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लालफाटक ओवरब्रिज: रक्षा मंत्रालय की जमीन 14 नहीं सिर्फ सात करोड़ की

Thu, 13 Feb 2020 02:24 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 13 Feb 2020 02:24 AM IST
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Lalfatak Overbridge: Ministry of Defense land not 14 but only seven crores
लाल फाटक - फोटो : अमर उजाला, बरेली
बरेली। लाल फाटक ओवरब्रिज के लिए कैंट एरिया की जमीन का अधिग्रहण कराने की प्रशासन के उच्चाधिकारियों की कोशिशें साल भर तक हवा में चलती रहीं। बैठकों के साथ तमाम आदेश-निर्देश जारी हुए मगर किसी अफसर ने यह तक गौर नहीं किया कि कैंट बोर्ड ने इस जमीन का मूल्यांकन व्यावसायिक दर पर किया था। बुधवार को एसडीएम सदर ईशान प्रताप सिंह के साथ सेतु निगम और कैंट अधिकारियों की संयुक्त बैठक में जब यह राज खुला तो कैंट बोर्ड के अधिकारियों ने मूल्यांकन पर फिर कवायद की और हाथ के हाथ साफ कर दिया कि इस जमीन का रेट 7.20 करोड़ ही है।
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लालफाटक ओवरब्रिज के लिए सेतु निगम को कैंट एरिया में करीब 6500 वर्गमीटर भूमि की जरूरत है। कमिश्नर रणवीर प्रसाद के निर्देश के बाद एसडीएम सदर ईशान प्रताप सिंह ने सेतु निगम के सीपीएम देवेंद्र सिंह और रक्षा संपदा अधिकारी कौशल गौतम के साथ बैठक की। एसडीएम ने बताया कि तहसील की टीम ने लाल फाटक पर जमीन अधिग्रहण के लिए सर्वे कर रिपोर्ट दे दी है। इसके तहत करीब 4500 वर्गमीटर जमीन कैंट बोर्ड और बाकी 2000 वर्गमीटर जमीन सेना की है। इस भूमि के मूल्य के बराबर प्रशासन को दूसरी जगह जमीन देनी है। कैंट बोर्ड पहले इसके लिए व्यावसायिक दर पर करीब चौदह करोड़ की जमीन मांग रहा था, लेकिन बाद में पचास फीसदी कम मूल्यांकन की जमीन पर देने पर सहमति बन गई। लिहाजा अब इस समस्या का हल ढूंढना आसान हो गया है। एसडीएम ने बताया कि प्रशासन लैंड बैंक बना रहा है। इसके लिए मोहनपुर ठिरिया में करीब 3270 वर्गमीटर सरकारी जमीन चिह्नित की गई है। बभिया में भी जमीन तलाश की गई है।
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समन्वय बैठक में कैंट बोर्ड के लिए कई पेशकश
- 6500 वर्गमीटर भूमि देने के बदले कैंट बोर्ड सेतु निगम से लैंड वैल्यु का पूरा 7.20 करोड़ रुपया ले ले
- कैंट में ओवरब्रिज की सर्विस रोड का इस्तेमाल आर्मी को भी करना है लिहाजा सर्विस रोड की भूमि को मूल्यांकन से बाहर किया जाए।
- कैंट बोर्ड भूमि देने के बदले प्रशासन से कुछ जमीन और बाकी का भुगतान प्राप्त कर ले।
प्रशासन और कैंट बोर्ड सहमति से फिर भेजा जाएगा प्रस्ताव
कैंट में जमीन अधिग्रहण के लिए पूर्व में भेजे गए प्रस्ताव में तमाम खामियां सामने आई हैं। सेतु निगम, कैंट और प्रशासन की संयुक्त बैठक में बाद तय हुआ है कि अब तीनों ही विभाग आपसी सहमति के आधार पर नए सिरे से प्रस्ताव बनाकर रक्षा मंत्रालय को भेेजेंगे। ताकि मंत्रालय से आने वाली आपत्तियों और सूचनाओं को लेकर विभागों के बीच किसी तरह का मतभेद न रहे।
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रक्षा मंत्रालय की जमीन तलाशने के लिए लगाए एसडीएम
सेतु निगम ने रक्षा संपदा अधिकारी से रक्षा मंत्रालय की जमीन के रिकार्ड मांगे थे। एसडीएम सदर ने जमीनों की इस लिस्ट को सभी तहसीलदारों को भेेजते हुए निर्देश दिए हैं कि वे उसके उस भूमि के पास सरकारी भूमि को चिह्नित करें ताकि मंत्रालय की मंशा के अनुसार उसे उसकी भूमि के पास ही लालफाटक पर भूमि अधिग्रहण के बदले दूसरी लैंड उपलब्ध कराई जा सके।

लाल फाटक पर जमीन अधिग्रहण को लेकर जो अड़चन सामने आ रही हैं, उनका हल निकालने के लिए सेतु निगम और रक्षा संपदा अधिकारी के साथ बैठक हो गई है। यह दिक्कत तब तक हल नहीं हो सकती, जब संबंधित विभागों के बीच समन्वय न हो। -ईशान प्रताप सिंह, एसडीएम सदर
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