महात्मा गांधी ने 1920 में बरेली आकर जहां सभा की.. वह जुबली पार्क गायब
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अगर आप स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रताप चंद्र आजाद की किताब ‘जैसा मैंने देखा’ पढ़ेंगे तो पता चलेगा कि 1920 में जब आजादी की जंग धीरे-धीरे निर्णायक रुख ले रही थी, तब असहयोग आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी बरेली आए थे। यहां उनकी सभा जुबली पार्क में हुई थी जिसका विस्तार उस समय करीब 75 बीघा क्षेत्रफल में था। इस जुबली पार्क का वजूद अब सिर्फ कागजों में रह गया है। हाल ही में इस जुबली पार्क की तलाश तो शुरू हुई है लेकिन जहां जुबली पार्क होना चाहिए था, वहां सरकारी-गैर सरकारी इमारतों के अलावा कुछ भी नहीं दिख रहा।
जुबली पार्क के बारे में शायद ज्यादातर लोगों को पता न हो इसलिए बता दें कि यह पार्क शहर के बीचोबीच उस इलाके में था जिसे सिविल लाइंस कहा जाता है। पांच हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्रफल में बने जुबली पार्क का अब नामोनिशान मिट चुका है। पार्क की सीमाओं में घिरी जमीन का लैंड यूज बदले बगैर ही उस पर संजय कम्युनिटी हॉल, एलन क्लब, फायर ब्रिगेड और मेयर आवास समेत न जाने कितनी सरकारी इमारतों का निर्माण हो गया।
इन्हीं सरकारी इमारतों के बीच कई निजी इमारतें भी हैं जो पुराने दस्तावेजों के आधार पर यह सवाल खड़ा करती हैं कि वे जायज हैं या नाजायज। हाल ही में प्रशासन ने जांच शुरू कराई तो पता चला कि जुबली पार्क का पूरा नक्शा ही बदल चुका है। पार्क का कहीं अता-पता ही नहीं है।
कमिश्नर रणवीर प्रसाद के निर्देश पर नजूल भूमि पर बने जुबली पार्क की कलक्ट्रेट में दबी फाइल को तो निकाल लिया गया। इस रिकार्ड में जुबली पार्क के नाम से पांच हेक्टेयर भूमि दर्ज है। कमिश्नर ने खेवट देखने के बाद एसडीएम सदर ईशान प्रताप सिंह से इस बारे में रिपोर्ट मांगी थी।
तहसील प्रशासन की प्रारंभिक जांच में पता चला कि सरकारी रिकार्ड में जुबली पार्क के नाम से गाटा नंबर 81 पर 3.743 हेक्टयर भूमि दर्ज है लेकिन मौके पर संजय कम्प्युनिटी हॉल, एलन क्लब, अग्निशमन विभाग के दफ्तर के साथ मेयर आवास, नगर निगम के सामने रोड के दूसरी ओर दुकानें, सीतापुर नेत्र चिकित्सालय के पीछे के हिस्से में दुकानें और दूसरे निर्माण हैं। गाटा नंबर 82 पर 0.923 हेक्टेयर भूमि है। हालांकि संजय कम्प्युनिटी हाल के पास पुरानी तालाब अब भी है लेकिन मौके पर इसका कितना क्षेत्रफल है, यह साफ नहीं हो सका है।
राजस्व टीम बताएगी मौके पर क्या जायज क्या नाजायज
जुबली पार्क की जमीन की पैमाइश के लिए एसडीएम सदर ने राजस्व निरीक्षण और लेखपालों की चार सदस्यीय टीम गठित कर उससे रिकार्ड के अनुसार पार्क का रकबा और अवैध निर्माण को चिह्नित करने की रिपोर्ट मांगी है। टीम में राजस्व निरीक्षक राधेश्याम व भूदेव और लेखपाल नेत्रपाल व प्रेमपाल को शामिल किया गया है। यह टीम इसी हफ्ते मौके पर पहुंचकर जुबली पार्क के क्षेत्रफल की नापजोख करते हुए यह बताएगी कि अब वहां क्या बना है। इसमें कितना अवैध अतिक्रमण है।
बचपन में जुबली पार्क में टहलते थे हम: रिटायर्ड कर्मी
सिंचाई विभाग के एक 70 वर्षीय रिटायरकर्मी के तहसील पहुंचने पर वहां एसडीएम ईशान प्रताप सिंह ने उनसे जुुबली पार्क के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि वह कभी जुबली पार्क में टहलने जाया करते थे, लेकिन समय के साथ इस जगह का पूरा हुलिया ही बदलता चला गया।
जुबली पार्क की जमीन पर कई सरकारी भवन बने हैं। हालांकि पार्क की जमीन पर ये निर्माण क्यों हुए हैं, इस पर कहना अभी मुमकिन नहीं है। वहां कितना अवैध कब्जा है, इसकी पैमाइश के लिए टीम गठित कर दी है। -ईशान प्रताप सिंह, एसडीएम सदर