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कान्हा गोशाला : कागजों में चकाचक, हकीकत में सूखा भूसा खा रहे गोवंश
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बरेली। सीबीगंज में संचालित कान्हा गोशाला कागजों में चकाचक है पर हकीकत अलग है। इसको लेकर नगर निगम के अफसर सच्चाई छिपाते रहते हैं। मगर जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय कमेटी के सदस्य मंडल अध्यक्ष ज्ञान प्रसाद लोधी, पूर्व पार्षद राजेंद्र मिश्रा और पार्षद अंजुला गंगवार ने नौ नवंबर को गोशाला का निरीक्षण किया तो वहां एक गाय मृत तो चार मरणासन्न हालत में मिलीं। कमेटी ने जांच रिपोर्ट मेयर को सौंप दी है। अब यह रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
शासन ने बेसहारा पशुओं को गोशाला में पहुंचाने के निर्देश दिए थे। गोशालाओं के निरीक्षण के लिए मेयर व नगर आयुक्त की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित करने के भी निर्देश दिए थे। कमेटी ने नौ नवंबर को गोशाला का निरीक्षण किया तो वहां क्षमता से 200 अधिक यानी 1,100 गोवंश मिले। सिर्फ आठ कर्मचारी मौके पर काम करते मिले। सफाई व्यवस्था भी खराब मिली। गोबर से खाद और लकड़ी बनाने वाला प्लांट भी बंद था। पशुओं के लिए बनाया गए तालाब में पानी बहुत कम और गंदा था। गायों को सूखा भूसा डाला जा रहा था। चोकर भी नहीं दिया गया। कमेटी ने रिपोर्ट में यह भी लिखा कि यह हाल तब है जब छह क्विंटल चोकर हर रोज गोशाला में आता है। परिसर में लगे 60 पेड़ सूख गए और सर्द हवा से बचाने के लिए लगाए गए तिरपाल फट चुके हैं। बिजली व्यवस्था भी खराब मिली। कमेटी सदस्य राजेंद्र मिश्रा ने बताया कि मृत गाय की जानकारी उन्होंने डॉक्टर को दी तो उसे दफनाया गया।
निरीक्षण में मिलता है सब चकाचक
कान्हा गोशाला में कई बार गोवंश के मरने की खबरें आती हैं, मगर अफसर उन्हें अफवाह बताते हैं। गोशाला में किसी को जाने की अनुमति नहीं है। अंदर क्या हो रहा है, यह किसी को पता ही नहीं चलता है। वहीं, प्रदेश के किसी मंत्री, वीवीआईपी या अफसरों का निरीक्षण होता है तो यहां सबकुछ अच्छा मिलता है, मगर अब कमेटी के निरीक्षण में पोल खुल गई है।
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गठित कमेटी ने कान्हा गोशाला से जुड़ी रिपोर्ट दे दी है। कमेटी की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। जो कमियां मिली हैं, उन्हें ठीक कराया जाएगा। - उमेश गौतम, महापौर
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शासन ने बेसहारा पशुओं को गोशाला में पहुंचाने के निर्देश दिए थे। गोशालाओं के निरीक्षण के लिए मेयर व नगर आयुक्त की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित करने के भी निर्देश दिए थे। कमेटी ने नौ नवंबर को गोशाला का निरीक्षण किया तो वहां क्षमता से 200 अधिक यानी 1,100 गोवंश मिले। सिर्फ आठ कर्मचारी मौके पर काम करते मिले। सफाई व्यवस्था भी खराब मिली। गोबर से खाद और लकड़ी बनाने वाला प्लांट भी बंद था। पशुओं के लिए बनाया गए तालाब में पानी बहुत कम और गंदा था। गायों को सूखा भूसा डाला जा रहा था। चोकर भी नहीं दिया गया। कमेटी ने रिपोर्ट में यह भी लिखा कि यह हाल तब है जब छह क्विंटल चोकर हर रोज गोशाला में आता है। परिसर में लगे 60 पेड़ सूख गए और सर्द हवा से बचाने के लिए लगाए गए तिरपाल फट चुके हैं। बिजली व्यवस्था भी खराब मिली। कमेटी सदस्य राजेंद्र मिश्रा ने बताया कि मृत गाय की जानकारी उन्होंने डॉक्टर को दी तो उसे दफनाया गया।
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निरीक्षण में मिलता है सब चकाचक
कान्हा गोशाला में कई बार गोवंश के मरने की खबरें आती हैं, मगर अफसर उन्हें अफवाह बताते हैं। गोशाला में किसी को जाने की अनुमति नहीं है। अंदर क्या हो रहा है, यह किसी को पता ही नहीं चलता है। वहीं, प्रदेश के किसी मंत्री, वीवीआईपी या अफसरों का निरीक्षण होता है तो यहां सबकुछ अच्छा मिलता है, मगर अब कमेटी के निरीक्षण में पोल खुल गई है।
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गठित कमेटी ने कान्हा गोशाला से जुड़ी रिपोर्ट दे दी है। कमेटी की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। जो कमियां मिली हैं, उन्हें ठीक कराया जाएगा। - उमेश गौतम, महापौर