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लैब से तो नहीं निकला एफएमडी वायरस!
बरेली
Updated Wed, 13 Jan 2016 02:14 AM IST
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बरेली। पशुओं में खुरपका और मुंहपका रोग फैलाने वाला एफएमडी वायरस से आईवीआरआई फार्म तक पहुंचने के लिए संस्थान की लैब की ओर इशारा जा रहा है। इस रोग से कहीं और कोई पशु सामने न आने से आशंका जताई जाने लगी है कि कहीं आईवीआरआई की लैब से निकलकर ही तो एफएमडी वायरस फार्म में नहीं पहुंचा। हालांकि संस्थान प्रशासन और वैज्ञानिक इस आशंका को सिरे से नकार रहे हैं। उनका तो यहां तक कहना है कि संस्थान में इस वायरस पर काम ही नहीं होता।
अगर राज्य सरकार के पशु चिकित्सा विभाग के अफसरों की मानें तो सिर्फ बरेली ही नहीं मंडल के चारों जिलों के सारे पशुओं का एफएमडी वायरस से रोकथाम के लिए वैक्सीनेशन किया जा चुका है। हालांकि उनका दावा गलत भी हो सकता है लेकिन आईवीआरआई के चेताने के बाद पशु चिकित्सा महकमे की टीमें तीन दिनों से गांवों में घूमकर पशुओं का परीक्षण करने में जुटी हुई हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एनपीएस गहलोत का दावा है कि बरेली में कहीं भी कोई पशु अब तक एफएमडी वायरस से प्रभावित नहीं है। ऐसे में, आईवीआरआई के वैज्ञानिक स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं कि सिर्फ उनके ही फार्म में यह वायरस घुसा कैसे? पशुधन उत्पादन एवं प्रबंधन विभाग के कोआर्डिनेटर डॉ. त्रिवेणी दत्त लैब से वायरस आने जैसी संभावना को सिरे से खारिज करते हुए कहते हैं कि आईवीआरआई कैंपस में तो एफएमडी पर काम ही नहीं होता। वह बताते हैं कि बैंगलोर ब्रांच में इसका बड़ा सेंटर है और मुक्तेश्वर ब्रांच में लैब है, जिनमें ही इस वायरस पर काम होता है। यहां से सारे सैंपल वहीं भेजे जाते हैं। उनका अनुमान है कि संस्थान के फार्म में यह वायरस किसी गांव से ही आया है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां 70 से 75 कर्मचारी ऐसे कार्यरत हैं जो अपने-अपने गांवों से हर दिन फार्म में आते हैं, इसलिए उनके कपड़ों के जरिए वायरस फार्म में आने की संभावना बनी हुई है।
आईवीआरआई ने गांवों में दौड़ाई टीमें
गांवों में किसी भी पशु में एफएमडी वायरस मिलने से पशु चिकित्सा विभाग के इंकार के बाद उनके दावे की सच्चाई अपने स्तर से परखने के लिए अब आईवीआरआई ने अपनी टीमें गांवों में भेजी हैं। पशुधन उत्पादन एवं प्रबंधन के कोआर्डिनेटर डॉ. त्रिवेणी ने बताया कि जल्द ही गांवों में हमारी टीमें वायरस से प्रभावित पशुओं को तलाश लेंगी।
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पूरे कैंपस में बायो सिक्योरिटी
पशु फार्म में एफएमडी वायरस फैलने के बाद आईवीआरआई प्रशासन ने अब पूरे कैंपस को ही बायो सिक्योरिटी से लैस कर दिया है। कैंपस के प्राणि उद्यान, पिगरी फार्म और गोट फार्म में दवाओं के छिड़काव के साथ ही बाहरी लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है। गाय और भैंस के फार्म में कार्य करने वाले कर्मचारियों को बाकी फार्मों में न जाने की हिदायत दी गई है।
अब वैक्सीन पर मंथन
एफएमडी वायरस की रोकथाम के लिए पशुओं को वैक्सीन लगाई जाती है लेकिन छह महीने से कम उम्र और छह माह के गर्भ वाले पशुओं को यह वैक्सीन नहीं लगती, इसीलिए इनके वायरस की चपेट में आने की आशंका ज्यादा मानी जाती है। ऐसे में, आईवीआरआई अब चार महीने उम्र तक के पशुओं का वैक्सीनेशन करने पर विचार करने लगा है।
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अगर राज्य सरकार के पशु चिकित्सा विभाग के अफसरों की मानें तो सिर्फ बरेली ही नहीं मंडल के चारों जिलों के सारे पशुओं का एफएमडी वायरस से रोकथाम के लिए वैक्सीनेशन किया जा चुका है। हालांकि उनका दावा गलत भी हो सकता है लेकिन आईवीआरआई के चेताने के बाद पशु चिकित्सा महकमे की टीमें तीन दिनों से गांवों में घूमकर पशुओं का परीक्षण करने में जुटी हुई हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एनपीएस गहलोत का दावा है कि बरेली में कहीं भी कोई पशु अब तक एफएमडी वायरस से प्रभावित नहीं है। ऐसे में, आईवीआरआई के वैज्ञानिक स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं कि सिर्फ उनके ही फार्म में यह वायरस घुसा कैसे? पशुधन उत्पादन एवं प्रबंधन विभाग के कोआर्डिनेटर डॉ. त्रिवेणी दत्त लैब से वायरस आने जैसी संभावना को सिरे से खारिज करते हुए कहते हैं कि आईवीआरआई कैंपस में तो एफएमडी पर काम ही नहीं होता। वह बताते हैं कि बैंगलोर ब्रांच में इसका बड़ा सेंटर है और मुक्तेश्वर ब्रांच में लैब है, जिनमें ही इस वायरस पर काम होता है। यहां से सारे सैंपल वहीं भेजे जाते हैं। उनका अनुमान है कि संस्थान के फार्म में यह वायरस किसी गांव से ही आया है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां 70 से 75 कर्मचारी ऐसे कार्यरत हैं जो अपने-अपने गांवों से हर दिन फार्म में आते हैं, इसलिए उनके कपड़ों के जरिए वायरस फार्म में आने की संभावना बनी हुई है।
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आईवीआरआई ने गांवों में दौड़ाई टीमें
गांवों में किसी भी पशु में एफएमडी वायरस मिलने से पशु चिकित्सा विभाग के इंकार के बाद उनके दावे की सच्चाई अपने स्तर से परखने के लिए अब आईवीआरआई ने अपनी टीमें गांवों में भेजी हैं। पशुधन उत्पादन एवं प्रबंधन के कोआर्डिनेटर डॉ. त्रिवेणी ने बताया कि जल्द ही गांवों में हमारी टीमें वायरस से प्रभावित पशुओं को तलाश लेंगी।
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पूरे कैंपस में बायो सिक्योरिटी
पशु फार्म में एफएमडी वायरस फैलने के बाद आईवीआरआई प्रशासन ने अब पूरे कैंपस को ही बायो सिक्योरिटी से लैस कर दिया है। कैंपस के प्राणि उद्यान, पिगरी फार्म और गोट फार्म में दवाओं के छिड़काव के साथ ही बाहरी लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है। गाय और भैंस के फार्म में कार्य करने वाले कर्मचारियों को बाकी फार्मों में न जाने की हिदायत दी गई है।
अब वैक्सीन पर मंथन
एफएमडी वायरस की रोकथाम के लिए पशुओं को वैक्सीन लगाई जाती है लेकिन छह महीने से कम उम्र और छह माह के गर्भ वाले पशुओं को यह वैक्सीन नहीं लगती, इसीलिए इनके वायरस की चपेट में आने की आशंका ज्यादा मानी जाती है। ऐसे में, आईवीआरआई अब चार महीने उम्र तक के पशुओं का वैक्सीनेशन करने पर विचार करने लगा है।