बरेली: जल जीवन मिशन की टंकी पर कटान का खतरा, किच्छा नदी में गिरने की कगार पर, महज तीन मीटर बची दूरी
शेरगढ़ ब्लॉक के बैरमनगर गांव में जल जीवन मिशन की पानी की टंकी किच्छा नदी में गिरने की कगार पर है। नदी के तेज कटान से टंकी और नदी के बीच अब मात्र तीन-चार मीटर की दूरी बची है। खतरे को देखते हुए वहां से सामान हटाया जा रहा है।
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बरेली के शेरगढ़ विकासखंड क्षेत्र के गांव बैरमनगर में जल जीवन मिशन के तहत बनाई जा रही पानी की टंकी किच्छा नदी में समाने की कगार पर है। नदी में तेज भूमि कटान के कारण निर्माणाधीन टंकी और नदी के बीच अब मात्र तीन से चार मीटर की दूरी बची है। ग्रामीणों के अनुसार, जब टंकी का निर्माण शुरू हुआ था, तब नदी निर्माण स्थल से करीब 125 मीटर दूर थी।
परियोजना पर मंडराया खतरा
ग्रामीणों ने बताया कि हर साल बरसात में किच्छा नदी का जलस्तर बढ़ने पर भूमि का कटान होता है। इसके बावजूद निर्माण स्थल का चयन करते समय भविष्य में होने वाले कटान का उचित आकलन नहीं किया गया। परियोजना का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है। टंकी का फाउंडेशन तैयार है, परिसर में सौर ऊर्जा पैनल और पाइपलाइन भी बिछाई जा चुकी है। परिसर में गेट और अन्य कमरे भी बन गए हैं, हालांकि मुख्य पानी का टैंक अभी बनना बाकी है।
ग्रामीणों ने उठाए सवाल, सुरक्षा की मांग
हाल ही में गोला बैराज से छोड़े गए पानी से किच्छा नदी में तेज बहाव आया, जिससे भूमि कटान और बढ़ गया। ग्रामीण जलील अहमद, राधेश्याम दिवाकर, जाकिर अली, जयपाल राठौर, अमित कश्यप, उमेश गुप्ता और लालता प्रसाद गंगवार ने सवाल उठाया है कि जब क्षेत्र में हर वर्ष भूमि कटान होता है, तो इतनी महत्वपूर्ण परियोजना के लिए सुरक्षित स्थान क्यों नहीं चुना गया।
ग्रामीणों ने शीघ्र कटान रोकने के लिए ठोस सुरक्षात्मक कार्य कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि कटान जारी रहा तो लाखों रुपये की यह परियोजना नदी में समा जाएगी और सरकारी धनराशि बर्बाद हो जाएगी।
एसडीएम निधि शुक्ला ने बताया कि जलनिगम के एक्सईएन को मौके पर भेजकर निरीक्षण कराया गया। जो कीमती सामान है, उसे सुरक्षित रखवाया जा रहा है। फिलहाल बाढ़ के कारण पत्थर और पिचिंग का काम नहीं कराया जा सकता है। उच्चधिकारियों को सुरक्षा के लिए पत्र भेजा जा रहा है।