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माननीयों का हमेशा रहा हाथ तभी खनन के खिलाड़ी आबाद

Mon, 22 Jul 2019 02:05 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 22 Jul 2019 02:05 AM IST
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Khanan
पीलीभीत। प्रदेश में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते की योगी आदित्यनाथ ने अवैध खनन को लेकर सख्ती शुरू की। इसमें लिप्त पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद समेत कई खनन माफिया पर शिकंजा कसा गया। कई अफसर भी नपे। लेकिन यहां कुछ माननीय ही ठेकेदारों से मिलकर खनन में खेल कर रहे थे। खनन ठेकेदार से उन्होंने बाकायदा कमीशन भी तय कर रखा था और उसके बदले उन्हें नियमों को ताक पर रखकर मनमाने ढंग से खनन करने की खुली छूट भी दे दी गई। माननीयों की जब कमीशन की रकम बढ़ाने की डिमांड बढ़ी तो ठेकेदार ने आनाकानी की। इस पर माननीयों ने ही शासन स्तर पर शिकायत करके खेल बिगाड़ दिया।
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माननीयों का दखल तो उसी वक्त से शुरू हो गया था जब खनन के ठेके के लिए टेंडर डाले जा रहे थे। जिले के दो माननीयों ने भी खनन के ठेके लेने के लिए अपने लोगों के टेंडर डलवाए, लेकिन स्क्रीनिंग में जिन पांच ठेकेदारों को पट्टे देने के लिए छांटा गया, उनमें माननीयों का एक भी आदमी नहीं था। उधर, ठेकेदारों ने आपस में पूल करके डीएस कांट्रैक्टर और सतजुग फर्म को ठेका लेने के लिए अधिकृत कर दिया। दोनों के नाम खनन के पट्टे हो भी गए। इसके बाद एक माननीय तो सतजुग के साथ जुड़ गए, जबकि दूसरे ने डीएस कांट्रैक्टर से कमीशन तय कर लिया। माननीय ने जब खनन से होने वाली कमाई पर नजर डाली तो उन्हें लगा कि जो कमीशन मिल रहा है, वह बहुत कम है। उन्होंने कमीशन बढ़ाने की बात की तो ठेकेदारों ने हाथ खड़े कर दिए। बस यही बात डीएस कांट्रैक्टर और सतजुग फर्म को भारी पड़ गई।
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जिले में खनन के चार प्वाइंट है। इनमें देवहा नदी के दो प्वाइंट पर मैसर्स सतजुग फर्म के अमनदीप सिंह और एक प्वाइंट पर डीएस कांट्रैक्टर के दुष्यंत कुमार को पांच साल के लिए खनन का पट्टा दिया गया था। सतजगु का एक माननीय के साथ अघोषित करार हुआ और धंधा शुरू हो गया। बताते हैं कि सतजुग से गठजोड़ करने वाले माननीय डीएस कांट्रैक्टर से भी शेयर की उम्मीद करने लगे थे। इधर, दूसरी कंपनी डीएस कांट्रैक्टर पर दूसरे माननीय का हाथ था। हालांकि वह कमीशन की रकम न बढ़ाने को लेकर डीएस कांट्रैक्टर से नाराज थे, लेकिन दूसरे इलाके के माननीय का अपने इलाके में दखल उन्हें नागवार गुजरा। इस तरह दोनों माननीयों की खींचताज क चलते ही दोनों फर्मों की शिकायतें हुईं। सत्ता में रहकर खनन के इस खेल को अंजाम तक पहुंचाने के लिए कार्रवाई का सिलसिला ऐसा चला कि डीएम ने दोनों फर्मों को ही ब्लैक लिस्टेड करने के साथ उनका पट्टा भी निरस्त कर दिया।
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