रहा है। अजीत प्रताप सिंह