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बर्बाद फसल के सदमे में एक और किसान ने दम तोड़ा
बरेली
Updated Thu, 02 Apr 2015 01:51 AM IST
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बारिश और ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसल के सदमे में एक और किसान की मौत हो गई। वह मंगलवार शाम खेत में गया था। लौटा तो हार्टअटैक पड़ गया। बुधवार सुबह बिस्तर पर मृत मिलने पर परिवार वालों के होश उड़ गए। सूचना पर तहसीलदार भी मौके पर पहुंचे। लेखपाल ने 10 प्रतिशत नुकसान के आंकलन की बात कही है।
मझगवां ब्लॉक के फुलासी गांव में रहने वाले 60 वर्षीय सत्यपाल सिंह अविवाहित थे। उनके पास सात बीघा जमीन थी जबकि सात बीघा जमीन छोटे भाई की थी। छोटे भाई महीपाल की सात साल पहले मौत होने पर उनके तीनों बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी भी उन पर थी। घर वालों ने बताया कि मंगलवार शाम छह बजे वह खेत से लौटे तो सीने में दर्द और बेचैनी की बात कही थी। उन्होंने भतीजों से यह भी कहा कि इस बार फसल ने सपने तोड़ दिए हैं। बुधवार सुबह भतीजे ने चाय के लिए उन्हें जगाया तो कोई हरकत न होती देख परिवार के लोगों को बुला लिया। सत्यपाल की मौत हो चुकी थी। तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी गई। तहसीलदार मनोज कुमार श्रीवास्तव गांव पहुंचे। उन्होंने लेखपाल वाहिद खां को नुकसान का सर्वे करने को कहा। लेखपाल ने अधिकतम दस प्रतिशत नुकसान की रिपोर्ट दी है।
इस बार छत डालने की तैयारी थी
सत्यपाल के भतीजे जोगेंद्र, विष्णु और राहुल ने बताया कि इस बार वह गेहूं की फसल कटने पर दो कमरों की छत डालने की बात कह रहे थे। ईंट पहले ही खरीद ली थी। मंगलवार शाम वह काफी परेशान दिख रहे थे। खाना भी बेमन से खाया था। वह बार-बार कह रहे थे कि इस बार शायद मकान का काम पूरा नहीं हो पाएगा। गांव के विशंभर और मुकेश ने बताया कि सत्यपाल ने खुद शादी नहीं की मगर भाई और भतीजों के लिए हर समय चिंतित रहते थे।
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मझगवां ब्लॉक के फुलासी गांव में रहने वाले 60 वर्षीय सत्यपाल सिंह अविवाहित थे। उनके पास सात बीघा जमीन थी जबकि सात बीघा जमीन छोटे भाई की थी। छोटे भाई महीपाल की सात साल पहले मौत होने पर उनके तीनों बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी भी उन पर थी। घर वालों ने बताया कि मंगलवार शाम छह बजे वह खेत से लौटे तो सीने में दर्द और बेचैनी की बात कही थी। उन्होंने भतीजों से यह भी कहा कि इस बार फसल ने सपने तोड़ दिए हैं। बुधवार सुबह भतीजे ने चाय के लिए उन्हें जगाया तो कोई हरकत न होती देख परिवार के लोगों को बुला लिया। सत्यपाल की मौत हो चुकी थी। तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी गई। तहसीलदार मनोज कुमार श्रीवास्तव गांव पहुंचे। उन्होंने लेखपाल वाहिद खां को नुकसान का सर्वे करने को कहा। लेखपाल ने अधिकतम दस प्रतिशत नुकसान की रिपोर्ट दी है।
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इस बार छत डालने की तैयारी थी
सत्यपाल के भतीजे जोगेंद्र, विष्णु और राहुल ने बताया कि इस बार वह गेहूं की फसल कटने पर दो कमरों की छत डालने की बात कह रहे थे। ईंट पहले ही खरीद ली थी। मंगलवार शाम वह काफी परेशान दिख रहे थे। खाना भी बेमन से खाया था। वह बार-बार कह रहे थे कि इस बार शायद मकान का काम पूरा नहीं हो पाएगा। गांव के विशंभर और मुकेश ने बताया कि सत्यपाल ने खुद शादी नहीं की मगर भाई और भतीजों के लिए हर समय चिंतित रहते थे।
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‘ यह मामला अभी संज्ञान में आया है, जांच कराई जाएगी और मानक में आने पर आर्थिक सहायता भी दी जाएगी’ गौरव दयाल डीएम