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लीलौर झील की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सिंचाई मंत्री को सौंपी
बरेली।
Updated Wed, 24 May 2017 12:51 AM IST
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जब दो वरिष्ठ चीफ इंजीनियरों ने मौके पर जांच शुरू की तब पता चला कि ऐतिहासिक लीलौर झील खुदाई नाम पर सिंचाई विभाग ने 838.19 लाख रुपये खर्च मिट्टी में मिला दिए। ज्यादातर काम कागजों पर हुआ और भुगतान भी हो गया। बहरहाल दोनों वरिष्ठों ने अपनी प्रारंभिक जांच आख्या से सिंचाई मंत्री धर्मपाल को अवगत करा दिया है। उधर, इसमें लिप्त इससे अफसर लीपापोती कराने का प्रयास करने में जुटे हैं।
सिंचाई विभाग ने अपने दो दर्जन से ज्यादा चहेतों को खुश करने के लिए झीलौर झील खुदाई टेंडर कार्य मैन्युअल तरीके से दिया। बदायूं, एटा, फिरोजाबाद, लखनऊ, पीलीभीत, बरेली, अल्मोड़ा, बाराबंकी, रुद्रपुर, बुलंदशहर आदि स्थानों से लोग बुलाए गए और उन्हें मैन्युअल टेंडर थमा दिए। सिंचाई विभाग में ऊपर से मिले निर्देशानुसार टेंडर सार्वजनिक नहीं किए, इस पर तमाम लोगों ने हंगामा भी किया था, इसके बावजूद विभाग ने अपने लोगों को ही काम दिया। जब सरकार बदली तक सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने सिंचाई विभाग में घपलों की जांच कराने की घोषणा कर दी। इससे विभाग में खलबली मच गयी। लीलौर झील उनका ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता है, इसलिए जांच भी उच्चस्तरीय शुरू हुई। दो चीफ इंजीनियर जांच समिति नामित किए गए।
रविवार में सीएम योगी समीक्षा करने पहुंच रहे थे, इसलिए चीफ इंजीनियर अजय कुमार सिंह और सहयोगी शुक्रवार में ही मौके पर जांच करने पहुंच गए। लंबे अवकाश पर चल रहे प्रोजेक्ट प्रमुख अधिशासी अभियंता आरबी यादव भी तलब किए गए थे। दोनों अफसरों ने जब अनापशनाप हुए कार्यों को देखा तो यादव पर बरसे। इसके बाद चीफ इंजीनियर ने सिंचाई मंत्री से मुलाकात कर स्थिति से अवगत कराया। अफसरों ने बताया कि मौके पर कागजी खानापूर्ति हुई है प्रोजेक्ट के नाम पर अपनोें को खुश किया गया है। बताया जाता है कि मंत्री ने इसे गंभीरता से लेते हुए प्रभावी कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
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सिंचाई विभाग ने अपने दो दर्जन से ज्यादा चहेतों को खुश करने के लिए झीलौर झील खुदाई टेंडर कार्य मैन्युअल तरीके से दिया। बदायूं, एटा, फिरोजाबाद, लखनऊ, पीलीभीत, बरेली, अल्मोड़ा, बाराबंकी, रुद्रपुर, बुलंदशहर आदि स्थानों से लोग बुलाए गए और उन्हें मैन्युअल टेंडर थमा दिए। सिंचाई विभाग में ऊपर से मिले निर्देशानुसार टेंडर सार्वजनिक नहीं किए, इस पर तमाम लोगों ने हंगामा भी किया था, इसके बावजूद विभाग ने अपने लोगों को ही काम दिया। जब सरकार बदली तक सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने सिंचाई विभाग में घपलों की जांच कराने की घोषणा कर दी। इससे विभाग में खलबली मच गयी। लीलौर झील उनका ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता है, इसलिए जांच भी उच्चस्तरीय शुरू हुई। दो चीफ इंजीनियर जांच समिति नामित किए गए।
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रविवार में सीएम योगी समीक्षा करने पहुंच रहे थे, इसलिए चीफ इंजीनियर अजय कुमार सिंह और सहयोगी शुक्रवार में ही मौके पर जांच करने पहुंच गए। लंबे अवकाश पर चल रहे प्रोजेक्ट प्रमुख अधिशासी अभियंता आरबी यादव भी तलब किए गए थे। दोनों अफसरों ने जब अनापशनाप हुए कार्यों को देखा तो यादव पर बरसे। इसके बाद चीफ इंजीनियर ने सिंचाई मंत्री से मुलाकात कर स्थिति से अवगत कराया। अफसरों ने बताया कि मौके पर कागजी खानापूर्ति हुई है प्रोजेक्ट के नाम पर अपनोें को खुश किया गया है। बताया जाता है कि मंत्री ने इसे गंभीरता से लेते हुए प्रभावी कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
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