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हैंडपंपों से पानी निकल रहा या स्लो प्वाइजन
ब्ययूराो, अमर उजाला।
Updated Tue, 31 May 2016 12:43 AM IST
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सरकारी हैंडपंपों से पीने का साफ पानी निकल रहा या फिर स्लो प्वाइजन। ये किसी को नहीं पता क्योंकि जलनिगम ने पिछले तीन साल से न तो नए और न ही पुराने हैंडपंपों से पानी के नमूने लिए। न ही लैब से पानी के नमूनों की जांच कराई गई। नवाबगंज से 10 हैंडपंपों के पानी के नमूनों की आखिरी बार जांच 2014 में हुई थी। प्रशासन ने भी कभी जलनिगम से पानी के नमूनों की जांच रिपोर्ट नहीं मांगी।
नए हैंडपंप या रिबोर कराए गए हैंडपंपों के पानी के नमूनों की जांच लैब में तुरंत जरूरी है। इसके बाद जरूरत पड़ने पर प्रत्येक छह माह में पानी के नमूनों की जांच लैब में कराए जाने का प्रावधान है। ग्रामीण क्षेत्रों में लगे हैंडपंपों से पानी के नमूने लाकर लैब में उनकी जांच कराने की जिम्मेदारी जेई की है। तीन साल से जलनिगम का कोई भी जेई न तो कहीं से पानी के नमूने लाया और न ही उनकी लैब में जांच कराई। लैब तकनीशियन राजाराम की ओर से इस बारे में अधिशासी अभियंताओं से लगातार पत्र लिखकर अवगत कराया जाता रहा कि पानी के नमूनों की जांच नहीं हो रही। फिर भी किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया। नवाबगंज में पूर्व मंत्री भगवतसरन गंगवार के दबाव में वर्ष 2014 में जलनिगम ने अहमदाबाद, देवनापुर, डंडिया, कचनरा, जमुनियां आदि गांवों से नौ पानी के नमूने लेकर जांच कराई थी। इसमें आर्सेनिक निर्धारित मात्रा 0.01 मिलीग्राम प्रति लीटर से दो गुना पाया गया था। 14 ब्लाकों में 2013 से पहले से पानी के नमूनों की जांच नहीं हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में जलनिगम के 37 हजार से ज्यादा हैंडपंप लगे हैं। इनमें पांच हजार से ज्यादा खराब चल रहे हैं।
प्रधानों ने घर में रख ली किट
दो साल पहले प्रधानों को गांव में ही हैंडपंप के पानी की जांच करने के लिए ब्लाकों में दो दिवसीय प्रशिक्षण के बाद एक-एक किट भी दी गई थी। पंचायत चुनाव से पहले किसी भी प्रधान ने पानी के नमूनोें की जांच के बारे में सूचना नहीं दी। पिछले साल पंचायत चुनाव में नए गए प्रधानों में से भी किसी ने अब तक हैंडपंप से पानी के नमूनों की जांच नहीं की। न ही जलनिगम को इस बारे में जानकारी दी गई।
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कोट
मेरी पोस्टिंग तीन महीने पहले ही हुई है। चार ब्लाकों में 17 स्थानों से पानी के नमूने लेकर हाल ही में जांच कराई गई है। इसमें आर्सेनिक की मात्रा ज्यादा पाई गई। बाकी ब्लाकों में जेई और अन्य स्टाफ को भेजकर पानी के नमूने मंगाकर उनकी जांच कराई जाएगी।
-संजय कुमार, एक्सईएन, जलनिगम
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नए हैंडपंप या रिबोर कराए गए हैंडपंपों के पानी के नमूनों की जांच लैब में तुरंत जरूरी है। इसके बाद जरूरत पड़ने पर प्रत्येक छह माह में पानी के नमूनों की जांच लैब में कराए जाने का प्रावधान है। ग्रामीण क्षेत्रों में लगे हैंडपंपों से पानी के नमूने लाकर लैब में उनकी जांच कराने की जिम्मेदारी जेई की है। तीन साल से जलनिगम का कोई भी जेई न तो कहीं से पानी के नमूने लाया और न ही उनकी लैब में जांच कराई। लैब तकनीशियन राजाराम की ओर से इस बारे में अधिशासी अभियंताओं से लगातार पत्र लिखकर अवगत कराया जाता रहा कि पानी के नमूनों की जांच नहीं हो रही। फिर भी किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया। नवाबगंज में पूर्व मंत्री भगवतसरन गंगवार के दबाव में वर्ष 2014 में जलनिगम ने अहमदाबाद, देवनापुर, डंडिया, कचनरा, जमुनियां आदि गांवों से नौ पानी के नमूने लेकर जांच कराई थी। इसमें आर्सेनिक निर्धारित मात्रा 0.01 मिलीग्राम प्रति लीटर से दो गुना पाया गया था। 14 ब्लाकों में 2013 से पहले से पानी के नमूनों की जांच नहीं हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में जलनिगम के 37 हजार से ज्यादा हैंडपंप लगे हैं। इनमें पांच हजार से ज्यादा खराब चल रहे हैं।
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प्रधानों ने घर में रख ली किट
दो साल पहले प्रधानों को गांव में ही हैंडपंप के पानी की जांच करने के लिए ब्लाकों में दो दिवसीय प्रशिक्षण के बाद एक-एक किट भी दी गई थी। पंचायत चुनाव से पहले किसी भी प्रधान ने पानी के नमूनोें की जांच के बारे में सूचना नहीं दी। पिछले साल पंचायत चुनाव में नए गए प्रधानों में से भी किसी ने अब तक हैंडपंप से पानी के नमूनों की जांच नहीं की। न ही जलनिगम को इस बारे में जानकारी दी गई।
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मेरी पोस्टिंग तीन महीने पहले ही हुई है। चार ब्लाकों में 17 स्थानों से पानी के नमूने लेकर हाल ही में जांच कराई गई है। इसमें आर्सेनिक की मात्रा ज्यादा पाई गई। बाकी ब्लाकों में जेई और अन्य स्टाफ को भेजकर पानी के नमूने मंगाकर उनकी जांच कराई जाएगी।
-संजय कुमार, एक्सईएन, जलनिगम