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जनधन खाते में कहां से आए रुपये, नहीं बता पा रहे लोग

Tue, 27 Dec 2016 01:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली Updated Tue, 27 Dec 2016 01:52 AM IST
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Jan Dhan accounts whence came RS, not being able to tell people
jandhan - फोटो : jandhan
आयकर अधिकारियों के सामने जनधन खातेदार टिक नहीं पा रहे हैं। गांव और शहर में मजदूरी करने वाले ये जनधन खातेदार एक साल से अपने खातों में एक धेला भी जमा नहीं कर पाए। नौ नवंबर के बाद उनके खाते में एक साथ (एक हजार और पांच-पांच सौ के  नोट) एक लाख रुपये तक पहुंच गए। इस आदेश से पहले एक रुपया भी जमा न करने का वह कारण नहीं बता पा रहे हैं, जबकि बार-बार आधा घंटे तक आयकर अधिकारी यह पूछते रहे कि उनके पास यह रकम मेहनत की कमाई हुई है या फिर उनके किसी परिचित या फिर रिश्तेदार ने दी है। इन सवालों के जवाब में उनकी चुप्पी रही। सिर्फ एक कागज पर उनका लिखित जवाब था। 
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जनधन खातेदारों का लिखित में यह जवाब है कि यह रकम उनकी पत्नी ने बच्चों की शादी के लिए जुटाई थी। जब इन नोट को गैर कानूनी घोषित कर दिया गया तभी पत्नी ने बताया कि उसके पास इतनी संख्या में यह रुपये हैं। ऐसे में इन रुपयों को खातों में जमा करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था। उसी के बाद यह रुपये बैंक में जमा किए गए हैं। उनके इस जवाब को आयकर अफसर संतोषजनक नहीं मान रहे हैं। ऐसे खातोंदारों की संख्या एक चौथाई से अधिक है।
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विभागीय सूत्र बताते हैं कि निर्धारित सीमा से अधिक जनधन खातों में रुपये जमा वालों को स्रोत बताना जरूरी है। अभी सौ से ज्यादा लोग खातों में जमा हुई राशि का स्रोत नहीं बता पाए हैं। अगर सही जवाब नहीं दे पाए तो नियमानुसार कार्रवाई तय है। 
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अब हिंदी में जारी होंगे नोटिस
आयकर विभाग अभी तक अंग्रेजी भाषा में ही नोटिस और अन्य कार्रवाई करता रहा है। नोट बंदी में विभाग ज्यादा सक्रिय हुआ। विभागीय कामकाज अंग्रेजी भाषा में चल रहा है। जनधन खातेदारों को पुराने प्रारूप पर ही नोटिस जारी हो रहे हैं, जिसे किसान और जनधन खातेदार समझ नहीं पा रहे हैं, उन्हें दूसरे लोगों की मदद लेनी पड़ रही है। पिछले दिनों तमाम लोगों ने पत्र प्रेषित कर क्षेत्रीय भाषा इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया था। 

राजभाषा अधिकारी इतेश कुमार ने बताया कि नोटिस प्रारूप बंगलूरू से जारी होता है। स्थानीय स्तर पर कोई लेनादेना नहीं है। कुमार ने बताया कि हिंदी लिपि में नोटिस और कामकाज कराने के लिए मामला उठाया गया है। स्टाफ की कमी है, जल्द ही हिंदी में ही पत्राचार किया जाएगा।
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