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लेखपाल की मर्जी, किसको कितना दें
बरेली
Updated Thu, 16 Apr 2015 01:28 AM IST
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सदर तहसील के सभाकक्ष में किसानों को ओलावृष्टि और बारिश से बर्बाद हुई फसल के चेक मिल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इन चेक को एक दूसरे को दिखा रहे किसानों के सीने का दर्द झलक रहा था। उनका दर्द यह है कि कम जमीन में फसल बोने वाले किसान को ज्यादा मुआवजा दे दिया गया और ज्यादा वाले को कम । किसानों का आरोप था कि लेखपाल के नजदीकी लोगों के कहने पर दो सौ रुपये बीघा के हिसाब से दे देते तो मुआवजे की रकम बढ़कर मिलती । बात नहीं मानी और मुआवजा कम रह गया। अब कोई भी अधिकारी सुनने को तैयार नहीं हैं। एक सप्ताह पहले कंट्रोल रूम में शिकायत की लेकिन अभी तक सुनवाई नहीं हुई।
आए थे पर धेला नहीं मिला
डासपुर गांव के ही टट्न बाबू की सात बीघा खेती बर्बाद हो गई लेकिन एक धेले का मुआवजा नहीं मिला। तहसील स्टाफ से पूछा तो पता चला कि उसका नाम मुआवजा राशि पाने वालों की सूची में नहीं है। इतना सुनते ही टट्न बाबू मायूस होकर गांव लौट गया। ऐसी ही शिकायतें बनवारीलाल, रघुवीर सिंह, प्रताप सिंह, दुर्गपाल और सुशीलादेवी की रहीं। भानु की पांच बीघा गेहूं की खेती बर्बाद हो गई लेकिन एक धेला नहीं मिला है। ऐसे किसानों की संख्या कई दर्जन थी, जिनको कम राशि के चेक मिले और दर्जनभर ऐेसे थे, जिनको मुआवजे के लिए इंतजार करके मायूस होकर लौटना पड़ा।
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‘सर्वे ठीक से किया है, इसके बावजूद शिकायतों का समाधान कराने के लिए तहसील में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। जहां पर नायब तहसीलदार सदर मॉनिटरिंग करते हैं। कुछ ऐसे भी किसान हैं, जिनके खेतों में कम क्षति हुई है, इसी वजह से उनका कम मुआवजा रहा होगा। इनकी शिकायतों पर जांच कराई जाएगी’ खालिद अंजुम, तहसीलदार
33 लाख का मुआवजा बांटा
बरेली। तहसील सदर में प्रभारी मंत्री आर ए उस्मानी, सपा के नगर विधायक सहजिल इस्लाम, सपा नगर अध्यक्ष जफर बेग ने संयुक्त रूम से किसानों को नौ हजार किसानों को 33 लाख रुपये के मुआवजे के चेक बांटे। इन्होंने कहा कि किसानों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होगी। सरकार उनकी मदद के लिए और भी योजनाएं संचालित करने जा रही है। इस दौरान तहसीलदार खालिद अंजुम आदि थे।
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केदार सिंह का कहना है कि 13 बीघा जमीन के गेहूं खराब होने पर 4734 रुपये का चेक मिला है। वहीं दूसरी ओर इसी गांव के ख्यालीराम को नौ बीघा खेत में 1638 रुपये का चेक दिया है। ऐसे ही लाल करन को 10 बीघा फसल के बर्बाद होने मात्र एक हजार रुपये का ही चेक मिला है। इसी गांव के दाता राम को 12 बीघा फसल के बर्बाद होने पर 1692 रुपये का चेक मिला है।
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आए थे पर धेला नहीं मिला
डासपुर गांव के ही टट्न बाबू की सात बीघा खेती बर्बाद हो गई लेकिन एक धेले का मुआवजा नहीं मिला। तहसील स्टाफ से पूछा तो पता चला कि उसका नाम मुआवजा राशि पाने वालों की सूची में नहीं है। इतना सुनते ही टट्न बाबू मायूस होकर गांव लौट गया। ऐसी ही शिकायतें बनवारीलाल, रघुवीर सिंह, प्रताप सिंह, दुर्गपाल और सुशीलादेवी की रहीं। भानु की पांच बीघा गेहूं की खेती बर्बाद हो गई लेकिन एक धेला नहीं मिला है। ऐसे किसानों की संख्या कई दर्जन थी, जिनको कम राशि के चेक मिले और दर्जनभर ऐेसे थे, जिनको मुआवजे के लिए इंतजार करके मायूस होकर लौटना पड़ा।
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‘सर्वे ठीक से किया है, इसके बावजूद शिकायतों का समाधान कराने के लिए तहसील में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। जहां पर नायब तहसीलदार सदर मॉनिटरिंग करते हैं। कुछ ऐसे भी किसान हैं, जिनके खेतों में कम क्षति हुई है, इसी वजह से उनका कम मुआवजा रहा होगा। इनकी शिकायतों पर जांच कराई जाएगी’ खालिद अंजुम, तहसीलदार
33 लाख का मुआवजा बांटा
बरेली। तहसील सदर में प्रभारी मंत्री आर ए उस्मानी, सपा के नगर विधायक सहजिल इस्लाम, सपा नगर अध्यक्ष जफर बेग ने संयुक्त रूम से किसानों को नौ हजार किसानों को 33 लाख रुपये के मुआवजे के चेक बांटे। इन्होंने कहा कि किसानों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होगी। सरकार उनकी मदद के लिए और भी योजनाएं संचालित करने जा रही है। इस दौरान तहसीलदार खालिद अंजुम आदि थे।