{"_id":"57f953594f1c1bcd40270b80","slug":"lent-to-her-husband-and-son-and-daughter-for-nothing","type":"story","status":"publish","title_hn":"पति और बेटे के लिए व्रत और बेटी के लिए कुछ नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पति और बेटे के लिए व्रत और बेटी के लिए कुछ नहीं
बरेली, ब्यूरो
Updated Sun, 09 Oct 2016 01:43 AM IST
विज्ञापन
samman
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर प्रदेश सरकार और अमर उजाला की ओर से शनिवार को आईएएम हाल में आयोजित नारी सम्मान समारोह में कला-संस्कृति, शिक्षा, खेल, सामाजिक कार्य, उद्यमिता और बहादुरी के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वालीं छह नारियों का सम्मान किया गया। इस मौके पर वेंक्ताओं ने समाज में महिला, पुरुष समानता और नारी सशक्तिकरण पर जोर देते हुए नारी को समाज में सबल बनाने के लिए कई टिप्स दिए।
मुख्य अतिथि कमिश्नर प्रमांशु कुमार ने कहा कि समाज में महिला और पुरुष समान दर्ज पर लाने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी यह है कि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं आत्मनिर्भर बनें। अपने पैरों पर खड़े होकर आर्थिक रूप से स्वतंत्र हों, तभी वे अपना महत्व साबित कर पाएंगी और समाज में उनके प्रति नजरिए में बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आगे बढ़ाने में पुरुषों की भी भूमिका होनी चाहिए। नारी के महत्व को समझना चाहिए। कहीं न कहीं असमानता के लिए महिला खुद भी जिम्मेदार होती है। वह एक पत्नी के रूप में पति के लिए करवाचौथ का व्रत रखती है और एक मां के रूप में भी बेटे के लिए निर्जला व्रत करती है लेकिन बेटी के लिए ऐसा कोई व्रत रखती हो ऐसा सुना नहीं है। महिलाएं बेटी को भी बेटे के समान महत्व देंगी, तभी पुरुषों में बचपन से ही महिलाओं के प्रति सम्मान का भाव जगा पाएंगी।
समारोह की अध्यक्षता समाजसेविका और उद्यमी शारदा भार्गव ने की। उन्होंने नारी सशक्तिकरण के लिए सामाजिक क्रांति का आह्वान करते हुए कहा कि पुत्र वंश बढ़ाएगा, यह धारणा खत्म होनी चाहिए और बेटा-बेटी के बीच अंतर खत्म करने के लिए जब तक महिलाएं आगे नहीं आएंगी, तब तक कुछ नहीं हो सकता। विशिष्ट अतिथि एसडीएम सदर अपूर्वा दुबे ने महिलाओं की शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि महिलाओं को यह भी तय करना होगा कि उनको परिवार और समाज में किस भूमिका में रहना है। कोई भी राह कठिन नहीं होती। इरादे मजबूत होने चाहिए। नारी यदि आत्मबल जगा ले तो वह समाज को दिशा दे सकती है। पुरुषों का नजरिया भी उसको ही बदलना होगा। बीएसए ऐश्वर्य लक्ष्मी ने कहा कि एक सफल पुरुष के पीछे यदि किसी महिला का हाथ समझा जाता है तो यह भी सच है कि किसी सफल महिला के पीछे किसी न किसी पुरुष का हाथ होता है इसलिए पुरुषों को महिलाओं के लिए प्रेरित करने की जरूरत है। प्रभारी जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. अवनीश यादव ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन डॉ. वंदना शर्मा ने किया। मुख्य अतिथि और अन्य मंचासीन अतिथियों ने कला और संस्कृति के क्षेत्र में टेलीविजन कलाकार हिबा नवाब (बरेली), खेल के क्षेत्र में हाकी खिलाड़ी विमला भारती (पीलीभीत), सामाजिक क्षेत्र में निधि मिश्रा (लखीमपुर खीरी), उद्यमिता के क्षेत्र में आरती राना (लखीमपुर खीरी), बहादुरी के लिए अंजली मिश्रा (बरेली) और शिक्षा के क्षेत्र में आईएएस परीक्षा में 239 वां स्थान पाने वालीं आकृति सागर (बरेली) को शाल और प्रतीक चिन्ह प्रदान करके सम्मानित किया। आकृति सागर की ओर से उनके पिता चंद्रसेन सागर ने सम्मान ग्रहण किया। आकृति इन दिनों आईएएस की ट्रेनिंग पर गई हुई हैं। समारोह में बड़ी संख्या में समाज के विभिन्न क्षेत्रों की महिलाएं, कई विद्यालयों की प्रधानाचार्य, शिक्षिकाएं और छात्राएं मौजूद रहीं।
विज्ञापन
आईएएस अपूर्वा ने दिए कामयाबी के मंत्र
बरेली। नारी सम्मान समारोह के दौरान एसडीएम सदर आईएएस अधिकारी अपूर्वा दुबे ने छात्राओं को कामयाबी के मंत्र भी दिए। उन्होंने कहा कि बेटियों को अपनी इच्छाएं दबानी नहीं चाहिए। अपनी सोच को तवज्जो देनी चाहिए। जब तक लड़कियां आगे नहीं आएंगी, तब तक अपनी पहचान नहीं बना सकतीं। खुद को ही सशक्त बनाना होगा, इसके लिए कोई और आगे नहीं आएगा। अपना रोल तय करिए और अपने लक्ष्य, सम्मान, अधिकार और इच्छाओं के लिए जूझिए।
अपूर्वा ने कहा कि शिक्षा का मतलब सिर्फ किताबी ज्ञान या डिग्री हासिल करने भर तक नहीं होना चाहिए। जरूरी यह है कि लड़कियां भी व्यवहारिक ज्ञान हासिल करें। अगर आपमें हौसला है और कुछ कर दिखाने का जज्बा है तो आप जीत जाएंगी। सफलता के लिए यह मायने नहीं रखना कि आप किस पृष्ठभूमि से निकले हैं या फिर आपकी परिस्थितियां क्या हैं, कामयाबी उनके कदम चूमती है, जिनमें आत्मबल और कुछ कर दिखाने के इरादे होते हैं, इसलिए अपने सपनों को पूरा करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए।
इनका हुआ सम्मान
हिबा नवाब (कला एवं संस्कृति)
स्टार प्लस पर दिखाए जाने वाले सीरियल ‘तेरे शहर में’ अमाया माथुर का रोल निभाने वाली 19 साल की हिबा नवाब बरेली से निकलकर कला के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। आज वह तेजी से उभरतीं टीवी कलाकार और फैशन मॉडल हैं। इन्होेंने 2008 में स्टार वन चैनल पर प्रसारित ‘सस्स...फिर कोई है’ और जीटीवी पर प्रसारित सात फेरे सीरियल में बाल कलाकार के रूप में शुरुआत की थी। इसके बाद सब टीवी पर ‘लो जी हो गई पूजा इस घर की’ सीरियल में बाल कलाकार के रूप में भूमिका निभाने के बाद ‘क्रेजी स्टुपिड इश्क’ सीरियल में अनुष्का का लीड रोल किया। स्टार प्लस पर प्रसारित चर्चित सीरियल ‘यह रिश्ता क्या कहलाता है’ में गेस्ट भूमिका के बाद हिबा ने ‘तेरे शहर में’ और ‘मेरी सासू मां’ सीरियलों में लीड रोल किया है। वह बरेली शहर के बड़ा बाजार में रहने वाले नवाब अली और रूशा नवाब की बेटी हैं। उनको पिछलेसाल स्टार परिवार अवार्ड हासिल हुआ।
आकृति सागर (शिक्षा)
24 साल की बरेली की आकृति सागर ने इस साल सिविल सर्विस की परीक्षा 239 वीं रैंक के साथ उत्तीर्ण की। वह इन दिनों ट्रेनिंग पर्र हैं। सेंट मॉरिया स्कूल से 12 वीं की परीक्षा में टॉपर करने के बाद ही आकृति ने सिविल सेवा को अपना लक्ष्य बना लिया था और इसकी तैयारी में जुट गई थीं। उन्होंने वर्ष 2013 में दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कालेज से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद सिविल सेवा की तैयारी करते हुए पहले चांस में इंटरव्यू तक पहुंचीं और दूसरे चांस में पूरी तरह से कामयाबी हासिल कर ली। इसके लिए उनको पिता चंद्रसेन सागर और मां मीना ने प्रेरित किया। आकृति की बड़ी बहन अर्जित और अर्पित भी अखिल भारतीय सेवा की अधिकारी हैं। बरेली शहर को आकृति और उनकी दोनों बहनों पर नाज है।
विमला भारती (खेल)
सीमित संसाधन भी पीलीभीत में रहने वालीं विमला भारती की हाकी का राष्ट्रीय खिलाड़ी बनने की राह रोक न पाए। अपने संघर्ष के बूते साधारण परिवार में जन्मी इस बेटी ने खेल को अपना जुनून बनाकर स्कूल से खेलते हुए जिला, मंडल और प्रदेश स्तर पर अपनी प्रतिभा को साबित की। वह यूपी हाकी में एम्पायर बन पाईं, इस बेटी ने अपनी कामयाबी में संसाधनों को आड़े नहीं आने दिया। नेशनल हाकी चैंपियनशिप, नार्थ इंडिया इंडोर हॉकी चैंपियनशिप और आल इंडिया रूरल स्पोर्ट टूर्नामेंट जैसे कई प्रतियोगिताओं में विजयी रहीं विमला अब खेल शिक्षक और कोच के रूप में बाकी लड़कियों में खिलाड़ी तराशने का काम कर रही हैं। उनको खेल के लिए कई पुरस्कार हासिल हो चुके हैं।
निधि मिश्रा (सामाजिक कार्य)
लखीमपुर खीरी में 19 साल की निधि मिश्रा का पहचान आज आसमानी सेना ग्रुप के मुखिया के रूप में होती है। यह संस्था नीली साड़ी पहनकर आम जनता और नारी अधिकारों की जायज लड़ाई लड़ने वाली चार सौ से ज्यादा महिलाओं का संगठित समूह है। निधि इन महिलाओं का नेतृत्व करते हुए सरकारी सिस्टम की खामियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाती हैं। खास बात यह है कि इनके आंदोलन कानून के दायरे में और शांतिपूर्ण होते हैं। राशन की कालाबाजारी रोकने की बात हो या सड़क, खंड़जा बनवाने की, इसके लिए यह संगठन मजबूती से लड़ रहा है।
आरती राना (उद्यमिता)
लखीमपुर खीरी जनपद के पिछड़े इलाकों में जहां शिक्षा और जाग्रति बहुत बड़ी बात मानी जाती है, उसमें गोबरौला जैसे छोटे से गांव की आरती राना ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का बीड़ा उठाया था। उन्होंने थारू जनजाति की 800 महिलाओं के 80दो सौ से ज्यादा स्वयं सहायता समूह का गठन कराकर नारी शक्ति को स्वावलंबन और उद्यमिता का हथियार थमा दिया। इनकेसमूहों केबनाए हुए कालीनों की दूर दूर तक मांग है। आज इन समूहों से जुड़ी महिलाएं हथकरघा और हस्त शिल्प के प्रशिक्षण के जरिए स्वरोजगार से अपने परिवार की आय का बड़ा माध्यम बनी हुईं हैं। इन प्रयासों की बदौलत प्रदेश सरकार ने इस साल मार्च में आरती राना को रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार जैसे सम्मान से नवाजा।
अंजली मिश्रा (बहादुरी)
बरेली शहर में अलखनाथ रोड पर रहने वाली 15 साल की अंजली मिश्रा 21 जून 2015 को अपने परिवार के साथ नीलकंठ ऋषिकेश में दर्शन के लिए गई थीं। इस बीच उनकी नजर रामझूला के पास गंगा किनारे दो छोटे बच्चों पर पड़ी, जो पानी में डूब रहे थे। अंजली ने अपनी जान की परवाह किए बिना दौड़कर दोनों बच्चों को अकेले ही पानी से बाहर निकालकर उनकी जान बचाई। उनके इस साहस और बहादुरी के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में महारानी अहिल्याबाई होल्कर पुरस्कार यशभारती पुरस्कार से सम्मानित किया।
विज्ञापन
मुख्य अतिथि कमिश्नर प्रमांशु कुमार ने कहा कि समाज में महिला और पुरुष समान दर्ज पर लाने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी यह है कि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं आत्मनिर्भर बनें। अपने पैरों पर खड़े होकर आर्थिक रूप से स्वतंत्र हों, तभी वे अपना महत्व साबित कर पाएंगी और समाज में उनके प्रति नजरिए में बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आगे बढ़ाने में पुरुषों की भी भूमिका होनी चाहिए। नारी के महत्व को समझना चाहिए। कहीं न कहीं असमानता के लिए महिला खुद भी जिम्मेदार होती है। वह एक पत्नी के रूप में पति के लिए करवाचौथ का व्रत रखती है और एक मां के रूप में भी बेटे के लिए निर्जला व्रत करती है लेकिन बेटी के लिए ऐसा कोई व्रत रखती हो ऐसा सुना नहीं है। महिलाएं बेटी को भी बेटे के समान महत्व देंगी, तभी पुरुषों में बचपन से ही महिलाओं के प्रति सम्मान का भाव जगा पाएंगी।
विज्ञापन
समारोह की अध्यक्षता समाजसेविका और उद्यमी शारदा भार्गव ने की। उन्होंने नारी सशक्तिकरण के लिए सामाजिक क्रांति का आह्वान करते हुए कहा कि पुत्र वंश बढ़ाएगा, यह धारणा खत्म होनी चाहिए और बेटा-बेटी के बीच अंतर खत्म करने के लिए जब तक महिलाएं आगे नहीं आएंगी, तब तक कुछ नहीं हो सकता। विशिष्ट अतिथि एसडीएम सदर अपूर्वा दुबे ने महिलाओं की शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि महिलाओं को यह भी तय करना होगा कि उनको परिवार और समाज में किस भूमिका में रहना है। कोई भी राह कठिन नहीं होती। इरादे मजबूत होने चाहिए। नारी यदि आत्मबल जगा ले तो वह समाज को दिशा दे सकती है। पुरुषों का नजरिया भी उसको ही बदलना होगा। बीएसए ऐश्वर्य लक्ष्मी ने कहा कि एक सफल पुरुष के पीछे यदि किसी महिला का हाथ समझा जाता है तो यह भी सच है कि किसी सफल महिला के पीछे किसी न किसी पुरुष का हाथ होता है इसलिए पुरुषों को महिलाओं के लिए प्रेरित करने की जरूरत है। प्रभारी जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. अवनीश यादव ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन डॉ. वंदना शर्मा ने किया। मुख्य अतिथि और अन्य मंचासीन अतिथियों ने कला और संस्कृति के क्षेत्र में टेलीविजन कलाकार हिबा नवाब (बरेली), खेल के क्षेत्र में हाकी खिलाड़ी विमला भारती (पीलीभीत), सामाजिक क्षेत्र में निधि मिश्रा (लखीमपुर खीरी), उद्यमिता के क्षेत्र में आरती राना (लखीमपुर खीरी), बहादुरी के लिए अंजली मिश्रा (बरेली) और शिक्षा के क्षेत्र में आईएएस परीक्षा में 239 वां स्थान पाने वालीं आकृति सागर (बरेली) को शाल और प्रतीक चिन्ह प्रदान करके सम्मानित किया। आकृति सागर की ओर से उनके पिता चंद्रसेन सागर ने सम्मान ग्रहण किया। आकृति इन दिनों आईएएस की ट्रेनिंग पर गई हुई हैं। समारोह में बड़ी संख्या में समाज के विभिन्न क्षेत्रों की महिलाएं, कई विद्यालयों की प्रधानाचार्य, शिक्षिकाएं और छात्राएं मौजूद रहीं।
विज्ञापन
आईएएस अपूर्वा ने दिए कामयाबी के मंत्र
बरेली। नारी सम्मान समारोह के दौरान एसडीएम सदर आईएएस अधिकारी अपूर्वा दुबे ने छात्राओं को कामयाबी के मंत्र भी दिए। उन्होंने कहा कि बेटियों को अपनी इच्छाएं दबानी नहीं चाहिए। अपनी सोच को तवज्जो देनी चाहिए। जब तक लड़कियां आगे नहीं आएंगी, तब तक अपनी पहचान नहीं बना सकतीं। खुद को ही सशक्त बनाना होगा, इसके लिए कोई और आगे नहीं आएगा। अपना रोल तय करिए और अपने लक्ष्य, सम्मान, अधिकार और इच्छाओं के लिए जूझिए।
अपूर्वा ने कहा कि शिक्षा का मतलब सिर्फ किताबी ज्ञान या डिग्री हासिल करने भर तक नहीं होना चाहिए। जरूरी यह है कि लड़कियां भी व्यवहारिक ज्ञान हासिल करें। अगर आपमें हौसला है और कुछ कर दिखाने का जज्बा है तो आप जीत जाएंगी। सफलता के लिए यह मायने नहीं रखना कि आप किस पृष्ठभूमि से निकले हैं या फिर आपकी परिस्थितियां क्या हैं, कामयाबी उनके कदम चूमती है, जिनमें आत्मबल और कुछ कर दिखाने के इरादे होते हैं, इसलिए अपने सपनों को पूरा करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए।
इनका हुआ सम्मान
हिबा नवाब (कला एवं संस्कृति)
स्टार प्लस पर दिखाए जाने वाले सीरियल ‘तेरे शहर में’ अमाया माथुर का रोल निभाने वाली 19 साल की हिबा नवाब बरेली से निकलकर कला के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। आज वह तेजी से उभरतीं टीवी कलाकार और फैशन मॉडल हैं। इन्होेंने 2008 में स्टार वन चैनल पर प्रसारित ‘सस्स...फिर कोई है’ और जीटीवी पर प्रसारित सात फेरे सीरियल में बाल कलाकार के रूप में शुरुआत की थी। इसके बाद सब टीवी पर ‘लो जी हो गई पूजा इस घर की’ सीरियल में बाल कलाकार के रूप में भूमिका निभाने के बाद ‘क्रेजी स्टुपिड इश्क’ सीरियल में अनुष्का का लीड रोल किया। स्टार प्लस पर प्रसारित चर्चित सीरियल ‘यह रिश्ता क्या कहलाता है’ में गेस्ट भूमिका के बाद हिबा ने ‘तेरे शहर में’ और ‘मेरी सासू मां’ सीरियलों में लीड रोल किया है। वह बरेली शहर के बड़ा बाजार में रहने वाले नवाब अली और रूशा नवाब की बेटी हैं। उनको पिछलेसाल स्टार परिवार अवार्ड हासिल हुआ।
आकृति सागर (शिक्षा)
24 साल की बरेली की आकृति सागर ने इस साल सिविल सर्विस की परीक्षा 239 वीं रैंक के साथ उत्तीर्ण की। वह इन दिनों ट्रेनिंग पर्र हैं। सेंट मॉरिया स्कूल से 12 वीं की परीक्षा में टॉपर करने के बाद ही आकृति ने सिविल सेवा को अपना लक्ष्य बना लिया था और इसकी तैयारी में जुट गई थीं। उन्होंने वर्ष 2013 में दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कालेज से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद सिविल सेवा की तैयारी करते हुए पहले चांस में इंटरव्यू तक पहुंचीं और दूसरे चांस में पूरी तरह से कामयाबी हासिल कर ली। इसके लिए उनको पिता चंद्रसेन सागर और मां मीना ने प्रेरित किया। आकृति की बड़ी बहन अर्जित और अर्पित भी अखिल भारतीय सेवा की अधिकारी हैं। बरेली शहर को आकृति और उनकी दोनों बहनों पर नाज है।
विमला भारती (खेल)
सीमित संसाधन भी पीलीभीत में रहने वालीं विमला भारती की हाकी का राष्ट्रीय खिलाड़ी बनने की राह रोक न पाए। अपने संघर्ष के बूते साधारण परिवार में जन्मी इस बेटी ने खेल को अपना जुनून बनाकर स्कूल से खेलते हुए जिला, मंडल और प्रदेश स्तर पर अपनी प्रतिभा को साबित की। वह यूपी हाकी में एम्पायर बन पाईं, इस बेटी ने अपनी कामयाबी में संसाधनों को आड़े नहीं आने दिया। नेशनल हाकी चैंपियनशिप, नार्थ इंडिया इंडोर हॉकी चैंपियनशिप और आल इंडिया रूरल स्पोर्ट टूर्नामेंट जैसे कई प्रतियोगिताओं में विजयी रहीं विमला अब खेल शिक्षक और कोच के रूप में बाकी लड़कियों में खिलाड़ी तराशने का काम कर रही हैं। उनको खेल के लिए कई पुरस्कार हासिल हो चुके हैं।
निधि मिश्रा (सामाजिक कार्य)
लखीमपुर खीरी में 19 साल की निधि मिश्रा का पहचान आज आसमानी सेना ग्रुप के मुखिया के रूप में होती है। यह संस्था नीली साड़ी पहनकर आम जनता और नारी अधिकारों की जायज लड़ाई लड़ने वाली चार सौ से ज्यादा महिलाओं का संगठित समूह है। निधि इन महिलाओं का नेतृत्व करते हुए सरकारी सिस्टम की खामियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाती हैं। खास बात यह है कि इनके आंदोलन कानून के दायरे में और शांतिपूर्ण होते हैं। राशन की कालाबाजारी रोकने की बात हो या सड़क, खंड़जा बनवाने की, इसके लिए यह संगठन मजबूती से लड़ रहा है।
आरती राना (उद्यमिता)
लखीमपुर खीरी जनपद के पिछड़े इलाकों में जहां शिक्षा और जाग्रति बहुत बड़ी बात मानी जाती है, उसमें गोबरौला जैसे छोटे से गांव की आरती राना ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का बीड़ा उठाया था। उन्होंने थारू जनजाति की 800 महिलाओं के 80दो सौ से ज्यादा स्वयं सहायता समूह का गठन कराकर नारी शक्ति को स्वावलंबन और उद्यमिता का हथियार थमा दिया। इनकेसमूहों केबनाए हुए कालीनों की दूर दूर तक मांग है। आज इन समूहों से जुड़ी महिलाएं हथकरघा और हस्त शिल्प के प्रशिक्षण के जरिए स्वरोजगार से अपने परिवार की आय का बड़ा माध्यम बनी हुईं हैं। इन प्रयासों की बदौलत प्रदेश सरकार ने इस साल मार्च में आरती राना को रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार जैसे सम्मान से नवाजा।
अंजली मिश्रा (बहादुरी)
बरेली शहर में अलखनाथ रोड पर रहने वाली 15 साल की अंजली मिश्रा 21 जून 2015 को अपने परिवार के साथ नीलकंठ ऋषिकेश में दर्शन के लिए गई थीं। इस बीच उनकी नजर रामझूला के पास गंगा किनारे दो छोटे बच्चों पर पड़ी, जो पानी में डूब रहे थे। अंजली ने अपनी जान की परवाह किए बिना दौड़कर दोनों बच्चों को अकेले ही पानी से बाहर निकालकर उनकी जान बचाई। उनके इस साहस और बहादुरी के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में महारानी अहिल्याबाई होल्कर पुरस्कार यशभारती पुरस्कार से सम्मानित किया।