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Bareilly News: रफ्तार ले रही जान, खराब सड़कें भी पहुंचा रहीं श्मशान
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बरेली। अधिकांश हादसों की प्रमुख वजह तेज रफ्तार होती है। दूसरी ओर, हाईवे सहित कई सड़कें ऐसी हैं, जहां आप संभलकर वाहन नहीं चलाएंगे तो दुर्घटना का शिकार हो जाएंगे। दोषपूर्ण इंजीनियरिंग और गड्ढे हादसों की वजह बन रहे हैं, लेकिन अफसर इसे रिकॉर्ड में दर्ज नहीं करते।
जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में भी सिर्फ दावे किए जाते हैं, धरातल पर कोई काम नहीं होता। जिले में रोज नौ लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं। 2022 के शुरुआती दो महीनों के मुकाबले 2023 में हादसों की संख्या भी बढ़ी है।
हादसों का श्रेणीकरण करने के लिए सात बिंदु हैं, इसमें पांच पर शून्य दर्ज है। तेज रफ्तार से हादसे होना स्वीकार किया गया है, लेकिन सड़क के गड्ढों की वजह से होने वाले हादसों को चिह्नित कर दर्ज नहीं किया गया है। सवाल यह है कि जब कारण ही नहीं पता होगा तो उसका निवारण कैसे होगा। 2022 के जनवरी और फरवरी में 116 व इसी अवधि में 2023 में 181 हादसे हुए। जनवरी में हादसों की संख्या में 12.5 तो फरवरी में 140.91 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। यातायात पुलिस के मुताबिक 187 में से 176 हादसे तेज गति के कारण व 11 अन्य वजहों से हुए। इन आकड़ों पर यकीन करें तो सड़कों के गड्ढे, डिवाइडर के अवैध कट, अंधे मोड़, चालक के नशे में होने आदि की वजह से कोई हादसा नहीं हुआ।
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बरेली-पीलीभीत मार्ग पर हादसों का खतरा
बरेली-पीलीभीत मार्ग पर कई स्थानों पर खतरनाक गड्ढे हैं। रिठौरा तक स्थिति काफी खराब है। शहर में सेटेलाइट तिराहे से एअरपोर्ट होते हुए पीलीभीत जाने वाली सड़क में कई स्थानों पर गड्ढे हैं। यह स्थिति तब है जब मंडलायुक्त, जिलाधिकारी सहित विधायक, सांसद, केंद्र व राज्य सरकार के मंत्री तक इस मार्ग से आते-जाते रहते हैं। सड़क को गड्ढामुक्त नहीं किया गया तो आगे भी हादसे हो सकते हैं।
हादसों में वृद्धि की जानकारी दे रहे तुलनात्मक आकड़े
समयावधि मौत घायल
जनवरी व फरवरी 2022 53 84
जनवरी व फरवरी 2023 64 150
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खस्ताहाल सड़कें भी कुछ हादसों की वजह बनती हैं। हादसे का कारण दर्ज करने का काम पुलिस का है। हादसे कम करने के लिए परिवहन विभाग लोगों को जागरूक कर रहा है। सड़कें ठीक कराने के संबंध में पीडब्ल्यूडी काम करा रहा है। शासन स्तर तक फॉलोअप भी हो रहा है। - मनोज सिंह एआरटीओ
हादसों की वजह में हम मुख्य कारण का जिक्र करते हैं। मुख्य कारण तो तेज रफ्तार ही होती है। अगर रफ्तार कम है और गड्ढा आ जाए तो वाहन कंट्रोल हो जाता है और हादसा नहीं होता। - राममोहन सिंह, एसपी ट्रैफिक
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जिले की 33 सड़कों पर गड्ढे ही गड्ढे
एक डीसी-दो टिकट फोटो-
33 सड़कों के 82.73 किलोमीटर हिस्से को गड्ढामुक्त करने के लिए चाहिए 11.30 करोड़
100 गांवों के दो लाख लोग उठाते हैं तकलीफ
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। जिले में लोक निर्माण विभाग की 33 सड़कों पर गड्ढों की भरमार है। एस्टीमेट तैयार किए जाने के बाद भी बजट नहीं मिला। कैंट ब्रांच से बुखारा मार्ग, अभयपुर-कैंट मार्ग से झील गौटिया, बल्ला कोठी-ठिरिया ठाकुरान मार्ग के गड्ढे वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लगा रहे हैं। हादसों का खतरा हैं। सौ से अधिक गांवों के दो लाख लोग आवागमन में तकलीफ उठा रहे हैं।
इन 33 सड़कों के 82.73 किलोमीटर हिस्से को गड्ढामुक्त करने के लिए 11.30 करोड़ रुपये के एस्टीमेट तैयार किए गए। मार्च 2023 में मंजूरी मिली थी, लेकिन टेंडर नहीं हो पाने से कार्य शुरू नहीं हो सका। अब आचार संहिता का ब्रेक लगा है। अधिशासी अभियंता नारायण सिंह ने नए वित्तीय वर्ष में कार्य कराने के लिए बजट मांगा है।
बनते ही उखड़ गई सड़क
कटैया बलदेव से अल्हैया संपर्क मार्ग के एक किलोमीटर हिस्से में गड्ढे ही गड्ढे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क पर 2022 में काम हुआ था, लेकिन एक वर्ष में ही सड़क उखड़ गई। चौखंडी, मरगापुर, अल्हैया, संतोषपुर, सनेकपुर, प्रेमपुर, पंडरी समेत 12 गांवों के 15 हजार से अधिक लोग परेशान हो रहे हैं।
जोखिम भरा सफर कर रहे लोग
सीबीगंज से जोगीठेर मार्ग के पांच किमी हिस्से को गड्ढामुक्त करने के लिए 5.33 लाख रुपये चाहिए। मुख्य अभियंता ने मंजूरी दी, लेकिन काम शुरू नहीं हो सका है। क्षेत्र के पांच हजार से अधिक लोगों को जोखिम भरा सफर करना पड़ता है।
कोट
जब निर्माण हो रहा था तब गुणवत्ता खराब थी। ग्रामीणों ने विरोध किया था, लेकिन सुधार नहीं हुआ। इसलिए सड़क टूट गई। - सुरेंद्र गंगवार, अल्हैया
लोक निर्माण विभाग की सड़कों पर मानक अनुसार काम नहीं हुआ है। इसलिए तय अवधि से पहले सड़कें टूट रही हैं। - भानुप्रताप,अल्हैया
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जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में भी सिर्फ दावे किए जाते हैं, धरातल पर कोई काम नहीं होता। जिले में रोज नौ लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं। 2022 के शुरुआती दो महीनों के मुकाबले 2023 में हादसों की संख्या भी बढ़ी है।
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हादसों का श्रेणीकरण करने के लिए सात बिंदु हैं, इसमें पांच पर शून्य दर्ज है। तेज रफ्तार से हादसे होना स्वीकार किया गया है, लेकिन सड़क के गड्ढों की वजह से होने वाले हादसों को चिह्नित कर दर्ज नहीं किया गया है। सवाल यह है कि जब कारण ही नहीं पता होगा तो उसका निवारण कैसे होगा। 2022 के जनवरी और फरवरी में 116 व इसी अवधि में 2023 में 181 हादसे हुए। जनवरी में हादसों की संख्या में 12.5 तो फरवरी में 140.91 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। यातायात पुलिस के मुताबिक 187 में से 176 हादसे तेज गति के कारण व 11 अन्य वजहों से हुए। इन आकड़ों पर यकीन करें तो सड़कों के गड्ढे, डिवाइडर के अवैध कट, अंधे मोड़, चालक के नशे में होने आदि की वजह से कोई हादसा नहीं हुआ।
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बरेली-पीलीभीत मार्ग पर हादसों का खतरा
बरेली-पीलीभीत मार्ग पर कई स्थानों पर खतरनाक गड्ढे हैं। रिठौरा तक स्थिति काफी खराब है। शहर में सेटेलाइट तिराहे से एअरपोर्ट होते हुए पीलीभीत जाने वाली सड़क में कई स्थानों पर गड्ढे हैं। यह स्थिति तब है जब मंडलायुक्त, जिलाधिकारी सहित विधायक, सांसद, केंद्र व राज्य सरकार के मंत्री तक इस मार्ग से आते-जाते रहते हैं। सड़क को गड्ढामुक्त नहीं किया गया तो आगे भी हादसे हो सकते हैं।
हादसों में वृद्धि की जानकारी दे रहे तुलनात्मक आकड़े
समयावधि मौत घायल
जनवरी व फरवरी 2022 53 84
जनवरी व फरवरी 2023 64 150
खस्ताहाल सड़कें भी कुछ हादसों की वजह बनती हैं। हादसे का कारण दर्ज करने का काम पुलिस का है। हादसे कम करने के लिए परिवहन विभाग लोगों को जागरूक कर रहा है। सड़कें ठीक कराने के संबंध में पीडब्ल्यूडी काम करा रहा है। शासन स्तर तक फॉलोअप भी हो रहा है। - मनोज सिंह एआरटीओ
हादसों की वजह में हम मुख्य कारण का जिक्र करते हैं। मुख्य कारण तो तेज रफ्तार ही होती है। अगर रफ्तार कम है और गड्ढा आ जाए तो वाहन कंट्रोल हो जाता है और हादसा नहीं होता। - राममोहन सिंह, एसपी ट्रैफिक
जिले की 33 सड़कों पर गड्ढे ही गड्ढे
एक डीसी-दो टिकट फोटो-
33 सड़कों के 82.73 किलोमीटर हिस्से को गड्ढामुक्त करने के लिए चाहिए 11.30 करोड़
100 गांवों के दो लाख लोग उठाते हैं तकलीफ
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। जिले में लोक निर्माण विभाग की 33 सड़कों पर गड्ढों की भरमार है। एस्टीमेट तैयार किए जाने के बाद भी बजट नहीं मिला। कैंट ब्रांच से बुखारा मार्ग, अभयपुर-कैंट मार्ग से झील गौटिया, बल्ला कोठी-ठिरिया ठाकुरान मार्ग के गड्ढे वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लगा रहे हैं। हादसों का खतरा हैं। सौ से अधिक गांवों के दो लाख लोग आवागमन में तकलीफ उठा रहे हैं।
इन 33 सड़कों के 82.73 किलोमीटर हिस्से को गड्ढामुक्त करने के लिए 11.30 करोड़ रुपये के एस्टीमेट तैयार किए गए। मार्च 2023 में मंजूरी मिली थी, लेकिन टेंडर नहीं हो पाने से कार्य शुरू नहीं हो सका। अब आचार संहिता का ब्रेक लगा है। अधिशासी अभियंता नारायण सिंह ने नए वित्तीय वर्ष में कार्य कराने के लिए बजट मांगा है।
बनते ही उखड़ गई सड़क
कटैया बलदेव से अल्हैया संपर्क मार्ग के एक किलोमीटर हिस्से में गड्ढे ही गड्ढे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क पर 2022 में काम हुआ था, लेकिन एक वर्ष में ही सड़क उखड़ गई। चौखंडी, मरगापुर, अल्हैया, संतोषपुर, सनेकपुर, प्रेमपुर, पंडरी समेत 12 गांवों के 15 हजार से अधिक लोग परेशान हो रहे हैं।
जोखिम भरा सफर कर रहे लोग
सीबीगंज से जोगीठेर मार्ग के पांच किमी हिस्से को गड्ढामुक्त करने के लिए 5.33 लाख रुपये चाहिए। मुख्य अभियंता ने मंजूरी दी, लेकिन काम शुरू नहीं हो सका है। क्षेत्र के पांच हजार से अधिक लोगों को जोखिम भरा सफर करना पड़ता है।
कोट
जब निर्माण हो रहा था तब गुणवत्ता खराब थी। ग्रामीणों ने विरोध किया था, लेकिन सुधार नहीं हुआ। इसलिए सड़क टूट गई। - सुरेंद्र गंगवार, अल्हैया
लोक निर्माण विभाग की सड़कों पर मानक अनुसार काम नहीं हुआ है। इसलिए तय अवधि से पहले सड़कें टूट रही हैं। - भानुप्रताप,अल्हैया