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बगैर सीमांकन किच्छा नदी में खनन पर एसडीएम को नोटिस
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बरेली। बहेड़ी में इंस्पेक्टर और विधायक के बीच टकराव के बाद ये तो साफ हो चुका है कि करोड़ों की कमाई के लिए किच्छा नदी में अवैध खनन किया जा रहा है, लेकिन अब इसमें अफसरशाही की मिलीभगत भी सामने आई है। अफसरों ने बिना सीमांकन किए नदी से रेत निकालने की खुली छूट दे दी थी। जबकि सीमांकन की जिम्मेदारी एसडीएम और खनन अधिकारी की थी। अवैध खनन सामने आने के बाद अफसरों ने केवल रॉयल्टी न जमा होने की बात कहते हुए अपनी गर्दन बचाने की कोशिश की और सारा ठीकरा पट्टाधारकों पर फोड़ दिया, लेकिन शासन से आई टीम की जांच के बाद अफसरों भी फंसते दिखाई दे रहे हैं। एडीएम वित्त ने एसडीएम ममता मालवीय और खनन अधिकारी से बगैर सीमांकन खनन कराने के मामले में नोटिस जारी किया है।
जिला प्रशासन ने बहेड़ी में मोहम्मदपुर और टियूला गांव से गुजरने वाली किच्छा नदी में खनन करने के दो पट्टे दिए थे। इन्हीं पट्टों की आड़ में यहां जमकर अवैध खनन किया जा रहा था। इसमें सरकारी मशीनरी की संलिप्त होने का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि तीन माह से रॉयल्टी जमा न होने पर भी खनन पर रोक नहीं लगाई थी। इस बीच विधायक छत्रपाल सिंह और इंस्पेक्टर बहेड़ी धनंजय सिंह के बीच टकराव के बाद इसका खुलासा हुआ तो खनन अधिकारी ने जांच कराए बगैर रॉयल्टी न जमा करने के मामले में दोनों पट्टेधारकों को नोटिस जारी कर दिए। इधर, मामला शासन में पहुंचने के बाद लखनऊ से आई भूतत्व एवं खनिकर्म की टीम की जांच में ये खुलासा हुआ कि एसडीएम और खनन अधिकारी ने दोनों ही पट्टों पर खनन के लिए सीमांकन ही नहीं किया था। इसी का फायदा उठाकर नदी से पोकलेन और नदी की बीच धारा से पाइप के जरिये बालू खींचने के लिए सेडिमेंटेशन टैंक का भी इस्तेमाल हो रहा था। अफसरों ने उस वक्त एनजीटी के नियम-कायदों की भी परवाह नहीं की। अब अधिकारियों की पोल खुल जाने के बाद सभी अपनी गर्दन बचाने में जुटे हुए हैं। एडीएम वित्त मनोज कुमार पांडेय ने बहेड़ी की एसडीएम ममता मालवीय और खनन अधिकारी को नोटिस देकर जवाब मांगा है कि उन्होंने बगैर सीमांकन खनन करने की क्यों अनुमति दी?
शासन की जांच रिपोर्ट में यह सामने आया कि खनन पट्टों की पैमाइश किए बगैर ही खनन किया जा रहा था। यह गंभीर है। इसमें एसडीएम और खनन अधिकारी को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है।
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- मनोज कुमार पांडेय, एडीएम वित्त
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जिला प्रशासन ने बहेड़ी में मोहम्मदपुर और टियूला गांव से गुजरने वाली किच्छा नदी में खनन करने के दो पट्टे दिए थे। इन्हीं पट्टों की आड़ में यहां जमकर अवैध खनन किया जा रहा था। इसमें सरकारी मशीनरी की संलिप्त होने का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि तीन माह से रॉयल्टी जमा न होने पर भी खनन पर रोक नहीं लगाई थी। इस बीच विधायक छत्रपाल सिंह और इंस्पेक्टर बहेड़ी धनंजय सिंह के बीच टकराव के बाद इसका खुलासा हुआ तो खनन अधिकारी ने जांच कराए बगैर रॉयल्टी न जमा करने के मामले में दोनों पट्टेधारकों को नोटिस जारी कर दिए। इधर, मामला शासन में पहुंचने के बाद लखनऊ से आई भूतत्व एवं खनिकर्म की टीम की जांच में ये खुलासा हुआ कि एसडीएम और खनन अधिकारी ने दोनों ही पट्टों पर खनन के लिए सीमांकन ही नहीं किया था। इसी का फायदा उठाकर नदी से पोकलेन और नदी की बीच धारा से पाइप के जरिये बालू खींचने के लिए सेडिमेंटेशन टैंक का भी इस्तेमाल हो रहा था। अफसरों ने उस वक्त एनजीटी के नियम-कायदों की भी परवाह नहीं की। अब अधिकारियों की पोल खुल जाने के बाद सभी अपनी गर्दन बचाने में जुटे हुए हैं। एडीएम वित्त मनोज कुमार पांडेय ने बहेड़ी की एसडीएम ममता मालवीय और खनन अधिकारी को नोटिस देकर जवाब मांगा है कि उन्होंने बगैर सीमांकन खनन करने की क्यों अनुमति दी?
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शासन की जांच रिपोर्ट में यह सामने आया कि खनन पट्टों की पैमाइश किए बगैर ही खनन किया जा रहा था। यह गंभीर है। इसमें एसडीएम और खनन अधिकारी को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है।
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- मनोज कुमार पांडेय, एडीएम वित्त