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भू-अधिग्रहण घोटाला : जांच समितियां खंगाल रहीं अभिलेख
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कमिश्नर व डीएम की ओर से गठित टीमें अलग-अलग बिंदुओं पर करेंगी जांच
बरेली। बरेली-सितारगंज हाईवे के चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण में हुए घोटाले की जांच के लिए डीएम व कमिश्नर की ओर से गठित जांच टीमें अलग-अलग बिंदुओं पर काम कर रही हैं। कमिश्नर की ओर से गठित टीम अधिग्रहण की अधिसूचना के बाद भू-उपयोग बदलने के मामलों से जुड़े दस्तावेज खंगाल रही है। वहीं, डीएम की ओर से गठित टीम परिसंपत्तियों के मूल्यांकन में हुए घोटाले की जांच कर रही है।
हाईवे की अधिसूचना जारी होने के बाद उस दायरे में आने वाली जमीन के भू-उपयोग में परिवर्तन नहीं किया जा सकता है, पर इस मामलों में अधिकारियों ने नियमों को नजरअंदाज कर भू-उपयोग में बदलाव किया। अगस्त 2024 में एनएचएआई अधिकारियों की ओर से की गई जांच में ऐसे कुछ मामले सामने आए थे। इसके बाद शासन के आदेश पर कमिश्नर व डीएम ने अलग-अलग जांच टीमें गठित की हैं। ये टीमें घोटाले में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम स्पष्ट करेंगी। इसीलिए तत्कालीन अधिकारियों व कर्मचारियों के नाम तलाशे जा रहे हैं। कुछ अधिकारियों का तबादला भी हो गया है। जांच रिपोर्ट आने पर उनकी भी जवाबदेही तय होगी। मंडलायुक्त शासन को जांच रिपोर्ट भेजेंगी। इसके बाद शासन की ओर से दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
लभेड़ा, सिथरा, गरगईया में पहुंची जांच टीम
मुख्य विकास अधिकारी जगप्रवेश, एडीएम संतोष बहादुर सिंह बुधवार को जांच समिति के सदस्यों संग लभेड़़ा, सिथरा, गरगईया गांव के उन स्थलों को देखने पहुंचे, जहां पर बरेली-सितारगंज हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण के बाद स्ट्रक्चर के बदले बड़े भुगतान हुए हैं। स्थलीय निरीक्षण में जांच समिति ने वे स्ट्रक्टचर देखे, जिनके मूल्यांकन में गड़बड़ी का अंदेशा है। जांच समिति ने अभियंताओं से नाप-जोख कराई। पूरे दिन में 10-12 स्ट्रक्चरों की जांच हुई। जांच टीम सात दिनों में प्रारंभिक आख्या देगी। यही जांच टीम इन गांवों से पहले यही सरनिया भी पहुंची थी। सरनिया में भी टीम ने मूल्यांंकन कराया है। अमर उजाला ब्यूरो
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बरेली। बरेली-सितारगंज हाईवे के चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण में हुए घोटाले की जांच के लिए डीएम व कमिश्नर की ओर से गठित जांच टीमें अलग-अलग बिंदुओं पर काम कर रही हैं। कमिश्नर की ओर से गठित टीम अधिग्रहण की अधिसूचना के बाद भू-उपयोग बदलने के मामलों से जुड़े दस्तावेज खंगाल रही है। वहीं, डीएम की ओर से गठित टीम परिसंपत्तियों के मूल्यांकन में हुए घोटाले की जांच कर रही है।
हाईवे की अधिसूचना जारी होने के बाद उस दायरे में आने वाली जमीन के भू-उपयोग में परिवर्तन नहीं किया जा सकता है, पर इस मामलों में अधिकारियों ने नियमों को नजरअंदाज कर भू-उपयोग में बदलाव किया। अगस्त 2024 में एनएचएआई अधिकारियों की ओर से की गई जांच में ऐसे कुछ मामले सामने आए थे। इसके बाद शासन के आदेश पर कमिश्नर व डीएम ने अलग-अलग जांच टीमें गठित की हैं। ये टीमें घोटाले में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम स्पष्ट करेंगी। इसीलिए तत्कालीन अधिकारियों व कर्मचारियों के नाम तलाशे जा रहे हैं। कुछ अधिकारियों का तबादला भी हो गया है। जांच रिपोर्ट आने पर उनकी भी जवाबदेही तय होगी। मंडलायुक्त शासन को जांच रिपोर्ट भेजेंगी। इसके बाद शासन की ओर से दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
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लभेड़ा, सिथरा, गरगईया में पहुंची जांच टीम
मुख्य विकास अधिकारी जगप्रवेश, एडीएम संतोष बहादुर सिंह बुधवार को जांच समिति के सदस्यों संग लभेड़़ा, सिथरा, गरगईया गांव के उन स्थलों को देखने पहुंचे, जहां पर बरेली-सितारगंज हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण के बाद स्ट्रक्चर के बदले बड़े भुगतान हुए हैं। स्थलीय निरीक्षण में जांच समिति ने वे स्ट्रक्टचर देखे, जिनके मूल्यांकन में गड़बड़ी का अंदेशा है। जांच समिति ने अभियंताओं से नाप-जोख कराई। पूरे दिन में 10-12 स्ट्रक्चरों की जांच हुई। जांच टीम सात दिनों में प्रारंभिक आख्या देगी। यही जांच टीम इन गांवों से पहले यही सरनिया भी पहुंची थी। सरनिया में भी टीम ने मूल्यांंकन कराया है। अमर उजाला ब्यूरो
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