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Bareilly News: डेढ़ दशक में नहीं कर सके भूमि अधिग्रहण, अब किसान कर रहे इन्कार
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सीबीगंज/बरेली। आवास-विकास परिषद की परसाखेड़ा आवासीय योजना में लैंड पूलिंग स्कीम के तहत जमीन देने वाले किसानों ने नक्शे पर प्लॉट लेने से इन्कार कर दिया है। उनका कहना है कि जिन किसानों ने लैंड पूलिंग स्कीम में सहमति नहीं दी है, पहले उनको मुआवजा देकर जमीन का अधिग्रहण किया जाए। इसके बाद ही वे नक्शे पर प्लॉट मंजूर करने पर विचार करेंगे। किसानों ने स्थानीय अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री तक इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
वर्ष 2011 में ट्यूलिया, धंतिया, हमीरपुर, वोहित, फरीदापुर रामचरण, बल्लिया और मिलक इमामगंज गांवों की 522 हेक्टेयर जमीन पर यह योजना प्रस्तावित की गई थी। वर्ष 2016 में तत्कालीन जिलाधिकारी की ओर से गठित कमेटी ने सभी श्रेणियों में सर्किल रेट का दोगुना मुआवजा तय किया था, लेकिन किसानों को समय पर भुगतान नहीं मिला और योजना ठंडे बस्ते में चली गई।
नवंबर 2022 में ट्यूलिया और धंतिया में लैंड पूलिंग स्कीम के तहत की 149 हेक्टेयर जमीन ली गई और छह महीने बाद सातों गांवों को इसमें शामिल कर लिया गया। योजना के तहत 232 किसानों ने तीन साल का करार किया था, जिसकी अवधि इस वर्ष नवंबर में पूरी हो रही है। एग्रीमेंट रजिस्टर्ड कराने वाले 70-80 किसानों को ही फसल मुआवजा मिल रहा है। जिन्हें मुआवजा नहीं मिल रहा है, वे जमीन देने से पीछे हट रहे हैं। अब वे सीधे नकद मुआवजे की मांग कर रहे हैं। इसके जवाब में परिषद ने 23 सितंबर से लॉटरी के जरिये प्लॉटों का आवंटन शुरू किया है, जिसका किसान विरोध कर रहे हैं।
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मुआवजे का पेंचीदा गणित
किसानों और परिषद के बीच मुआवजे की दरों को लेकर पेच फंसा हुआ है। यदि वर्ष 2016 की दरों के आधार पर भुगतान किया जाए तो किसानों को अब तक का ब्याज देना होगा। यदि नई दरों से भुगतान किया जाए तो बड़ा बाइपास से सटी ट्यूलिया गांव की जमीनों के लिए दोगुना और अर्धनगरीय होने के कारण हमीरपुर व धंतिया की जमीनों के लिए चार गुना मुआवजा देना पड़ सकता है। अन्य तीन गांवों की जमीन का सर्किल रेट बराबर है। इस असमानता के कारण ट्यूलिया के किसानों में नाराजगी है। बोर्ड ने भी आपत्ति जताई है कि जब वर्ष 2016 में ही दरें तय हो चुकी थीं तो किसानों को समय पर मुआवजा क्यों नहीं दिया गया।
किसान बोले- 16 साल से गुमराह कर रहे अधिकारीफोटो
आवास विकास परिषद 16 साल से किसानों को गुमराह कर रहा है। पहले लैंड पूलिंग स्कीम में सहमति नहीं देने वाले किसानों की जमीन का अधिग्रहण करें, तभी हम प्लॉट लेंगे। - अंगनलाल उर्फ लाला
नक्शे पर नहीं, धरातल पर भूखंड मिले, तभी हम उसको बेच पाएंगे। आवास विकास परिषद के अधिकारी किसानों को गुमराह कर रहे हैं। अब वह उनके बहकावे में आने वाले नहीं हैं। - सेवाराम
तीन साल से अपनी जमीन पर खेती भी नहीं कर रहे हैं, फसल मुआवजा भी रोक दिया है। इससे आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। अब नक्शे में प्लॉट देकर किसानों को फंसाया जा रहा है। - विजय पाल
लैंड पूलिंग स्कीम में जमीन न देने वाले किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया जाए, तभी हम नक्शे पर प्लॉट लेंगे। सहमति दिए हुए तीन वर्ष बीतने को हैं, अब तक कोई काम शुरू नहीं किया है। योगेंद्र कुमार
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विभाग किसानों के साथ है। जिलाधिकारी की ओर से गठित कमेटी द्वारा दर निर्धारण कर मुख्यालय को भेज दिया है। निर्णय मुख्यालय को लेना है। - राजेंद्र नाथ राम, अधिशासी अभियंता, आवास-विकास परिषद
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174 किसानों को 473 प्लॉट आवंटित
सीबीगंज। परसाखेड़ा आवासीय योजना के सेक्टर चार, पांच और सात में लैंड पूलिंग स्कीम के तहत 174 किसानों को 473 प्लॉट आवंटित किए गए हैं। सेक्टर छह में लैंड पूलिंग स्कीम के तहत जमीन देने वाले किसानों को अभी इंतजार करना होगा। किसानों ने शुरुआत में प्लॉट के आकार को लेकर विरोध-प्रदर्शन भी किया। हालांकि, अधिकारियों के समझाने पर वे शांत हो गए।
आवास-विकास परिषद के अधिशासी अभियंता राजेंद्र नाथ राम ने बताया कि इन सेक्टरों में 174 किसानों ने लैंड पूलिंग स्कीम में सहमति दी थी। सभी को प्लॉट दे दिए गए हैं। किसान सरवन कुमार और मोहित ने प्लॉट का आकार पर आपत्ति जताई, पर बाद में शांत हो गए। सेक्टर छह का नक्शा ठीक होने के बाद किसानों को प्लॉट आवंटित किए जाएंगे। इसके लिए बाद में तरीख तय की जाएगी।
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वर्ष 2011 में ट्यूलिया, धंतिया, हमीरपुर, वोहित, फरीदापुर रामचरण, बल्लिया और मिलक इमामगंज गांवों की 522 हेक्टेयर जमीन पर यह योजना प्रस्तावित की गई थी। वर्ष 2016 में तत्कालीन जिलाधिकारी की ओर से गठित कमेटी ने सभी श्रेणियों में सर्किल रेट का दोगुना मुआवजा तय किया था, लेकिन किसानों को समय पर भुगतान नहीं मिला और योजना ठंडे बस्ते में चली गई।
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नवंबर 2022 में ट्यूलिया और धंतिया में लैंड पूलिंग स्कीम के तहत की 149 हेक्टेयर जमीन ली गई और छह महीने बाद सातों गांवों को इसमें शामिल कर लिया गया। योजना के तहत 232 किसानों ने तीन साल का करार किया था, जिसकी अवधि इस वर्ष नवंबर में पूरी हो रही है। एग्रीमेंट रजिस्टर्ड कराने वाले 70-80 किसानों को ही फसल मुआवजा मिल रहा है। जिन्हें मुआवजा नहीं मिल रहा है, वे जमीन देने से पीछे हट रहे हैं। अब वे सीधे नकद मुआवजे की मांग कर रहे हैं। इसके जवाब में परिषद ने 23 सितंबर से लॉटरी के जरिये प्लॉटों का आवंटन शुरू किया है, जिसका किसान विरोध कर रहे हैं।
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मुआवजे का पेंचीदा गणित
किसानों और परिषद के बीच मुआवजे की दरों को लेकर पेच फंसा हुआ है। यदि वर्ष 2016 की दरों के आधार पर भुगतान किया जाए तो किसानों को अब तक का ब्याज देना होगा। यदि नई दरों से भुगतान किया जाए तो बड़ा बाइपास से सटी ट्यूलिया गांव की जमीनों के लिए दोगुना और अर्धनगरीय होने के कारण हमीरपुर व धंतिया की जमीनों के लिए चार गुना मुआवजा देना पड़ सकता है। अन्य तीन गांवों की जमीन का सर्किल रेट बराबर है। इस असमानता के कारण ट्यूलिया के किसानों में नाराजगी है। बोर्ड ने भी आपत्ति जताई है कि जब वर्ष 2016 में ही दरें तय हो चुकी थीं तो किसानों को समय पर मुआवजा क्यों नहीं दिया गया।
किसान बोले- 16 साल से गुमराह कर रहे अधिकारीफोटो
आवास विकास परिषद 16 साल से किसानों को गुमराह कर रहा है। पहले लैंड पूलिंग स्कीम में सहमति नहीं देने वाले किसानों की जमीन का अधिग्रहण करें, तभी हम प्लॉट लेंगे। - अंगनलाल उर्फ लाला
नक्शे पर नहीं, धरातल पर भूखंड मिले, तभी हम उसको बेच पाएंगे। आवास विकास परिषद के अधिकारी किसानों को गुमराह कर रहे हैं। अब वह उनके बहकावे में आने वाले नहीं हैं। - सेवाराम
तीन साल से अपनी जमीन पर खेती भी नहीं कर रहे हैं, फसल मुआवजा भी रोक दिया है। इससे आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। अब नक्शे में प्लॉट देकर किसानों को फंसाया जा रहा है। - विजय पाल
लैंड पूलिंग स्कीम में जमीन न देने वाले किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया जाए, तभी हम नक्शे पर प्लॉट लेंगे। सहमति दिए हुए तीन वर्ष बीतने को हैं, अब तक कोई काम शुरू नहीं किया है। योगेंद्र कुमार
विभाग किसानों के साथ है। जिलाधिकारी की ओर से गठित कमेटी द्वारा दर निर्धारण कर मुख्यालय को भेज दिया है। निर्णय मुख्यालय को लेना है। - राजेंद्र नाथ राम, अधिशासी अभियंता, आवास-विकास परिषद
174 किसानों को 473 प्लॉट आवंटित
सीबीगंज। परसाखेड़ा आवासीय योजना के सेक्टर चार, पांच और सात में लैंड पूलिंग स्कीम के तहत 174 किसानों को 473 प्लॉट आवंटित किए गए हैं। सेक्टर छह में लैंड पूलिंग स्कीम के तहत जमीन देने वाले किसानों को अभी इंतजार करना होगा। किसानों ने शुरुआत में प्लॉट के आकार को लेकर विरोध-प्रदर्शन भी किया। हालांकि, अधिकारियों के समझाने पर वे शांत हो गए।
आवास-विकास परिषद के अधिशासी अभियंता राजेंद्र नाथ राम ने बताया कि इन सेक्टरों में 174 किसानों ने लैंड पूलिंग स्कीम में सहमति दी थी। सभी को प्लॉट दे दिए गए हैं। किसान सरवन कुमार और मोहित ने प्लॉट का आकार पर आपत्ति जताई, पर बाद में शांत हो गए। सेक्टर छह का नक्शा ठीक होने के बाद किसानों को प्लॉट आवंटित किए जाएंगे। इसके लिए बाद में तरीख तय की जाएगी।