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रोजगार के लिए नहीं ज्ञान के लिए है कोर्स
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Thu, 07 Apr 2016 01:21 AM IST
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रुहेलखंड विश्वविद्यालय में पीजी डिप्लोमा इन क्लीनिकल पैथोलॉजी कोर्स करने वाले विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज में रजिस्ट्रेशन के लिए डिग्री की मान्यता के संबंध में आरटीआई में सूचना मांगते हैं। इस तरह की हर सूचना में विश्वविद्यालय एक ही जवाब देता है कि यह कोर्स रोजगार के लिए नहीं, ज्ञान के लिए है।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय में पांच साल पहले तक पीजी डिप्लोमा इन क्लीनिकल पैथोलॉजी का कोर्स चलता था। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की मान्यता लिए बिना यह कोर्स चला दिया गया। कुछ छात्रों के कोर्ट में जाने के बाद कोर्ट के आदेश पर कोर्स बंद कर दिया गया। कोर्स कर चुके तमाम विद्यार्थी सर्टिफिकेट की मान्यता के संबंध में आरटीआई डालते रहते हैं। अफजाल हुसैन ने 2009 में यह कोर्स किया था। उन्होंने आरटीआई में पूछा है कि वह लखनऊ के मेडिकल कॉलेज में अपना रजिस्ट्रेशन कराना चाहते हैं। इस संबंध में उन्हें यह बताया जाए कि उनका सर्टिफिकेट मान्य है या नहीं। इस आरटीआई में विश्वविद्यालय बताने की बजाय कि सर्टिफिकेट मान्य है या अमान्य। वह यह बताता है कि इस सर्टिफिकेट के आधार पर छात्र रोजगार नहीं कर सकता, क्योंकि यह कोर्स रोजगार के लिए नहीं, बल्कि ज्ञान अर्जित करने के लिए था। विश्वविद्यालय घुमा-फिराकर कह रहा है कि सर्टिफिकेट मान्य नहीं है, लेकिन सीधे तौर पर अमान्य शब्द का प्रयोग नहीं कर रहा है।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय में ऐसे ही तमाम कोर्स चल रहे हैं। यहां पर कुछ भी संभव है। आरटीआई में विश्वविद्यालय की गलतियों पर सीधे जवाब न देकर छात्रों को गुमराह किया जाता है। छात्र समझ ही नहीं पाते हैं कि विश्वविद्यालय उन्हें क्या बता रहा है और उन्होंने पूछा क्या था?
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रुहेलखंड विश्वविद्यालय में पांच साल पहले तक पीजी डिप्लोमा इन क्लीनिकल पैथोलॉजी का कोर्स चलता था। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की मान्यता लिए बिना यह कोर्स चला दिया गया। कुछ छात्रों के कोर्ट में जाने के बाद कोर्ट के आदेश पर कोर्स बंद कर दिया गया। कोर्स कर चुके तमाम विद्यार्थी सर्टिफिकेट की मान्यता के संबंध में आरटीआई डालते रहते हैं। अफजाल हुसैन ने 2009 में यह कोर्स किया था। उन्होंने आरटीआई में पूछा है कि वह लखनऊ के मेडिकल कॉलेज में अपना रजिस्ट्रेशन कराना चाहते हैं। इस संबंध में उन्हें यह बताया जाए कि उनका सर्टिफिकेट मान्य है या नहीं। इस आरटीआई में विश्वविद्यालय बताने की बजाय कि सर्टिफिकेट मान्य है या अमान्य। वह यह बताता है कि इस सर्टिफिकेट के आधार पर छात्र रोजगार नहीं कर सकता, क्योंकि यह कोर्स रोजगार के लिए नहीं, बल्कि ज्ञान अर्जित करने के लिए था। विश्वविद्यालय घुमा-फिराकर कह रहा है कि सर्टिफिकेट मान्य नहीं है, लेकिन सीधे तौर पर अमान्य शब्द का प्रयोग नहीं कर रहा है।
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रुहेलखंड विश्वविद्यालय में ऐसे ही तमाम कोर्स चल रहे हैं। यहां पर कुछ भी संभव है। आरटीआई में विश्वविद्यालय की गलतियों पर सीधे जवाब न देकर छात्रों को गुमराह किया जाता है। छात्र समझ ही नहीं पाते हैं कि विश्वविद्यालय उन्हें क्या बता रहा है और उन्होंने पूछा क्या था?
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