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Bareilly News: मैदान का अभाव... खिलाड़ियों के सामने प्रशिक्षण की चुनौती
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बरेली। स्पोर्ट्स स्टेडियम में हैंडबॉल, फुटबॉल, क्रिकेट व हॉकी के खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के लिए चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। स्टेडियम में एथलेटिक्स के खिलाड़ियों के लिए सिंथेटिक कोर्ट का निर्माण किए जाने से अन्य खेलों के प्रशिक्षण पर भी असर पड़ा है। दरअसल, निर्माण कार्य के चलते अन्य खेलों के मैदान न होने की वजह से खिलाड़ी अपने खेल को निखार नहीं पा रहे हैं।
10 करोड़ की लागत से शुरू हुए सिंथेटिक ट्रैक का कार्य अप्रैल 2024 में शुरू हुआ था, जो वर्ष 2025 तक पूर्ण होना है। क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी का दावा है कि उन्होंने खिलाड़ियों के लिए रामलीला मैदान में व्यवस्था की है, लेकिन जब इसकी पड़ताल की गई तो धरातल पर अव्यवस्थाओं का बोलबाला मिला। वहां न खिलाड़ियों के लिए गोल पोस्ट हैं और न ही अन्य संसाधन...। ऐसे में खिलाड़ियों के सामने खेल को बेहतर करने की चुनौती है।
- खिलाड़ियों को स्मार्ट सिटी का इंडोर स्टेडियम भी नहीं मिला
स्पोर्ट्स स्टेडियम में ही स्मार्ट सिटी के तहत बनाया गया इंडोर स्टेडियम भी अभी तक खेल निदेशालय को नहीं मिला है। इसके चलते स्मार्ट सिटी का इंडोर स्टेडियम धूल फांक रहा है। स्टेडियम के अधिकारियों के मुताबिक इंडोर स्टेडियम की कवायद के लिए कागजी कार्रवाई चल रही है, लेकिन वह निदेशालय को कब सौंपा जाएगा। इसकी जानकारी जिम्मेदारों को भी नहीं है। संवाद
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खिलाड़ियों का परिश्रम हमेशा ही कठिनाइयों से भरा होता है। उनके पास सुविधाएं न होकर सिर्फ ग्राउंड होता है, जहां भविष्य बनाने के लिए कड़ी मेहनत की जाती। विभाग को ट्रैक बनने तक खिलाड़ियों के लिए व्यवस्था करनी चाहिए।
साहिबे आलम, सचिव, एथलेटिक्स संघ, बरेली
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खिलाड़ी से मैं कोच बना हूं, इसलिए उनके परिश्रम को समझता हूं। बॉल और कोर्ट न हो तब प्रशिक्षण मुश्किल पड़ता है। ऐसी परिस्थिति में खिलाड़ियों के लिए उचित व्यवस्था की जाना बेहद जरूरी है।
हेमंत कुमार, हैंडबॉल कोच
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रामलीला ग्राउंड में खिलाड़ियों को फिलहाल के लिए शिफ्ट किया गया है। बच्चों को परेशानी नहीं हो रही है। स्मार्ट सिटी हॉल के लिए कागजी कार्रवाई चल रही है। जल्द ही वह भी निदेशालय को मिल जाएगा।
जितेंद्र यादव, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी
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10 करोड़ की लागत से शुरू हुए सिंथेटिक ट्रैक का कार्य अप्रैल 2024 में शुरू हुआ था, जो वर्ष 2025 तक पूर्ण होना है। क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी का दावा है कि उन्होंने खिलाड़ियों के लिए रामलीला मैदान में व्यवस्था की है, लेकिन जब इसकी पड़ताल की गई तो धरातल पर अव्यवस्थाओं का बोलबाला मिला। वहां न खिलाड़ियों के लिए गोल पोस्ट हैं और न ही अन्य संसाधन...। ऐसे में खिलाड़ियों के सामने खेल को बेहतर करने की चुनौती है।
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- खिलाड़ियों को स्मार्ट सिटी का इंडोर स्टेडियम भी नहीं मिला
स्पोर्ट्स स्टेडियम में ही स्मार्ट सिटी के तहत बनाया गया इंडोर स्टेडियम भी अभी तक खेल निदेशालय को नहीं मिला है। इसके चलते स्मार्ट सिटी का इंडोर स्टेडियम धूल फांक रहा है। स्टेडियम के अधिकारियों के मुताबिक इंडोर स्टेडियम की कवायद के लिए कागजी कार्रवाई चल रही है, लेकिन वह निदेशालय को कब सौंपा जाएगा। इसकी जानकारी जिम्मेदारों को भी नहीं है। संवाद
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खिलाड़ियों का परिश्रम हमेशा ही कठिनाइयों से भरा होता है। उनके पास सुविधाएं न होकर सिर्फ ग्राउंड होता है, जहां भविष्य बनाने के लिए कड़ी मेहनत की जाती। विभाग को ट्रैक बनने तक खिलाड़ियों के लिए व्यवस्था करनी चाहिए।
साहिबे आलम, सचिव, एथलेटिक्स संघ, बरेली
खिलाड़ी से मैं कोच बना हूं, इसलिए उनके परिश्रम को समझता हूं। बॉल और कोर्ट न हो तब प्रशिक्षण मुश्किल पड़ता है। ऐसी परिस्थिति में खिलाड़ियों के लिए उचित व्यवस्था की जाना बेहद जरूरी है।
हेमंत कुमार, हैंडबॉल कोच
रामलीला ग्राउंड में खिलाड़ियों को फिलहाल के लिए शिफ्ट किया गया है। बच्चों को परेशानी नहीं हो रही है। स्मार्ट सिटी हॉल के लिए कागजी कार्रवाई चल रही है। जल्द ही वह भी निदेशालय को मिल जाएगा।
जितेंद्र यादव, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी