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कस्तूरबा विद्यालयः बिना छात्राओं के उनके नहाने-धोने, खाने पर खर्च हो गए 84 लाख
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छात्राओं की उपस्थिति का ऑनलाइन कोई ब्योरा दर्ज नहीं, शासन ने मांगा जवाब
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बरेली। जिले के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में छात्राओं की उपस्थिति के बिना ही 84 लाख रुपये उनके भोजन और नहाने-धोने पर खर्च कर दिए गए। मामला संज्ञान में आने के बाद राज्य परियोजना निदेशक ने बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों से जवाब मांगा है। बताया जाता है कि बरेली के अलावा प्रदेश के 17 और जिलों में भी इस तरह का घपला हुआ है। हालांकि जिम्मेदार इसे तकनीकी खामी बता रहे हैं।
प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड होने वाली सूचनाओं में यह मामला सामने आया है कि कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में छात्राओं के लिए भोजन, साबुन, शैंपू, दवाएं और अन्य जरूरी सामान खरीदने के लिए 84 लाख रुपये खर्च कर दिए गए, जबकि छात्राओं की उपस्थिति शून्य रही। इस पर अब राज्य परियोजना निदेशक विजय किरन आनंद ने बेसिक शिक्षा अधिकारी से जवाब मांगा है। बरेली में 11 फरवरी से 31 मार्च के बीच भोजन मद में 46.429 लाख, मेडिकल केयर में 17.858 लाख और स्टेशनरी व अन्य सामग्री की खरीद पर 19.836 लाख रुपये खर्च किए गए। इस तरह सभी 18 स्कूलों में कुल 84.123 लाख रुपये खर्च किए गए। यह सूचना प्रेरणा पोर्टल पर चढ़ा दी गई, जबकि छात्राओं की उपस्थिति शून्य मिली। राज्य परियोजना निदेशक ने एडी बेसिक से 15 जून तक जांच रिपोर्ट तलब की है।
प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड होने वाली सूचनाओं में यह मामला सामने आया है कि कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में छात्राओं के लिए भोजन, साबुन, शैंपू, दवाएं और अन्य जरूरी सामान खरीदने के लिए 84 लाख रुपये खर्च कर दिए गए, जबकि छात्राओं की उपस्थिति शून्य रही। इस पर अब राज्य परियोजना निदेशक विजय किरन आनंद ने बेसिक शिक्षा अधिकारी से जवाब मांगा है। बरेली में 11 फरवरी से 31 मार्च के बीच भोजन मद में 46.429 लाख, मेडिकल केयर में 17.858 लाख और स्टेशनरी व अन्य सामग्री की खरीद पर 19.836 लाख रुपये खर्च किए गए। इस तरह सभी 18 स्कूलों में कुल 84.123 लाख रुपये खर्च किए गए। यह सूचना प्रेरणा पोर्टल पर चढ़ा दी गई, जबकि छात्राओं की उपस्थिति शून्य मिली। राज्य परियोजना निदेशक ने एडी बेसिक से 15 जून तक जांच रिपोर्ट तलब की है।
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कहीं कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। यह कोई घोटाला नहीं है। फरवरी, मार्च में विद्यालयों में छात्राएं उपस्थित रहीं, लेकिन पोर्टल सही से काम नहीं कर रहा था। इस कारण उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाई। हमने छात्राओं की संख्या के आधार पर ही पैसे का इस्तेमाल किया है। जो पैसा शेष बचा, उसे वापस कर दिया है। पूरा डाटा विभाग के पास है। जल्द ही शासन को इस बारे में बता दिया जाएगा। - विनय कुमार, बीएसए
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